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    RTI कानून के 21 वर्ष: नरबदखेड़ा में जनसंघर्ष को किया याद, संग्रहालय के स्थायी भवन की रखी नींव

    1 hour ago

    दस राज्यों के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लिया हिस्सा; बदनोर, जवाजा, जैतारण, भीम और देवगढ़ की सैकड़ों महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी

    ब्यावर। सूचना का अधिकार (RTI) कानून के 21 वर्ष पूरे होने पर ब्यावर के नरबदखेड़ा में जनमेला आयोजित किया गया। इसमें दस राज्यों से आए सामाजिक कार्यकर्ताओं, मजदूर-किसान आंदोलन से जुड़े साथियों, युवाओं और आसपास के क्षेत्रों की सैकड़ों महिलाओं ने भाग लिया। मेले में RTI आंदोलन के इतिहास और मौजूदा चुनौतियों पर चर्चा हुई। इस अवसर पर RTI संग्रहालय के स्थायी भवन की नींव भी रखी गई।

    सूचना का अधिकार कानून लंबे जनसंघर्ष का परिणाम है। मजदूरी के भुगतान, सरकारी रिकॉर्ड में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ राजस्थान के गांवों में उठी आवाज ने जनसुनवाइयों के जरिए राष्ट्रीय आंदोलन का रूप लिया। मजदूर किसान शक्ति संगठन (MKSS) सहित अनेक साथियों के प्रयासों से सरकारी रिकॉर्ड तक जनता की पहुंच और जवाबदेही की मांग मजबूत हुई। इसी संघर्ष के फलस्वरूप वर्ष 2005 में RTI कानून बना।

    आम लोगों के संघर्ष की विरासत

    सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय ने कहा कि सूचना का अधिकार आम लोगों के साहस और भागीदारी से हासिल हुआ। इस आंदोलन ने दिखाया कि साधारण लोग संगठित होकर व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। ब्यावर, भीम और आसपास के क्षेत्रों की इसमें अहम भूमिका रही है। इस इतिहास को सहेजकर अगली पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।

    निखिल डे ने कहा कि RTI कानून जनता के संघर्ष से मिला अधिकार है, जो नागरिकों को सरकार से सवाल पूछने और सरकारी कामकाज की जानकारी हासिल करने की ताकत देता है। इसकी मूल भावना की रक्षा करना सामूहिक जिम्मेदारी है।

    पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL) की राष्ट्रीय अध्यक्ष कविता श्रीवास्तव ने RTI को जनभागीदारी और सरकारी जवाबदेही का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने ब्यावर में RTI कार्यकर्ताओं पर हुए हमले की निंदा करते हुए उचित कार्रवाई की मांग की।

    ब्यावर को ‘RTI सिटी’ के रूप में पहचान दिलाने का संकल्प

    निरंतर के संपादक रामप्रसाद कुमावत ने ब्यावर को सूचना के अधिकार आंदोलन की ऐतिहासिक पहचान के रूप में स्थापित करने की जरूरत बताई और इसे ‘RTI सिटी’ के रूप में पहचान दिलाने की बात कही। उन्होंने आंदोलन में महिलाओं की भूमिका का उल्लेख करते हुए ‘घाघरा पलटन’ के संघर्ष को याद किया। इन महिलाओं ने आंदोलन को मजबूती देने और RTI कानून की मांग को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    चुन्नी सिंह ने कहा कि सूचना के अधिकार के बाद अब जवाबदेही कानून हासिल करना जरूरी है, ताकि सरकारी व्यवस्था आम जनता के प्रति उत्तरदायी बने। लोगों की शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई हो और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

    स्थानीय महिलाओं और युवाओं ने की भागीदारी

    बदनोर, जवाजा, जैतारण, भीम और देवगढ़ से आई सैकड़ों महिलाओं ने मेले में हिस्सा लिया। उन्होंने अपने क्षेत्रों में मजदूरी, पेंशन, सरकारी योजनाओं और अन्य जनहित के मुद्दों पर अधिकार हासिल करने के अनुभव साझा किए। MKSS के साथ काम कर रहे विभिन्न विश्वविद्यालयों के इंटर्न और युवाओं ने भी भागीदारी की।

    झारखंड से आए सार्थक, सरोज प्रिया, लाल सिंह, प्रवीर, डॉ. शेख, शंकर सिंह सहित अन्य वक्ताओं ने RTI आंदोलन के इतिहास और मौजूदा चुनौतियों पर विचार रखे। चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि सूचना तक पहुंच के साथ नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और सरकारी कामकाज की निगरानी भी जरूरी है।

    मेले में विभिन्न स्टॉलों के जरिए आंदोलन, जनअधिकारों और सूचना के अधिकार से जुड़ी सामग्री लोगों तक पहुंचाई गई। जलेबी-पकौड़ी की दुकानों और सामूहिक मेल-मिलाप ने आयोजन को जनसंघर्ष की स्मृतियों, संवाद और आपसी सहयोग का मंच बनाया।

    RTI संग्रहालय के स्थायी भवन की नींव

    अरुणा रॉय, निखिल डे और शंकर सिंह सहित सामाजिक कार्यकर्ताओं ने RTI संग्रहालय के स्थायी भवन की नींव रखी। प्रस्तावित संग्रहालय में आंदोलन से जुड़े दस्तावेज, तस्वीरें और ऐतिहासिक सामग्री संरक्षित की जाएगी, ताकि सूचना के अधिकार के लिए हुए संघर्ष की कहानी आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच सके।

    SIR में कटे नामों का सर्वे, मताधिकार की रक्षा का संकल्प

    मेले में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान ब्यावर विधानसभा क्षेत्र में हटाए गए नामों का जमीनी सर्वे करने का संकल्प लिया गया। सर्वे के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि कितने पात्र मतदाताओं के नाम सूची से कटे हैं और कौन अपने मताधिकार से वंचित होने की आशंका में है। प्रभावित लोगों की पहचान कर उनके नाम मतदाता सूची में दोबारा जुड़वाने के प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए लोगों को संगठित करते हुए लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से संघर्ष किया जाएगा तथा निर्वाचन अधिकारियों से जवाबदेही की मांग की जाएगी।

    लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास

    मेले का संदेश था कि सूचना का अधिकार, मताधिकार और सरकारी जवाबदेही लोकतंत्र के बुनियादी आधार हैं। इन अधिकारों को हासिल करने और सुरक्षित रखने में जनभागीदारी की निर्णायक भूमिका है। RTI संग्रहालय के स्थायी भवन की नींव और SIR में हटाए गए नामों की जांच के लिए सर्वे का संकल्प इसी साझा प्रयास की कड़ी हैं।

     

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