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    राहुल गांधी मानहानि मामले में अदालत में पेश नहीं हुए, अगली सुनवाई 20 फरवरी को

    1 hour ago

    कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सोमवार को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर स्थित एमपी-एमएलए विशेष अदालत में तय सुनवाई पर उपस्थित नहीं हो सके। इस पर अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 फरवरी की तारीख निर्धारित करते हुए राहुल गांधी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का अंतिम अवसर प्रदान किया है। अदालत में पेशी न होने का कारण पूर्व निर्धारित कार्यक्रम बताया गया, जिसके चलते राहुल गांधी उस समय केरल में मौजूद थे।

    क्या है मामला

    यह मामला वर्ष 2018 से जुड़ा हुआ है, जब चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए एक कथित बयान को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का परिवाद दायर किया गया था। शिकायतकर्ता स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने आरोप लगाया है कि चुनावी भाषण के दौरान की गई टिप्पणी से उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची।

    मामले की सुनवाई कई वर्षों से चल रही है और यह प्रकरण समय-समय पर राजनीतिक और कानूनी चर्चाओं में बना रहा है। राहुल गांधी इस मामले में पहले भी अदालत के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रख चुके हैं और आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक प्रेरणा से जुड़ा बताया है।

    अदालत में क्या हुआ

    सोमवार को होने वाली सुनवाई में राहुल गांधी को अदालत के समक्ष अपना बयान दर्ज कराना था। हालांकि, उनके अधिवक्ता ने अदालत को सूचित किया कि राहुल गांधी पहले से तय कार्यक्रम के कारण केरल में हैं और इस कारण वे सुल्तानपुर नहीं पहुंच सके। इस दलील को सुनने के बाद अदालत ने अगली तारीख तय करते हुए स्पष्ट किया कि यह अंतिम अवसर होगा और अगली सुनवाई पर उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति अपेक्षित है।

    अदालत का कहना था कि मामले की प्रक्रिया काफी समय से चल रही है और अब इसे आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक है कि आरोपी पक्ष स्वयं अदालत में उपस्थित होकर औपचारिक कार्यवाही पूरी करे।

    पिछली सुनवाइयों का सिलसिला

    इस मामले में अदालत की कार्यवाही वर्ष 2018 से जारी है। बीच के वर्षों में कई बार सुनवाई टली, कभी प्रक्रियागत कारणों से तो कभी दोनों पक्षों की दलीलों के चलते। एक समय पर राहुल गांधी की गैर-हाजिरी के कारण अदालत ने वारंट भी जारी किया था, जिसके बाद वे अदालत में उपस्थित हुए और उन्हें जमानत प्रदान की गई।

    इसके बाद उन्होंने अदालत के समक्ष अपना बयान दर्ज कराते हुए कहा था कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं और यह मामला राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते आगे बढ़ाया जा रहा है। अदालत ने उनके बयान के बाद शिकायतकर्ता पक्ष को साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, जिसके तहत गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

    गवाहों की गवाही और मौजूदा स्थिति

    शिकायतकर्ता की ओर से गवाहों को अदालत में पेश किया गया, जिनसे बचाव पक्ष द्वारा जिरह भी की गई। कानूनी जानकारों के अनुसार, मामला अब उस चरण में है जहां आरोपी का बयान दर्ज किया जाना आवश्यक है, ताकि आगे की कार्यवाही तय की जा सके।

    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई पर राहुल गांधी को दंड प्रक्रिया संहिता की संबंधित धाराओं के तहत अपना बयान दर्ज कराना होगा। इसके बाद ही यह तय होगा कि मामले में आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

    राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और माहौल

    राहुल गांधी की पेशी को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज रही। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी कानून का सम्मान करते हैं और उचित समय पर अदालत में उपस्थित होंगे। पार्टी का यह भी कहना है कि विपक्ष के नेताओं के खिलाफ इस तरह के मामले अक्सर राजनीतिक दबाव के तहत आगे बढ़ाए जाते हैं।

    वहीं, दूसरी ओर, विपक्षी दलों का कहना है कि कानून सभी के लिए समान है और किसी भी व्यक्ति को न्यायिक प्रक्रिया से छूट नहीं मिलनी चाहिए। इस बयानबाजी के बीच अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट संदेश दिया है कि अगली तारीख पर व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य होगी।

    कानूनी विशेषज्ञों की राय

    कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अदालत द्वारा “अंतिम अवसर” दिया जाना यह संकेत देता है कि अब मामले में देरी को स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि अगली सुनवाई पर भी आरोपी की अनुपस्थिति रहती है, तो अदालत के पास कानून के तहत अन्य विकल्प खुले रहते हैं।

    विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि लंबे समय से चल रहे मामलों में अदालतें आमतौर पर प्रक्रिया को तेज करने के लिए सख्त रुख अपनाती हैं, ताकि न्यायिक प्रणाली पर बोझ कम हो और मामलों का समय पर निपटारा हो सके।

    आगे की राह

    अब सभी की निगाहें 20 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। इस तारीख को राहुल गांधी की व्यक्तिगत उपस्थिति और उनके बयान के बाद यह स्पष्ट होगा कि मामला किस दिशा में आगे बढ़ेगा। यदि प्रक्रिया सुचारु रूप से आगे बढ़ती है, तो आने वाले महीनों में इस मामले पर कोई निर्णायक स्थिति बन सकती है।

    राजनीतिक दृष्टि से भी यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि राहुल गांधी वर्तमान में लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं और राष्ट्रीय राजनीति में उनकी भूमिका अहम है। ऐसे में उनके खिलाफ चल रहे कानूनी मामलों पर न केवल न्यायपालिका बल्कि जनता और राजनीतिक दलों की भी कड़ी नजर रहती है।

    निष्कर्ष

     

    सुल्तानपुर मानहानि मामले में सोमवार की सुनवाई एक बार फिर टल गई, लेकिन अदालत का रुख इस बार पहले से अधिक स्पष्ट और सख्त नजर आया। 20 फरवरी को तय अगली तारीख इस लंबे चले आ रहे मामले में एक अहम मोड़ साबित हो सकती है। अब देखना होगा कि उस दिन की सुनवाई के बाद यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है और न्यायिक प्रक्रिया किस निष्कर्ष तक पहुंचती है।

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