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    चांदी ने रचा इतिहास: वायदा कारोबार में पहली बार ₹3 लाख प्रति किलो के पार पहुंची कीमत

    2 hours ago

    घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिल रहे मजबूत संकेतों के बीच सोमवार को चांदी की कीमतों ने नया इतिहास रच दिया। वायदा कारोबार में चांदी पहली बार ₹3 लाख प्रति किलोग्राम के स्तर को पार कर गई। निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी, औद्योगिक मांग में तेजी और अमेरिकी डॉलर की कमजोरी को इस उछाल की प्रमुख वजह माना जा रहा है।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर मार्च डिलीवरी वाली चांदी के वायदा भाव में तेज उछाल दर्ज किया गया। कारोबार के दौरान चांदी की कीमतों में ₹13,500 से अधिक की बढ़त देखने को मिली, जिससे यह ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई। यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है और इससे पहले चांदी ने घरेलू वायदा बाजार में इतना ऊंचा आंकड़ा कभी नहीं छुआ था।


    MCX पर रिकॉर्ड तेजी, निवेशकों में उत्साह

    MCX के आंकड़ों के अनुसार, चांदी के मार्च वायदा अनुबंध में करीब 4.5 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार से ही कीमतों में मजबूती दिखी और दिन चढ़ने के साथ-साथ तेजी और तेज होती चली गई।

    कमोडिटी बाजार के जानकारों का कहना है कि बीते कुछ सत्रों से चांदी लगातार सोने से बेहतर प्रदर्शन कर रही है। जहां सोने की कीमतें सीमित दायरे में कारोबार कर रही हैं, वहीं चांदी ने तेज रफ्तार पकड़ ली है।


    अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिला मजबूत समर्थन

    घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखी गई। वैश्विक बाजारों में मार्च डिलीवरी वाले चांदी के वायदा अनुबंध ने प्रति औंस 94 डॉलर के पार का स्तर छू लिया, जो अब तक का रिकॉर्ड माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह तेजी केवल सट्टा गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे मजबूत बुनियादी कारण मौजूद हैं। खास तौर पर औद्योगिक उपयोग में चांदी की बढ़ती मांग ने कीमतों को नया आधार दिया है।


    औद्योगिक मांग बनी प्रमुख कारण

    चांदी को केवल कीमती धातु या निवेश के विकल्प के रूप में ही नहीं, बल्कि एक अहम औद्योगिक धातु के तौर पर भी देखा जाता है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन, मेडिकल उपकरण और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में चांदी की मांग तेजी से बढ़ रही है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि हरित ऊर्जा परियोजनाओं और इलेक्ट्रिक वाहनों की वैश्विक मांग में हो रही वृद्धि ने चांदी की खपत को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। इसके चलते निवेशकों को भविष्य में भी चांदी की मांग मजबूत रहने की उम्मीद है।


    कमजोर डॉलर से मिली अतिरिक्त मजबूती

    अमेरिकी डॉलर में कमजोरी भी चांदी की कीमतों को सहारा देने वाला एक अहम कारक बनकर उभरी है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो डॉलर में कीमत तय होने वाली धातुएं अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए सस्ती हो जाती हैं, जिससे उनकी मांग बढ़ती है।

    कमोडिटी विश्लेषकों के मुताबिक, हाल के दिनों में डॉलर इंडेक्स में आई नरमी ने न केवल चांदी बल्कि अन्य कीमती धातुओं की कीमतों को भी समर्थन दिया है। हालांकि, चांदी ने इस माहौल में सोने की तुलना में कहीं अधिक तेज प्रतिक्रिया दी है।


    क्या सोने से बेहतर विकल्प बन रही है चांदी?

    हाल के महीनों में सोने और चांदी—दोनों की कीमतें रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंची हैं। लेकिन मौजूदा रुझानों को देखें तो चांदी ने रिटर्न के मामले में सोने को पीछे छोड़ दिया है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जहां सोना पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है, वहीं चांदी में निवेश को अब दोहरा फायदा मिल रहा है—कीमती धातु के रूप में निवेश और औद्योगिक धातु के रूप में बढ़ती मांग।

    हालांकि, विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव सोने की तुलना में अधिक होता है। ऐसे में निवेशकों को सतर्कता के साथ कदम उठाने की सलाह दी जाती है।


    आगे क्या रह सकता है रुझान?

    कमोडिटी बाजार से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां इसी तरह बनी रहीं और औद्योगिक मांग में मजबूती जारी रही, तो चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव के साथ ऊंचे स्तर देखने को मिल सकते हैं।

    हालांकि, किसी भी निवेश से पहले बाजार जोखिमों को समझना जरूरी है। ब्याज दरों में बदलाव, वैश्विक भू-आर्थिक घटनाक्रम और डॉलर की चाल जैसे कारक चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।


    निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

    चांदी के ₹3 लाख प्रति किलो के पार पहुंचने को बाजार में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। यह दर्शाता है कि निवेशक केवल पारंपरिक सुरक्षित विकल्पों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे ऐसे एसेट्स की ओर भी रुख कर रहे हैं जिनमें औद्योगिक ग्रोथ की संभावनाएं जुड़ी हों।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखने के लिए चांदी एक विकल्प हो सकती है, लेकिन इसमें निवेश हमेशा दीर्घकालिक रणनीति और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए।


     

    चांदी की यह ऐतिहासिक तेजी न केवल कमोडिटी बाजार के लिए अहम है, बल्कि यह वैश्विक आर्थिक रुझानों और निवेशकों की बदलती प्राथमिकताओं को भी दर्शाती है। आने वाले दिनों में बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या चांदी इस ऊंचे स्तर पर टिक पाती है या इसमें मुनाफावसूली देखने को मिलती है।

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