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    ग्रीनलैंड मुद्दे पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने संयम की अपील की, ट्रंप के टैरिफ़ बयान के बाद सहयोगियों से शांत बातचीत पर ज़ोर

    2 hours ago

    ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से टैरिफ़ लगाने की चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती चिंताओं के बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने सहयोगी देशों से संयम और शांतिपूर्ण संवाद बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सहयोगियों के बीच मतभेदों को सुलझाने के लिए व्यापारिक दबाव या टैरिफ़ जैसे कदम उचित नहीं हैं और इससे दीर्घकालिक साझेदारियों को नुकसान पहुंच सकता है।

    सोमवार को लंदन में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री स्टारमर ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से ब्रिटेन और अमेरिका के बीच संबंधों ने दोनों देशों को सुरक्षा और समृद्धि प्रदान की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन संबंधों को बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है, लेकिन इसके लिए आपसी सम्मान और संवाद जरूरी है, न कि दबाव की राजनीति।

    ग्रीनलैंड पर बढ़ता विवाद

    हाल के दिनों में ग्रीनलैंड को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया था कि यदि यूरोपीय देश अमेरिका की ग्रीनलैंड से जुड़ी योजनाओं का विरोध करते हैं, तो उन पर टैरिफ़ लगाए जा सकते हैं। इस बयान के बाद यूरोप के कई देशों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और इसे सहयोगी देशों के बीच विश्वास को कमजोर करने वाला कदम बताया।

    ग्रीनलैंड, जो डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है, रणनीतिक और भू-राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। प्राकृतिक संसाधनों और आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के कारण यह इलाका वैश्विक शक्तियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इसी पृष्ठभूमि में ट्रंप की टिप्पणियों ने यूरोप और उत्तरी अमेरिका के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।

    “टैरिफ़ सहयोगियों के खिलाफ हथियार नहीं”

    प्रधानमंत्री स्टारमर ने स्पष्ट किया कि टैरिफ़ जैसे आर्थिक उपायों का इस्तेमाल सहयोगी देशों के खिलाफ नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यापारिक प्रतिबंध अक्सर जवाबी कार्रवाई को जन्म देते हैं, जिससे “टैरिफ़ युद्ध” की स्थिति बन सकती है। ऐसी स्थिति न केवल आर्थिक स्थिरता को प्रभावित करती है, बल्कि राजनीतिक रिश्तों में भी दरार डालती है।

    स्टारमर ने कहा, “हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी तरह का टैरिफ़ युद्ध न हो। सहयोगी देशों के बीच मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन उन्हें सुलझाने का रास्ता बातचीत और आपसी समझ से होकर गुजरता है।”

    ग्रीनलैंड का भविष्य किसके हाथ में

    ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर भी ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने अपनी स्थिति साफ रखी। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड से जुड़े किसी भी निर्णय का अधिकार केवल डेनमार्क और ग्रीनलैंड की जनता के पास है। किसी बाहरी दबाव या आर्थिक धमकी के जरिए इस तरह के संवेदनशील मुद्दों को प्रभावित करना उचित नहीं है।

    उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों की मजबूती इसी बात पर निर्भर करती है कि सदस्य देश एक-दूसरे की संप्रभुता और निर्णय प्रक्रिया का सम्मान करें। “गठबंधन दबाव से नहीं, बल्कि साझेदारी और भरोसे से टिके रहते हैं,” उन्होंने कहा।

    यूरोप में बढ़ती प्रतिक्रिया

    ट्रंप के बयान के बाद यूरोप के कई देशों ने चिंता जताई है। कुछ यूरोपीय नेताओं ने इसे अनावश्यक उकसावे वाला कदम बताया, जबकि अन्य ने चेतावनी दी कि इस तरह की धमकियों से वैश्विक व्यापार व्यवस्था अस्थिर हो सकती है। यूरोपीय संघ ने भी संकेत दिया है कि यदि टैरिफ़ लगाए जाते हैं, तो जवाबी कदमों पर विचार किया जा सकता है।

    इस पृष्ठभूमि में ब्रिटेन की भूमिका अहम मानी जा रही है, क्योंकि वह अमेरिका और यूरोप दोनों के साथ मजबूत संबंध रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्टारमर की अपील तनाव कम करने की दिशा में एक संतुलित प्रयास है।

    ब्रिटेन-अमेरिका संबंधों पर असर?

    हालांकि स्टारमर ने अमेरिका के साथ संबंधों को बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई, लेकिन उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मित्रता का मतलब हर मुद्दे पर सहमति नहीं होता। कूटनीतिक हलकों में इसे ब्रिटेन की स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि इस तरह के टैरिफ़ विवाद बढ़ते हैं, तो इसका असर केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग पर भी पड़ सकता है। ऐसे में शांत बातचीत और कूटनीतिक चैनलों का सक्रिय रहना बेहद जरूरी है।

    निष्कर्ष

    ग्रीनलैंड को लेकर उभरे विवाद ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि वैश्विक राजनीति में आर्थिक हथियारों का इस्तेमाल कितनी तेजी से तनाव को बढ़ा सकता है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की अपील इस बात पर जोर देती है कि सहयोगियों के बीच मतभेदों का समाधान संवाद, सम्मान और साझेदारी से ही संभव है।

     

    आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि अमेरिका और यूरोपीय देश इस मुद्दे पर किस तरह आगे बढ़ते हैं। फिलहाल, ब्रिटेन का रुख स्पष्ट है—टैरिफ़ नहीं, बल्कि बातचीत ही स्थायी समाधान का रास्ता है।

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