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    चीन में बिजली खपत ने 2025 में बनाया नया रिकॉर्ड, पहली बार 10 ट्रिलियन किलोवाट-घंटे के पार; हाई-टेक उद्योग बने सबसे बड़े कारण

    2 hours ago

    चीन में बिजली की खपत ने वर्ष 2025 में नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड कायम कर दिया है। देश की कुल बिजली खपत पहली बार 10 ट्रिलियन किलोवाट-घंटे (kWh) के आंकड़े को पार करते हुए 10.37 ट्रिलियन किलोवाट-घंटे तक पहुंच गई। यह जानकारी चीन की राष्ट्रीय ऊर्जा प्रशासन (National Energy Administration – NEA) ने शनिवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में दी।

    ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, यह वृद्धि चीन की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, औद्योगिक गतिविधियों में विस्तार और खासतौर पर हाई-टेक तथा नई ऊर्जा से जुड़े उद्योगों की मजबूत मांग का परिणाम है। चीन की यह बिजली खपत अब यूरोपीय संघ, रूस, भारत और जापान की संयुक्त बिजली खपत से भी अधिक हो चुकी है, जो वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में चीन की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।

    5 प्रतिशत की सालाना वृद्धि, ऐतिहासिक उपलब्धि

    राष्ट्रीय ऊर्जा प्रशासन के मुताबिक, वर्ष 2025 में चीन की बिजली खपत में साल-दर-साल आधार पर लगभग 5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि न केवल मात्रा के लिहाज से अहम है, बल्कि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसने पहली बार 10 ट्रिलियन किलोवाट-घंटे की मनोवैज्ञानिक सीमा को पार किया है।

    राज्य मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 10.37 ट्रिलियन किलोवाट-घंटे की यह खपत वर्ष 2024 में यूरोपीय संघ, रूस, भारत और जापान की कुल संयुक्त बिजली खपत से अधिक है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि चीन दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता बन चुका है और उसकी ऊर्जा जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं।

    हाई-टेक उद्योग बने प्रमुख चालक

    विशेषज्ञों का कहना है कि चीन में बिजली की बढ़ती खपत का सबसे बड़ा कारण हाई-टेक उद्योगों का तेज़ विस्तार है। खासकर इंटरनेट सेवाओं, डेटा सेंटर्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल इकोनॉमी से जुड़े क्षेत्रों में बिजली की मांग में जबरदस्त उछाल देखा गया है।

    आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2025 के पहले 11 महीनों में इंटरनेट और उससे संबंधित सेवाओं के क्षेत्र में बिजली की खपत में 30 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि चीन में डिजिटल सेवाओं का दायरा तेजी से बढ़ रहा है और इसके साथ ही ऊर्जा की मांग भी बढ़ रही है।

    नई ऊर्जा वाहनों से बढ़ी मांग

    बिजली की खपत बढ़ाने में नई ऊर्जा वाहनों (New Energy Vehicles – NEVs) की भूमिका भी अहम रही है। इसमें इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और हाइब्रिड कारें शामिल हैं।

    निर्माण क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, नई ऊर्जा वाहनों के निर्माताओं की बिजली मांग में 2025 के दौरान 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। चीन पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक वाहन बाजार है और सरकार की नीतियों के चलते इस क्षेत्र में निवेश और उत्पादन लगातार बढ़ रहा है।

    ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार, बैटरी निर्माण और उससे जुड़े उद्योगों ने भी बिजली की मांग को तेज़ी से बढ़ाया है।

    औद्योगिक और शहरीकरण का असर

    चीन की बिजली खपत में वृद्धि के पीछे औद्योगिक उत्पादन और शहरीकरण भी बड़े कारण हैं। भारी उद्योगों, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और निर्यात आधारित इकाइयों में उत्पादन बढ़ने से ऊर्जा की जरूरत भी बढ़ी है।

    इसके अलावा, शहरी आबादी में वृद्धि, स्मार्ट सिटी परियोजनाएं, मेट्रो रेल नेटवर्क, हाई-स्पीड रेलवे और बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं ने भी बिजली की मांग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

    वैश्विक तुलना में चीन की स्थिति

    ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की बिजली खपत का यह स्तर उसे वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक अलग स्थान पर ले जाता है। जहां कई विकसित देश ऊर्जा दक्षता और खपत में स्थिरता की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं चीन की खपत लगातार बढ़ रही है।

    हालांकि, विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि चीन की आबादी, औद्योगिक पैमाना और आर्थिक संरचना अन्य देशों से काफी अलग है, इसलिए सीधी तुलना हमेशा पूरी तस्वीर नहीं दिखाती। फिर भी, 10 ट्रिलियन किलोवाट-घंटे से अधिक की खपत अपने आप में एक बड़ा संकेत है।

    ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण की चुनौती

    बिजली की बढ़ती खपत के साथ चीन के सामने ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। देश अभी भी कोयले पर काफी हद तक निर्भर है, हालांकि नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी उसने बड़ा निवेश किया है।

    चीन सरकार सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और जलविद्युत के क्षेत्र में लगातार क्षमता बढ़ा रही है ताकि बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके और कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित किया जा सके।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बिजली की मांग इसी गति से बढ़ती रही, तो चीन को ऊर्जा उत्पादन के स्रोतों में संतुलन बनाना होगा, ताकि पर्यावरणीय लक्ष्यों और आर्थिक विकास के बीच सामंजस्य कायम रखा जा सके।

    वैश्विक नीति और व्यापार पर असर

    चीन की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों का असर वैश्विक नीति और व्यापार पर भी पड़ सकता है। ऊर्जा संसाधनों की मांग बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमतों पर दबाव आ सकता है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी निर्माण जैसे क्षेत्रों में चीन की बढ़ती क्षमता वैश्विक प्रतिस्पर्धा को भी प्रभावित कर रही है।

    हाल के महीनों में चीन, अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापार और शुल्क से जुड़े मुद्दों पर तनाव देखने को मिला है। ऐसे में ऊर्जा और हाई-टेक उद्योगों में चीन की बढ़ती भूमिका वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में भी अहम साबित हो सकती है।

    भविष्य की राह

    ऊर्जा विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले वर्षों में भी चीन की बिजली खपत बढ़ती रहने की संभावना है, हालांकि इसकी गति नीतिगत फैसलों और वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

    सरकार की ओर से ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, स्मार्ट ग्रिड विकसित करने और नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है। यदि ये योजनाएं सफल रहती हैं, तो चीन अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को अधिक टिकाऊ तरीके से पूरा कर सकता है।

    निष्कर्ष

    कुल मिलाकर, वर्ष 2025 में चीन की बिजली खपत का 10 ट्रिलियन किलोवाट-घंटे के पार जाना न केवल एक आंकड़ा है, बल्कि यह देश की आर्थिक संरचना, औद्योगिक ताकत और तकनीकी विस्तार का प्रतीक भी है। हाई-टेक उद्योगों, नई ऊर्जा वाहनों और डिजिटल सेवाओं ने इस वृद्धि में निर्णायक भूमिका निभाई है।

     

    हालांकि, इसके साथ ही ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक संतुलन जैसी चुनौतियां भी चीन के सामने खड़ी हैं। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि चीन अपनी बढ़ती ऊर्जा मांग को किस तरह संतुलित और टिकाऊ तरीके से पूरा करता है।

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