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    रिलायंस और आईसीआईसीआई बैंक में बिकवाली से सेंसेक्स-निफ्टी दबाव में, बाजार लाल निशान पर बंद

    2 hours ago

    घरेलू शेयर बाजार सोमवार को उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बाद गिरावट के साथ बंद हुआ। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव देखने को मिला, जिसका मुख्य कारण दिग्गज कंपनियों के शेयरों में बिकवाली, वैश्विक स्तर पर व्यापार से जुड़ी अनिश्चितता, कमजोर रुपये और विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी रहा। खासतौर पर रिलायंस इंडस्ट्रीज और आईसीआईसीआई बैंक जैसे बड़े शेयरों में आई गिरावट ने बाजार की धारणा को कमजोर किया।

    दिनभर उतार-चढ़ाव भरा रहा कारोबार

    सोमवार को कारोबार की शुरुआत सतर्क रुख के साथ हुई। शुरुआती सत्र में बाजार ने सीमित दायरे में कारोबार किया, लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, चुनिंदा ब्लू-चिप शेयरों में बिकवाली तेज होती गई। इसके चलते बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 324.17 अंकों की गिरावट के साथ 83,246.18 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स एक समय 672 अंकों तक टूटकर 82,898.31 के निचले स्तर तक पहुंच गया था।

    वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 108.85 अंकों की गिरावट के साथ 25,585.50 पर बंद हुआ। बाजार सहभागियों के अनुसार, निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बचते नजर आए और सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते दिखे।

    रिलायंस इंडस्ट्रीज में तेज गिरावट

    दिन की सबसे बड़ी गिरावट रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में देखने को मिली। कंपनी के तीसरी तिमाही के नतीजे अपेक्षाओं के अनुरूप न रहने के कारण शेयर में लगभग 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, गैस उत्पादन में कमी और रिटेल कारोबार में सुस्ती के चलते कंपनी का शुद्ध लाभ लगभग स्थिर रहा। हालांकि अन्य कारोबार खंडों में कुछ सुधार देखने को मिला, लेकिन वह समग्र प्रदर्शन को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं रहा।

    रिलायंस इंडस्ट्रीज का भारी वजन होने के कारण इसका असर पूरे बाजार पर पड़ा और सूचकांकों पर दबाव बढ़ गया।

    आईसीआईसीआई बैंक सहित कई बड़े शेयर फिसले

    बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के शेयर भी सोमवार को कमजोर रहे। आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में करीब 2.26 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बैंक के तिमाही नतीजों में मुनाफे में गिरावट और कुछ अतिरिक्त प्रावधानों की खबर से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई।

    आईसीआईसीआई बैंक के अलावा टाइटन, अडानी पोर्ट्स, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और अल्ट्राटेक सीमेंट जैसे प्रमुख शेयर भी गिरावट के साथ बंद हुए। इन सभी शेयरों में बिकवाली ने बाजार की समग्र दिशा को नकारात्मक बनाए रखा।

    कुछ शेयरों ने दिया सहारा

    हालांकि बाजार में गिरावट का माहौल रहा, फिर भी कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। इंटरग्लोब एविएशन, टेक महिंद्रा, हिंदुस्तान यूनिलीवर और बजाज फाइनेंस जैसे शेयरों ने मजबूती दिखाई और गिरावट को कुछ हद तक सीमित करने में मदद की।

    विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक फिलहाल उन कंपनियों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिनकी वित्तीय स्थिति मजबूत है और जिनका प्रदर्शन अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है।

    वैश्विक संकेतों का असर

    वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेतों का असर भी घरेलू बाजार पर पड़ा। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया और शंघाई के सूचकांक मजबूती के साथ बंद हुए, जबकि जापान और हांगकांग के बाजारों में कमजोरी रही। यूरोपीय बाजारों में भी कारोबार के दौरान दबाव देखा गया।

    अमेरिकी बाजार पिछले कारोबारी सत्र में मामूली गिरावट के साथ बंद हुए थे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार नीतियों को लेकर अनिश्चितता और संभावित शुल्क विवाद की चर्चाओं ने निवेशकों को सतर्क बना रखा है।

    रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की निकासी

    सोमवार को भारतीय रुपया भी दबाव में रहा। डॉलर के मुकाबले रुपया 14 पैसे कमजोर होकर 90.92 के स्तर पर बंद हुआ। दिन के दौरान रुपया एक बार फिर 91 के स्तर के करीब पहुंच गया था। रुपये में कमजोरी से आयात लागत बढ़ने की आशंका रहती है, जिसका असर बाजार की धारणा पर पड़ता है।

    इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली भी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने हाल के सत्रों में हजारों करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने कुछ हद तक खरीदारी कर संतुलन बनाने की कोशिश की।

    कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड लगभग 1 प्रतिशत से अधिक की कमजोरी के साथ 63 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भी भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर पड़ता है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर काफी हद तक निर्भर है।

    विशेषज्ञों की राय

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता और घरेलू कारकों के कारण निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं। एक बाजार विश्लेषक के अनुसार, “वैश्विक जोखिम भावना कमजोर हुई है और इसका असर उभरते बाजारों पर भी दिख रहा है। इसके अलावा तिमाही नतीजों का दौर चल रहा है, जिससे स्टॉक-विशिष्ट उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।”

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक संकेतों, रुपये की चाल और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर निर्भर करेगी।

    आगे की राह

    निवेशकों के लिए मौजूदा समय में सावधानी बरतना जरूरी माना जा रहा है। बाजार सहभागियों का मानना है कि अल्पकाल में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, लेकिन मजबूत बुनियादी कारकों वाली कंपनियों में लंबी अवधि के लिए अवसर बने रहेंगे।

    आने वाले सत्रों में निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, घरेलू नीतिगत संकेतों और कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन पर बनी रहेगी। यदि अनिश्चितता कम होती है और सकारात्मक संकेत मिलते हैं, तो बाजार में फिर से स्थिरता देखने को मिल सकती है।

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