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    कंगना रनौत ने व्यक्तित्व अधिकारों के कथित दुरुपयोग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया, AI कंटेंट और फेक न्यूज पर जताई चिंता

    54 minutes ago

    Yugcharan News / 08-10-2026

    नई दिल्ली: अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत ने अपने नाम, तस्वीर, पहचान और व्यक्तित्व के कथित अनधिकृत इस्तेमाल के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को कंगना रनौत द्वारा दायर मुकदमे में संबंधित पक्षों को समन जारी किए। अदालत ने उनके अंतरिम राहत संबंधी आवेदन पर भी नोटिस जारी किया है। इस मामले में कथित फेक न्यूज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार सामग्री और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उनकी पहचान तथा व्यक्तित्व के इस्तेमाल से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं।

    न्यायमूर्ति विकास महाजन की अदालत ने कंगना रनौत की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान उनके नाम, तस्वीर और व्यक्तित्व के कथित अनधिकृत इस्तेमाल से संबंधित सामग्री पर विचार किया। याचिका में अभिनेत्री ने अपने व्यक्तित्व और पब्लिसिटी राइट्स की सुरक्षा की मांग की है।

    अदालत के समक्ष पेश की गई ऑनलाइन सामग्री की जांच

    सुनवाई के दौरान कंगना रनौत की ओर से पेश वकील ने अदालत के सामने कई वेब लिंक प्रस्तुत किए। इनमें एक एनिमेटेड सामग्री और एक मीम भी शामिल था। अदालत ने इन सामग्रियों को देखने के बाद प्रथम दृष्टया टिप्पणी की कि इनमें से कुछ सामग्री व्यंग्यात्मक प्रतीत होती है।

    कंगना रनौत के वकील ने अदालत को स्पष्ट किया कि फिलहाल इन सामग्रियों को हटाने की मांग पर जोर नहीं दिया जा रहा है। यानी इस चरण में याचिकाकर्ता की ओर से संबंधित सामग्री को तत्काल हटाने के लिए अदालत से आदेश की मांग नहीं की गई।

    रिपोर्ट के अनुसार, कंगना की ओर से पेश अधिवक्ता साकेत सिकरी ने अदालत को बताया कि मुकदमे की अग्रिम प्रति संबंधित पक्षों को दिए जाने के बाद कुछ प्रतिवादियों ने कथित आपत्तिजनक सामग्री पहले ही हटा दी थी। इसके बाद अदालत ने मुकदमे में समन जारी किए और अंतरिम निषेधाज्ञा की मांग वाले आवेदन पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया।

    कुछ प्रतिवादियों के नाम हटाए गए

    सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने कंगना रनौत के वकील को पक्षकारों की सूची यानी मेमो ऑफ पार्टीज में संशोधन करने का निर्देश भी दिया। अदालत ने गौर किया कि कार्यवाही में शामिल कुछ प्रतिवादियों को पहले ही हटा दिया गया है।

    अब इस मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी 2027 को निर्धारित की गई है। उस समय अदालत मामले में आगे की दलीलों और याचिका से जुड़े पहलुओं पर विचार कर सकती है।

    व्यक्तित्व अधिकार क्या हैं?

    कंगना रनौत की याचिका ऐसे समय में सामने आई है जब भारत में मशहूर हस्तियों के व्यक्तित्व और प्रचार अधिकारों से जुड़े मामलों पर अदालतों में लगातार सुनवाई हो रही है। विशेष रूप से दिल्ली हाईकोर्ट में बॉलीवुड कलाकारों और सार्वजनिक हस्तियों ने अपने नाम, तस्वीर, आवाज, समानता, पहचान और अन्य विशिष्ट व्यक्तिगत विशेषताओं के अनधिकृत इस्तेमाल के खिलाफ कानूनी संरक्षण की मांग की है।

    व्यक्तित्व अधिकार किसी व्यक्ति की पहचान और उसके व्यक्तित्व से जुड़े उन अधिकारों को संदर्भित करते हैं, जिनके तहत उसकी पहचान, नाम, तस्वीर, आवाज, समानता या अन्य विशिष्ट पहचान संबंधी विशेषताओं के व्यावसायिक या अन्य अनधिकृत इस्तेमाल पर आपत्ति उठाई जा सकती है। हालांकि, प्रत्येक मामले में अदालत संबंधित तथ्यों, सामग्री और कानूनी परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लेती है।

    अमिताभ बच्चन और अनिल कपूर के मामलों में भी सामने आया था मुद्दा

    दिल्ली हाईकोर्ट इससे पहले अभिनेता अमिताभ बच्चन के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा से जुड़े मामले में भी आदेश दे चुका है। उस मामले में अभिनेता के नाम, तस्वीर, आवाज और व्यक्तित्व से जुड़ी अन्य विशेषताओं के अनधिकृत इस्तेमाल का मुद्दा सामने आया था।

    इसी तरह अभिनेता अनिल कपूर के मामले में भी दिल्ली हाईकोर्ट ने उनके व्यक्तित्व अधिकारों को संरक्षण दिया था। इसमें उनके नाम, तस्वीर, समानता, आवाज और उनकी विशिष्ट अभिव्यक्तियों से जुड़े पहलू शामिल थे।

    इसके अलावा दक्षिण भारतीय अभिनेता रजनीकांत और अभिनेता जैकी श्रॉफ समेत अन्य सार्वजनिक हस्तियों से जुड़े मामलों में भी व्यक्तित्व और पब्लिसिटी राइट्स का मुद्दा अदालतों के सामने आया है। गायक अरिजीत सिंह और सोनू निगम जैसे कलाकारों से जुड़े मामलों ने भी इस बहस को आगे बढ़ाया है कि किसी सार्वजनिक व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल किस सीमा तक किया जा सकता है और कब ऐसा इस्तेमाल उसके अधिकारों का उल्लंघन माना जा सकता है।

    AI तकनीक ने बढ़ाई नई कानूनी चुनौती

    कंगना रनौत का मामला इस व्यापक कानूनी बहस में एक नए पहलू को सामने लाता है। इंटरनेट और सोशल मीडिया पर AI आधारित सामग्री के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के कारण सार्वजनिक हस्तियों की तस्वीर, आवाज और पहचान का इस्तेमाल पहले की तुलना में अधिक आसान हो गया है।

    AI तकनीक के जरिए किसी व्यक्ति की तस्वीर या आवाज जैसी विशेषताओं का इस्तेमाल कर ऐसी सामग्री तैयार की जा सकती है जो वास्तविक प्रतीत हो सकती है। ऐसे में यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि किसी सार्वजनिक व्यक्ति की पहचान का डिजिटल इस्तेमाल किस सीमा तक स्वीकार्य है और किस स्थिति में यह कानूनी विवाद का विषय बन सकता है।

    कंगना रनौत की याचिका में भी कथित फेक न्यूज, AI से तैयार सामग्री और उनकी पहचान से संबंधित ऑनलाइन सामग्री को लेकर चिंता जताई गई है। हालांकि, अदालत ने जिन सामग्रियों को सुनवाई के दौरान देखा, उनमें से कुछ को प्रथम दृष्टया व्यंग्यात्मक बताया गया। इसलिए इस स्तर पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि अदालत ने सभी संबंधित ऑनलाइन सामग्री को अवैध या आपत्तिजनक माना है।

    मामले में आगे क्या होगा?

    दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा समन जारी किए जाने और अंतरिम राहत संबंधी आवेदन पर नोटिस दिए जाने के बाद अब मामले में संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। अदालत आगे यह देख सकती है कि याचिका में लगाए गए आरोपों और प्रस्तुत की गई ऑनलाइन सामग्री के संबंध में कानूनी तौर पर किस प्रकार की राहत दी जा सकती है।

    साथ ही, पक्षकारों की संशोधित सूची दाखिल किए जाने के बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी। अगली सुनवाई 3 फरवरी 2027 को होगी।

     

    कंगना रनौत का यह मामला केवल एक सेलिब्रिटी के नाम और तस्वीर के इस्तेमाल तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल दौर में सार्वजनिक हस्तियों की पहचान की सुरक्षा से जुड़े व्यापक सवालों को भी सामने लाता है। खास तौर पर AI आधारित सामग्री और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच अदालतों के सामने यह चुनौती बढ़ रही है कि व्यक्तित्व अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, व्यंग्य और डिजिटल सामग्री के इस्तेमाल के बीच कानूनी संतुलन किस तरह कायम किया जाए।

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