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    यूनिवर्सिटी महाराजा कॉलेज में 182वाँ स्थापना दिवस समारोह हर्षोल्लास के साथ आयोजित

    1 hour ago

    राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के यूनिवर्सिटी महाराजा कॉलेज में सोमवार को 182वाँ स्थापना दिवस समारोह हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। इस अवसर पर वर्ष 1844 में स्थापित संस्थान की गौरवशाली विरासत का स्मरण करते हुए शैक्षणिक उत्कृष्टता एवं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया गया।

    समारोह में राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE), अजमेर के अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। जयपुर के सिविल लाइंस क्षेत्र के विधायक एवं विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सदस्य  गोपाल शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत समारोह के संरक्षक रहे, जबकि महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. सरिना कालिया ने अतिथियों एवं उपस्थित जनसमूह का स्वागत किया।

    कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इसके पश्चात राष्ट्रीय गीत एवं विश्वविद्यालय कुलगीत प्रस्तुत किए गए। स्वागत उद्बोधन में प्राचार्य प्रो. सरिना कालिया ने महाविद्यालय के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए पूर्व शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के योगदान को स्मरण किया। उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय सेना तथा सांस्कृतिक गतिविधियों एवं अन्य क्षेत्रों में विद्यार्थियों की उपलब्धियों पर गर्व व्यक्त किया। साथ ही, उन्होंने संकाय सदस्यों के शोध कार्यों को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में शिक्षकों की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया।

     गोपाल शर्मा ने स्वतंत्रता संग्राम में महाविद्यालय के योगदान का उल्लेख करते हुए स्वतंत्र चिंतन तथा जागरूक एवं उत्तरदायी वैश्विक नागरिकों के निर्माण में शिक्षा की भूमिका को रेखांकित किया। श्री हनुमान सिंह राठौड़ ने भारत की समृद्ध बौद्धिक विरासत एवं पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को आत्मविश्वास, राष्ट्रप्रेम और देशभक्ति की भावना विकसित करने के लिए प्रेरित किया। राजस्थान विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. नवीन शर्मा ने महाविद्यालय की समृद्ध गुरु-शिष्य परंपरा को रेखांकित किया तथा विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के हित में कुलगुरु प्रो. सारस्वत द्वारा की गई सकारात्मक पहलों की सराहना की। उन्होंने उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय की प्रगति के प्रति विश्वास व्यक्त किया।

    कुलगुरु प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत ने महाविद्यालय की गौरवशाली विरासत तथा पूर्व प्राचार्यों एवं शिक्षकों के सम्मान की परंपरा की सराहना की। उन्होंने शिक्षकों के न्यायसंगत अधिकारों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों एवं समाज के प्रति उनके दायित्वों पर भी बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को राष्ट्र का भविष्य बताते हुए शिक्षकों से उनके चरित्र निर्माण एवं नैतिक मूल्यों के विकास में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

    समारोह में महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्यों को संस्थान के विकास में उनके महत्त्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया गया तथा विभिन्न उपलब्धियाँ अर्जित करने वाले विद्यार्थियों का अभिनंदन किया गया। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक एवं जीवंत नृत्य प्रस्तुतियों ने समारोह में उत्साह और सांस्कृतिक रंग भर दिए। समारोह में महाविद्यालय के पदाधिकारियों, संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों एवं गणमान्य अतिथियों ने सहभागिता की। यह आयोजन संस्थान की गौरवशाली परंपरा एवं सामूहिक उपलब्धियों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर बना। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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