Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    राजस्थान मन्त्र प्रतिष्ठान में शतचंडी महायज्ञ का आयोजन, नवकन्या पूजन के साथ विश्व कल्याण की कामना

    38 minutes ago

    जयपुर। भारतीय वैदिक परंपरा, सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से राजस्थान मन्त्र प्रतिष्ठान के प्रांगण में शतचंडी महायज्ञ का आयोजन श्रद्धा एवं वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। अनुष्ठान में मां भगवती की आराधना के साथ लोककल्याण, विश्व शांति, राष्ट्र की समृद्धि और जनमानस के आरोग्य की कामना की गई। वैदिक मंत्रोच्चार, हवन एवं विशेष पूजा-अर्चना के बीच आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में विद्वान आचार्यों, संतों और श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

    यह आयोजन जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. मदन मोहन झा के मार्गदर्शन एवं अध्यक्षता में संपन्न हुआ। उनके सानिध्य में वैदिक परंपराओं के अनुरूप यज्ञ एवं पूजन की विभिन्न प्रक्रियाएं पूरी की गईं।

    नवदुर्गा की आराधना और नवकन्या पूजन

    शतचंडी महायज्ञ के अंतर्गत मां दुर्गा के नौ स्वरूपों—शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की विशेष पूजा-अर्चना की गई। अनुष्ठान में नारी शक्ति के सम्मान एवं धार्मिक परंपरा के प्रतीक स्वरूप नौ कन्याओं का विधिवत पूजन किया गया। कन्याओं को भोजन कराकर उपहार भेंट किए गए और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया गया।

    सफेद ज्वारे के प्रकट होने की रही विशेष चर्चा शतचंडी महायज्ञ के दौरान पारंपरिक ज्वारों के साथ सफेद रंग का ज्वारा भी दिखाई देने की विशेष चर्चा रही। इसे देखने और इसके दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह देखा गया। इस प्रसंग ने धार्मिक आयोजन के प्रति लोगों की आस्था और जिज्ञासा को विशेष रूप से आकर्षित किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. गुंजन सोनी ने सपरिवार विधि-विधान से विशेष पूजन किया तथा यज्ञ में आहुतियां अर्पित की। उन्होंने विश्वविद्यालय, समाज और राष्ट्र की निरंतर उन्नति, सुख-समृद्धि एवं आरोग्यता की मंगलकामना की।

    वैदिक ज्ञान परंपरा के संरक्षण पर जोर राजस्थान मन्त्र प्रतिष्ठान में आयोजित शतचंडी महायज्ञ भारतीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और वैदिक अनुष्ठानों के प्रति जनजागरूकता की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा। ऐसे आयोजन प्राचीन ज्ञान परंपरा को समाज से जोड़ने, सांस्कृतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने तथा आध्यात्मिक चेतना के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

     

    Click here to Read More
    Previous Article
    बढ़ते वर्क प्रेशर और डिजिटल दौर की चुनौतियों के बीच शिक्षकों की वेलबीइंग पर जोर
    Next Article
    अंग्रेजी के हुनर से वैश्विक सपनों तक: जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी में डुओलिंगो इंग्लिश टेस्ट के 10 साल का जश्न

    Related राजस्थान Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment