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    एबीवीपी की शोभा यात्रा में उमड़ा युवाओं का सैलाब

    3 weeks ago

    विचार तभी सार्थक होते हैं जब वे धरातल पर उतरें: जोशी
    जयपुर। गुलाबी नगर जयपुर एक बार फिर राष्ट्रभक्ति, संगठनात्मक अनुशासन और युवा चेतना के विराट उद्घोष का साक्षी बना, जब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) जयपुर प्रांत का 61वाँ प्रांत अधिवेशन पूर्ण वैचारिक तेज, ऊर्जा और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ।

    अधिवेशन के दूसरे दिन आयोजित प्रमुख वैचारिक सत्र “युवा भारत का आह्वान : विचार बैठक 2025 का क्रियान्वयन” विषय पर अभाविप के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री  देवदत्त जोशी ने प्रांतभर से आए सैकड़ों कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि विचार तभी सार्थक होते हैं जब वे धरातल पर उतरें। अभाविप केवल विमर्श करने वाला संगठन नहीं, बल्कि विचारों को कार्य, कार्य को आंदोलन और आंदोलन को राष्ट्रनिर्माण में परिवर्तित करने वाला संगठन है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा परिसरों में वैचारिक स्पष्टता, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रीय चेतना के साथ निरंतर कार्य करें।

    जोशी ने अपने संबोधन में संगठन की कार्यपद्धति, आगामी लक्ष्यों और स्थानीय स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि अभाविप का प्रत्येक कार्यकर्ता केवल छात्र हितों का प्रतिनिधि नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी नागरिक के रूप में कार्य करता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे राष्ट्र के समक्ष उपस्थित चुनौतियों का समाधान संगठनात्मक शक्ति और सकारात्मक दृष्टिकोण से करें।

    अधिवेशन के अंतर्गत 30 दिसंबर 2025 को जयपुर शहर में एक भव्य, अनुशासित और राष्ट्रभाव से ओतप्रोत शोभायात्रा का आयोजन किया गया। यह शोभायात्रा अग्रवाल कॉलेज, सांगानेरी गेट से प्रारंभ होकर बड़ी चौपड़, त्रिपोलिया गेट और चौड़ा रास्ता होते हुए अल्बर्ट हॉल पहुँची। दोपहर 3:30 बजे प्रारंभ हुई इस शोभायात्रा में हजारों की संख्या में अभाविप कार्यकर्ता केसरिया ध्वज के साथ अनुशासित पंक्तियों में सम्मिलित हुए।

    शोभायात्रा के दौरान “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के उद्घोष से जयपुर के ऐतिहासिक मार्ग गूंज उठे। ढोल-नगाड़ों, देशभक्ति नारों और अनुशासित मार्च के साथ निकली इस शोभायात्रा ने यह संदेश दिया कि अभाविप की वास्तविक शक्ति उसकी एकता, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति अटूट प्रतिबद्धता में निहित है। नगरवासियों ने भी स्थान-स्थान पर पुष्पवर्षा कर छात्रशक्ति के इस राष्ट्रवादी स्वरूप का स्वागत किया।

    शोभायात्रा के उपरांत जयपुर के ऐतिहासिक अल्बर्ट हॉल परिसर में खुले अधिवेशन का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों विद्यार्थियों, अभाविप कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों की उपस्थिति रही। सायं 5 बजे प्रारंभ हुए इस खुले अधिवेशन में अभाविप के राष्ट्रीय नेतृत्व ने राष्ट्र, समाज और शिक्षा से जुड़े समसामयिक विषयों पर अपने विचार रखे।

    खुले अधिवेशन को संबोधित करते हुए अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि आज देश के सामने अनेक आंतरिक और बाह्य चुनौतियाँ हैं, जिनका सामना संगठित और राष्ट्रनिष्ठ छात्रशक्ति ही कर सकती है। उन्होंने बांग्लादेशी घुसपैठ को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताया तथा नक्सलवाद को युवाओं को भ्रमित करने वाला राष्ट्रविरोधी षड्यंत्र निरूपित किया। साथ ही उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को छात्र आंदोलन का अनिवार्य विषय बताते हुए प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।

    डॉ. सोलंकी ने कहा कि अभाविप का छात्र आंदोलन केवल अधिकारों की बात नहीं करता, बल्कि कर्तव्यों की चेतना जाग्रत कर राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व का भाव विकसित करता है। उन्होंने ऐतिहासिक छात्र आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक परिवर्तनों में छात्रशक्ति की भूमिका सदैव निर्णायक रही है।

    अधिवेशन में अभाविप के राष्ट्रीय मंत्री  हर्षित ननोमा की गरिमामयी उपस्थिति रही। इसके साथ ही संगठन के केंद्रीय कार्यसमिति सदस्य भी अधिवेशन में विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने संगठनात्मक अनुभव साझा करते हुए कहा कि अभाविप की शक्ति उसकी अखिल भारतीय संरचना, अनुशासित कार्यपद्धति और वैचारिक स्पष्टता में निहित है। केंद्रीय कार्यसमिति सदस्यों ने प्रांत के कार्यकर्ताओं से संवाद कर जमीनी कार्यों को और अधिक सशक्त करने पर बल दिया।

    अधिवेशन के दौरान विभिन्न दायित्ववान कार्यकर्ताओं द्वारा समकालीन विषयों पर विचार प्रस्तुत किए गए। प्रांत सह मंत्री अंजलि चौरिसिया ने महिला सशक्तिकरण पर विचार रखते हुए कहा कि शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के माध्यम से महिला सशक्तिकरण ही सशक्त भारत की नींव है। अनुष्का चौधरी ने छात्रों में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए जागरूकता अभियानों की आवश्यकता पर बल दिया।

    प्रांत मंत्री सुभेन्द्र सिंह ने महाराणा प्रताप के जीवन को पर्यावरण संरक्षण, स्वाभिमान और संघर्ष से जोड़ते हुए युवाओं को प्रेरणा लेने का संदेश दिया। रोहित मीणा ने छात्रसंघ चुनावों को लोकतांत्रिक नेतृत्व निर्माण की प्रयोगशाला बताते हुए छात्र राजनीति की सकारात्मक भूमिका को रेखांकित किया। अभिनव सिंह ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों, गुणवत्ता, रोजगारपरक शिक्षा और मूल्य आधारित शिक्षण पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

    अधिवेशन में जयपुर प्रांत के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से आए पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने अपने अनुभव, सुझाव और संगठनात्मक गतिविधियाँ साझा कीं, जिससे अभाविप की जमीनी मजबूती और व्यापक सहभागिता स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई।

    समग्र रूप से अभाविप जयपुर प्रांत का 61वाँ प्रांत अधिवेशन केवल एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्रवादी युवा चेतना का सशक्त घोष सिद्ध हुआ। विचार से क्रियान्वयन, शिक्षा से समाज और छात्र से राष्ट्र—इस अधिवेशन ने हर स्तर पर स्पष्ट दिशा प्रदान की। यह अधिवेशन इस बात का प्रमाण बना कि जब युवा संगठित होते हैं, तब राष्ट्र सशक्त होता है।

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