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    केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर में ‘शिक्षापत्री’ विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन

    1 hour ago

    जयपुर।

    केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर में सोमवार को एकदिवसीय शैक्षणिक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य विषय ‘‘भगवान श्री स्वामीनारायण विरचित ‘शिक्षापत्री’ – सनातन धर्म का दिव्यग्रन्थ’’ रहा। कार्यशाला के निवेदक प्रो. बलवन्त जानी, मानद-नियामक, श्री स्वामीनारायण अनुसंधान केन्द्र, वडतालधाम (श्री सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय से सम्बद्ध) रहे। कार्यक्रम का संयोजन केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर के निदेशक प्रो. लोकमान्य मिश्र के निर्देशन में सम्पन्न हुआ। कार्यशाला का शुभारम्भ वैदिक मंगलाचरण के साथ हुआ। कार्यशाला के विभिन्न सत्रो में देश के विभिन्न सम्प्रदायों के आचार्यों एवं संस्कृत विद्वानो ने शिक्षापत्री ग्रन्थ के सन्दर्भ, प्रसंग एवं उसकी युगानुरूप प्रासंगिकता पर अपने वैदुष्यपूर्ण विचार प्रस्तुत किए। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलगुरु प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने आभासी माध्यम से शिक्षापत्री ग्रन्थ को छात्रों के संस्कार निर्माण में अत्यन्त उपयोगी बताया। उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकान्त पाण्डेय ने ग्रन्थ में निहित विभिन्न श्लोकों की सूक्ष्म एवं सारगर्भित व्याख्याएँ प्रस्तुत की।जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. मदनमोहन झा ने सनातन धर्म के दिव्यग्रन्थ शिक्षापत्री पर विभिन्न विद्वानों की सम्मतियों को रेखांकित करते हुए अपने विचार प्रस्तुत किए।

    सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलगुरु प्रो. अर्कनाथ चौधरी ने संक्षेप में अपने विचार व्यक्त किए।

    जयपुर परिसर के सह-निदेशक प्रो. बोध कुमार झा (शैक्षणिक) एवं प्रो. शीशराम (प्रशासन) ने भी अपने अमूल्य विचार व्यक्त किए तथा शास्त्रसम्मत जिज्ञासाओं के माध्यम से विमर्श को समृद्ध किया।

    सम्पूर्ति सत्र में अध्यक्षीय उद्बोधन डॉ. सन्तवल्लभदास जी स्वामी द्वारा दिया गया, जिसमें उन्होंने ग्रन्थ के महत्त्व एवं महापुरुषों के चरित्र पर प्रकाश डालते हुए सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। इस एकदिवसीय कार्यशाला के अंतर्गत उपस्थित सभी छात्र-छात्राओं, विद्वानों एवं अतिथियों को ‘शिक्षापत्री’ (भगवान श्री स्वामीनारायण द्वारा विरचित) ग्रन्थ का निःशुल्क वितरण किया गया। कार्यशाला का समापन वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ सम्पन्न हुआ।

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