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    टाटा स्टील मास्टर्स शतरंज: लगातार दूसरी हार से जूझे प्रज्ञानानंदा, गुकेश को वैन फॉरेस्ट ने ड्रॉ पर रोका

    2 hours ago

    दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित शतरंज टूर्नामेंटों में शामिल टाटा स्टील मास्टर्स शतरंज टूर्नामेंट में भारतीय खिलाड़ियों के लिए दूसरा राउंड मिश्रित परिणाम लेकर आया। मौजूदा चैंपियन आर. प्रज्ञानानंदा को लगातार दूसरी हार का सामना करना पड़ा, जबकि विश्व चैंपियन डी. गुकेश एक बेहद जटिल मुकाबले में नीदरलैंड के जॉर्डन वैन फॉरेस्ट के खिलाफ ड्रॉ खेलने पर मजबूर हुए।

    इस टूर्नामेंट को शतरंज की दुनिया का “विंबलडन” कहा जाता है, जहाँ हर मुकाबला बेहद उच्च स्तर का होता है। शुरुआती दो राउंड के बाद ही टूर्नामेंट में रोमांच अपने चरम पर पहुँच गया है।


    प्रज्ञानानंदा की मुश्किल शुरुआत, दूसरी हार ने बढ़ाई चिंता

    भारतीय शतरंज के युवा सितारे और डिफेंडिंग चैंपियन आर. प्रज्ञानानंदा का यह टूर्नामेंट उम्मीदों के अनुरूप शुरू नहीं हो सका है। उज्बेकिस्तान के ग्रैंडमास्टर नोदिरबेक अब्दुसत्तोरोव के खिलाफ खेले गए मुकाबले में प्रज्ञानानंदा को कड़ी टक्कर देने के बावजूद हार झेलनी पड़ी।

    यह मुकाबला क्वीन्स गैम्बिट डिक्लाइंड ओपनिंग से शुरू हुआ, जिसमें काले मोहरों से खेलते हुए प्रज्ञानानंदा ने शुरुआती चरण में संतुलन बनाए रखा। लंबे समय तक खेल बराबरी का रहा और ऐसा लग रहा था कि यह मुकाबला ड्रॉ की ओर बढ़ रहा है।

    हालांकि, खेल का निर्णायक मोड़ 31वीं चाल पर आया, जब एक छोटी-सी चूक के कारण प्रज्ञानानंदा एंडगेम में एक प्यादा पीछे हो गए। यह स्थिति तकनीकी रूप से अब भी ड्रॉ मानी जा रही थी, लेकिन एंडगेम की जटिलताओं में अब्दुसत्तोरोव ने बेहतरीन धैर्य और सटीकता दिखाई।

    लगभग 60 चालों तक चले इस मुकाबले में प्रज्ञानानंदा बराबरी की सही राह नहीं खोज पाए और अंततः उन्हें हार स्वीकार करनी पड़ी। शुरुआती दो राउंड के बाद बिना अंक के प्रज्ञानानंदा अंकतालिका में सबसे नीचे हैं।


    आगे की राह आसान नहीं, लेकिन उम्मीद बाकी

    टूर्नामेंट में अभी 11 राउंड शेष हैं और प्रज्ञानानंदा के पास वापसी का पूरा मौका है। हालांकि, टाटा स्टील मास्टर्स जैसे उच्च स्तरीय टूर्नामेंट में हर हार आत्मविश्वास पर असर डालती है।

    2025 में शानदार प्रदर्शन करने वाले प्रज्ञानानंदा से शतरंज विशेषज्ञों और प्रशंसकों को अब मजबूत वापसी की उम्मीद होगी। आने वाले राउंड्स में उनके लिए हर मुकाबला “करो या मरो” जैसा होगा।


    गुकेश बनाम वैन फॉरेस्ट: संघर्षपूर्ण ड्रॉ

    दूसरी ओर, विश्व चैंपियन डी. गुकेश ने भी दूसरे राउंड में पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन उन्हें नीदरलैंड के जॉर्डन वैन फॉरेस्ट के खिलाफ ड्रॉ से संतोष करना पड़ा।

    यह मुकाबला एक अनियमित ओपनिंग से शुरू हुआ, जिसने जल्दी ही खेल को जटिल मिडिल गेम में बदल दिया। गुकेश ने सफेद मोहरों से आक्रामक खेल दिखाया और लगातार दबाव बनाए रखा।

    खेल के मध्य चरण में गुकेश ने एक बिशप की कुर्बानी देकर लगातार चेक्स के ज़रिये मुकाबले को ड्रॉ की ओर मोड़ा। वैन फॉरेस्ट ने भी शांत दिमाग से सटीक बचाव किया और अंततः दोनों खिलाड़ियों को आधा-आधा अंक मिला।

    दो राउंड के बाद गुकेश के खाते में एक अंक है, जो उन्हें टूर्नामेंट की दौड़ में बनाए रखता है।


    अर्जुन एरिगैसी संयुक्त बढ़त में कायम

    भारतीय शतरंज के एक और मजबूत दावेदार अर्जुन एरिगैसी ने दूसरे राउंड में चेक गणराज्य के थाई दाई वान गुयेन के खिलाफ ड्रॉ खेला। अर्जुन ने मुकाबले में बढ़त बनाने की कोशिश की, लेकिन गुयेन की मजबूत रक्षा को भेद नहीं सके।

    यह मुकाबला भी अंततः रूक और प्यादों के एंडगेम में बदला और ड्रॉ पर समाप्त हुआ। हालांकि, पहले राउंड की जीत के चलते अर्जुन 1.5 अंकों के साथ संयुक्त रूप से टूर्नामेंट में शीर्ष स्थान पर बने हुए हैं।

    उनके साथ उज्बेकिस्तान के अब्दुसत्तोरोव और अमेरिका के हंस मोके नीमन भी संयुक्त बढ़त में हैं।


    अरविंद चिथंबरम ने बचाया ड्रॉ

    भारतीय दल के चौथे खिलाड़ी अरविंद चिथंबरम ने तुर्की के युवा ग्रैंडमास्टर यागिज़ कान एर्दोगमुस के खिलाफ ड्रॉ खेला। यह मुकाबला सिसिलियन डिफेंस से शुरू हुआ, जिसमें अरविंद को कुछ समय के लिए मुश्किल स्थिति का सामना करना पड़ा।

    हालांकि, अनुभव और धैर्य के दम पर उन्होंने मुकाबले को संभाल लिया और महत्वपूर्ण आधा अंक हासिल किया। दो राउंड के बाद अरविंद के खाते में भी एक अंक है।


    अन्य मुकाबलों के नतीजे

    दूसरे राउंड में कुछ अन्य अहम परिणाम भी देखने को मिले। स्लोवेनिया के व्लादिमीर फेडोसेव ने पहले राउंड की हार के बाद शानदार वापसी करते हुए जर्मनी के विंसेंट कीमर को हराया।

    नीदरलैंड के अनुभवी खिलाड़ी अनिश गिरी को उज्बेकिस्तान के जावोखिर सिंदारोव ने ड्रॉ पर रोक दिया। गिरी फिलहाल अंकतालिका में निचले हिस्से में हैं, लेकिन टूर्नामेंट लंबा होने के कारण उनके लिए भी मौके बाकी हैं।


    अंकतालिका में कड़ा मुकाबला

    दो राउंड के बाद अंकतालिका बेहद कसी हुई है। शीर्ष पर तीन खिलाड़ी हैं, जबकि नौ खिलाड़ी केवल आधा अंक पीछे हैं। इसका मतलब है कि आने वाले हर राउंड में तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।

    टाटा स्टील मास्टर्स की खासियत यही है कि यहाँ हर खिलाड़ी विश्व स्तरीय है और कोई भी किसी को भी मात दे सकता है।


    भारतीय शतरंज के लिए अहम टूर्नामेंट

    भारतीय शतरंज इस समय स्वर्णिम दौर से गुजर रहा है। गुकेश का विश्व चैंपियन बनना, प्रज्ञानानंदा और अर्जुन जैसे युवा खिलाड़ियों का निरंतर शीर्ष स्तर पर खेलना, भारत की गहराई को दर्शाता है।

    हालांकि, इस टूर्नामेंट में शुरुआती झटकों के बावजूद भारतीय खिलाड़ियों से उम्मीदें कायम हैं। गुकेश और अर्जुन जहां खिताब की दौड़ में बने हुए हैं, वहीं प्रज्ञानानंदा की संभावित वापसी टूर्नामेंट में नया रोमांच जोड़ सकती है।


    आगे क्या?

    तीसरा राउंड भारतीय खिलाड़ियों के लिए बेहद अहम होगा। प्रज्ञानानंदा के लिए जीत जरूरी है, जबकि गुकेश और अर्जुन अपनी स्थिति मजबूत करना चाहेंगे।

     

    टाटा स्टील मास्टर्स शतरंज टूर्नामेंट जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा, मुकाबले और भी तीखे होते जाएंगे और शतरंज प्रेमियों को उच्च स्तर का खेल देखने को मिलेगा।

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