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    भारत और यूएई ने 3 अरब डॉलर का एलएनजी समझौता किया, व्यापार और रक्षा सहयोग को नई गति

    1 hour ago

    भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करते हुए लगभग 3 अरब डॉलर के दीर्घकालिक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आपूर्ति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक के दौरान हुआ। राष्ट्रपति अल नाहयान भारत की एक संक्षिप्त लेकिन अहम यात्रा पर थे, जिसमें ऊर्जा, व्यापार और रक्षा सहयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

    यह एलएनजी समझौता ऐसे समय पर हुआ है जब वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है और भारत दीर्घकालिक व स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है।

    10 वर्षों के लिए एलएनजी आपूर्ति समझौता

    समझौते के तहत अबू धाबी की सरकारी ऊर्जा कंपनी ADNOC गैस, भारत की हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) को अगले 10 वर्षों तक हर साल करीब 5 लाख मीट्रिक टन एलएनजी की आपूर्ति करेगी। अधिकारियों के अनुसार, यह समझौता भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा और प्राकृतिक गैस की बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करने में मदद करेगा।

    इस करार के बाद भारत यूएई का सबसे बड़ा एलएनजी ग्राहक बन गया है। यूएई की ओर से कहा गया है कि इस नए समझौते के साथ भारत के साथ उसके कुल एलएनजी और ऊर्जा अनुबंधों का मूल्य 20 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। यह आंकड़ा दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में गहराते भरोसे और दीर्घकालिक साझेदारी को दर्शाता है।

    द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य

    ऊर्जा के अलावा, दोनों देशों के नेताओं ने व्यापारिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने पर भी सहमति जताई। भारत और यूएई ने अगले छह वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। वर्तमान में यूएई, भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।

    अधिकारियों के मुताबिक, दोनों देश डिजिटल व्यापार, नवीकरणीय ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, बुनियादी ढांचा, लॉजिस्टिक्स और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाएं देखते हैं। नेतृत्व स्तर पर मिली यह सहमति निजी निवेश को बढ़ावा देने और पहले से मौजूद व्यापार समझौतों को तेजी से लागू करने में मदद करेगी।

    रक्षा सहयोग की दिशा में अहम कदम

    बैठक का एक और महत्वपूर्ण परिणाम भारत और यूएई के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी को लेकर हस्ताक्षरित आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) रहा। इस दस्तावेज़ के जरिए दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में सहयोग को संस्थागत रूप देने की मंशा जताई है। संभावित सहयोग में रक्षा उत्पादन, प्रशिक्षण, तकनीकी साझेदारी और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्र शामिल हो सकते हैं।

    भारत के विदेश सचिव ने स्पष्ट किया कि यूएई के साथ रक्षा सहयोग का अर्थ किसी क्षेत्रीय संघर्ष में भारत की भागीदारी नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत का दृष्टिकोण पारस्परिक हितों, स्थिरता और संप्रभुता के सम्मान पर आधारित है।

    यूएई के राष्ट्रपति के साथ आई प्रतिनिधिमंडल में रक्षा और विदेश मामलों से जुड़े वरिष्ठ मंत्री भी शामिल थे, जो इस साझेदारी के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करता है।

    क्षेत्रीय परिप्रेक्ष्य में भारत-यूएई संबंध

    यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत खाड़ी देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलित और व्यावहारिक तरीके से आगे बढ़ा रहा है, ताकि ऊर्जा जरूरतों के साथ-साथ दीर्घकालिक रणनीतिक हित भी सुरक्षित रह सकें।

    भारतीय अधिकारियों ने दोहराया कि यूएई के साथ बढ़ता सहयोग किसी अन्य देश के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह साझा विकास और क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक कदम है।

    कम समय की यात्रा, दूरगामी असर

    हालांकि यूएई राष्ट्रपति की भारत यात्रा कुछ ही घंटों की रही, लेकिन इसके नतीजों को दोनों पक्षों ने बेहद अहम बताया है। नेताओं ने विभिन्न क्षेत्रों में चल रही परियोजनाओं की समीक्षा की और सहमत हुए कि नियमित उच्चस्तरीय संवाद के जरिए सभी समझौतों को समय पर लागू किया जाएगा।

     

    विशेषज्ञों के अनुसार, एक बड़े ऊर्जा समझौते, व्यापार विस्तार के स्पष्ट लक्ष्य और रक्षा सहयोग की दिशा में बढ़ते कदम यह संकेत देते हैं कि भारत-यूएई संबंध अब एक नए और अधिक व्यापक चरण में प्रवेश कर चुके हैं। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच यह साझेदारी दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक रूप से लाभकारी साबित हो सकती है।

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