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    SIR विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की Z+ सुरक्षा बढ़ाई गई, दिल्ली और आगरा में प्रदर्शन के बाद लिया गया फैसला

    52 minutes ago

    Yugcharan News / 08-10-2026

    नई दिल्ली: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बढ़ते प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने उनकी मौजूदा Z+ सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया है। हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने का फैसला नए सिरे से किए गए खतरे के आकलन के बाद लिया गया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब प्रदर्शनकारी दिल्ली स्थित ज्ञानेश कुमार के आवास के नजदीक पहुंच गए थे और आगरा में उनके परिवार के घर के बाहर भी प्रदर्शन किया गया।

    रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा बढ़ाए जाने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त के आवास, चुनाव आयोग के कार्यालय और उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा व्यवस्था में अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों द्वारा दिल्ली में उनके आवास का पता लगाए जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने संभावित खतरे का दोबारा आकलन किया।

    दिल्ली और आगरा में प्रदर्शन के बाद सुरक्षा समीक्षा

    सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया कि प्रदर्शनकारियों के दिल्ली स्थित आवास तक पहुंचने की जानकारी सामने आने के बाद सभी संभावित खतरों का आकलन किया गया और सुरक्षा कवर बढ़ाया गया। अधिकारी के अनुसार, ज्ञानेश कुमार के घर के आसपास अतिरिक्त पुलिस पिकेट भी तैनात की गई।

    इसके अलावा, आगरा में उनके परिवार के घर के बाहर भी प्रदर्शन किए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती केवल मुख्य चुनाव आयुक्त की व्यक्तिगत सुरक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनके परिवार से जुड़े स्थानों की सुरक्षा को लेकर भी सतर्कता बढ़ाई गई है।

    हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार सुरक्षा बढ़ाने का आधार नया खतरा आकलन है। यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि सुरक्षा एजेंसियों ने किसी एक विशिष्ट धमकी को आधार बनाकर यह निर्णय लिया है या विभिन्न घटनाओं और प्रदर्शनों को समग्र खतरे के आकलन में शामिल किया गया है।

    SIR को लेकर कांग्रेस और विपक्ष का विरोध जारी

    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा बढ़ाए जाने की खबर ऐसे समय आई है जब कांग्रेस और विपक्षी INDIA ब्लॉक SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। विपक्षी दलों ने चुनावी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है।

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी कहा है कि विपक्ष चुनाव आयोग की कार्रवाई के खिलाफ अपना विरोध जारी रखेगा। उन्होंने संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सड़क पर उतरने, गिरफ्तारी का सामना करने और कानूनी मामलों का सामना करने की बात कही है।

    विपक्ष का आरोप है कि SIR प्रक्रिया से मतदाता सूची और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल पैदा हुए हैं। हालांकि, इन आरोपों को संबंधित संस्थाओं की ओर से अंतिम रूप से प्रमाणित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। SIR को लेकर राजनीतिक और संस्थागत स्तर पर बहस जारी है।

    CJP ने भी 10 अक्टूबर के प्रदर्शन का आह्वान किया

    इस बीच, समाचार रिपोर्ट के अनुसार CJP ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन की तैयारी तेज कर दी है। संगठन ने 10 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है और कहा है कि चुनाव प्रणाली में व्यापक सुधार होने तक उसका आंदोलन जारी रहेगा।

    CJP इससे पहले 6 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के सांसदों द्वारा चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर निकाले गए विरोध मार्च के समर्थन में भी सामने आया था। संगठन ने उस प्रदर्शन को लोकतंत्र और संविधान की रक्षा से जुड़ी व्यापक मुहिम का हिस्सा बताया था।

    CJP ने 2023 के उस कानून को वापस लेने की मांग भी उठाई है जो चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित है। संगठन के अनुसार, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए स्वतंत्र चयन प्रक्रिया होनी चाहिए।

    SIR पर चुनाव आयुक्तों की असहमति की रिपोर्ट

    SIR को लेकर विवाद उस समय और गहरा गया जब इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी।

    रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने रिकॉर्ड पर इन फैसलों और आदेशों को लेकर कहा था कि इन्हें उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किया गया। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्ष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR से जुड़े निर्णयों को लेकर अपने सवाल और तेज कर दिए।

    हालांकि, इस संबंध में सामने आए दावों और रिपोर्टों को उनके संदर्भ में ही देखा जाना आवश्यक है। चुनाव आयोग की आंतरिक प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों और संस्थागत स्पष्टीकरणों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

    क्या है Z+ सुरक्षा?

    Z+ सुरक्षा भारत सरकार द्वारा गंभीर और विश्वसनीय खतरे का सामना कर रहे व्यक्तियों को प्रदान की जाने वाली सर्वोच्च सामान्य वीआईपी सुरक्षा श्रेणी है। किसी व्यक्ति को यह सुरक्षा स्थायी रूप से नहीं दी जाती। खतरे की स्थिति और सुरक्षा संबंधी आकलन के आधार पर इसकी समय-समय पर समीक्षा की जाती है।

    गृह मंत्रालय के अनुसार, किसी व्यक्ति की सुरक्षा व्यवस्था उसके खतरे की धारणा यानी थ्रेट परसेप्शन के आकलन पर निर्भर करती है। इस आकलन में केंद्रीय खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों, जिसमें इंटेलिजेंस ब्यूरो भी शामिल है, से प्राप्त जानकारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    इसका अर्थ यह है कि किसी व्यक्ति को दी गई सुरक्षा श्रेणी परिस्थितियों के अनुसार बदली जा सकती है। खतरे के स्तर में बदलाव होने पर सुरक्षा में अतिरिक्त जवानों की तैनाती या अन्य सुरक्षा उपाय किए जा सकते हैं।

    Z+ सुरक्षा में क्या-क्या शामिल होता है?

    Z+ सुरक्षा व्यवस्था में आम तौर पर चौबीसों घंटे सुरक्षा प्रदान की जाती है। इसमें सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति के आवास, कार्यालय, आवाजाही और यात्रा मार्गों की सुरक्षा शामिल हो सकती है।

    सुरक्षा व्यवस्था में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और विशेष सुरक्षा इकाइयों के जवानों की तैनाती की जा सकती है। इसके तहत आवास और कार्यालय के आसपास सशस्त्र जवानों की तैनाती, यात्रा के दौरान सुरक्षा दल, प्रवेश और निकास की निगरानी तथा रूट सिक्योरिटी जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं।

    हालांकि, किसी व्यक्ति की वास्तविक सुरक्षा व्यवस्था और तैनात जवानों की संख्या खतरे के आकलन तथा संबंधित सुरक्षा एजेंसियों के निर्णय पर निर्भर करती है। इसलिए Z+ सुरक्षा का मतलब हर व्यक्ति के लिए बिल्कुल एक जैसी तैनाती नहीं होता।

    सुरक्षा बढ़ाए जाने का राजनीतिक संदर्भ

    ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच SIR को लेकर राजनीतिक टकराव तेज है। एक ओर विपक्ष प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग से संबंधित निर्णयों और प्रक्रियाओं पर सार्वजनिक बहस जारी है।

    मुख्य चुनाव आयुक्त के आवास के आसपास प्रदर्शन और उनके परिवार से जुड़े स्थान पर विरोध प्रदर्शन की घटनाओं के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने खतरे का नए सिरे से आकलन किया है। इसके आधार पर उनके आवास, चुनाव आयोग कार्यालय और व्यक्तिगत सुरक्षा दल में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

    फिलहाल, सुरक्षा बढ़ाए जाने का तत्काल कारण नए खतरे के आकलन को बताया गया है। SIR को लेकर राजनीतिक विवाद और विरोध प्रदर्शन जारी रहने के बीच आने वाले दिनों में ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की सुरक्षा व्यवस्था पर एजेंसियों की निगरानी बनी रहने की संभावना है।

     
     
     
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