Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    रानी मुखर्जी: ‘एक अभिनेता के लिए आत्म-संरक्षण बेहद ज़रूरी है’ — ‘मर्दानी 3’, अभिनय की सीमाएं और बदलता सिनेमा

    1 hour ago

    मुंबई की सर्द दोपहर है। जुहू बीच पर हल्की धूप फैली हुई है और समुद्र की नीली लहरें दूर तक फैली नज़र आती हैं। इसी शांत माहौल में रानी मुखर्जी अपने कार्यालय में सहज लेकिन आत्मविश्वास से भरी दिखाई देती हैं। वर्षों से भारतीय सिनेमा का एक मजबूत चेहरा रहीं रानी आज भी अपने काम को लेकर उतनी ही सजग और स्पष्ट हैं, जितनी अपने करियर के शुरुआती दिनों में थीं।

    रानी मुखर्जी इन दिनों अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘मर्दानी 3’ की तैयारी और प्रचार में व्यस्त हैं। इस फिल्म के साथ वह एक बार फिर पुलिस अधिकारी शिवानी शिवाजी रॉय की भूमिका में लौट रही हैं। यह किरदार उनके करियर के सबसे प्रभावशाली और सामाजिक रूप से प्रासंगिक पात्रों में से एक माना जाता है।

    ‘मर्दानी’ फ्रेंचाइज़ी और सामाजिक सरोकार

    ‘मर्दानी’ सीरीज़ शुरू से ही महिलाओं की सुरक्षा और समाज में मौजूद गंभीर अपराधों को केंद्र में रखती आई है। पहले भाग में मानव तस्करी जैसे मुद्दे को सामने लाया गया था, जबकि दूसरे भाग में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की भयावह मानसिकता को दिखाया गया। अब ‘मर्दानी 3’ उसी विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए एक नई कहानी के साथ दर्शकों के सामने आने वाली है।

    रानी बताती हैं कि यह फ्रेंचाइज़ी केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि समाज में मौजूद एक गहरे दर्द और गुस्से की अभिव्यक्ति है। उनके अनुसार, यह फिल्म श्रृंखला उस सामूहिक पीड़ा से जन्मी थी, जो देश ने पिछले दशक में महिलाओं के खिलाफ हुए जघन्य अपराधों के बाद महसूस की।

    चुनौतीपूर्ण दृश्यों और मानसिक सीमाओं पर बात

    ‘मर्दानी 3’ की शूटिंग के दौरान कुछ दृश्य ऐसे थे, जिन्हें निभाना भावनात्मक और मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। इस पर बात करते हुए रानी कहती हैं कि हर अभिनेता के लिए यह समझना जरूरी है कि कहां रुकना है।

    उनके शब्दों में, “एक अभिनेता के तौर पर ईमानदारी से काम करना ज़रूरी है, लेकिन आत्म-संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अगर आप खुद को भावनात्मक रूप से पूरी तरह तोड़ लेंगे, तो आप लंबे समय तक इस पेशे में टिक नहीं पाएंगे।”

    रानी मानती हैं कि संवेदनशील विषयों पर काम करते समय कलाकारों को अपनी मानसिक सेहत का भी ध्यान रखना चाहिए। उनका कहना है कि अभिनय में डूबना ज़रूरी है, लेकिन खुद को खो देना नहीं।

    बदलता सिनेमा और महिलाओं की भूमिकाएं

    रानी मुखर्जी ने अपने करियर में हिंदी सिनेमा के कई दौर देखे हैं। रोमांटिक भूमिकाओं से लेकर सशक्त महिला किरदारों तक, उनका सफर भारतीय सिनेमा में आए बदलावों को भी दर्शाता है।

    वह कहती हैं कि आज के समय में दर्शक कहीं अधिक जागरूक हैं और वे ऐसी कहानियां देखना चाहते हैं जो समाज की वास्तविकता से जुड़ी हों। महिलाओं को अब केवल सहायक भूमिकाओं तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि उन्हें कहानी के केंद्र में रखा जा रहा है।

    ‘मर्दानी’ जैसी फिल्में इस बदलाव का उदाहरण हैं, जहां महिला पात्र सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि निर्णायक और मजबूत भूमिका में दिखाई देती हैं।

    राष्ट्रीय पुरस्कार और मान्यता पर दृष्टिकोण

    राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जैसे सम्मान को लेकर रानी का दृष्टिकोण संतुलित है। वह मानती हैं कि पुरस्कार किसी भी कलाकार के लिए प्रोत्साहन का काम करते हैं, लेकिन वे कभी भी काम करने की एकमात्र वजह नहीं होने चाहिए।

    उनके अनुसार, “सम्मान मिलना अच्छा लगता है, लेकिन असली संतुष्टि तब मिलती है जब आपका काम दर्शकों तक पहुंचता है और उन्हें प्रभावित करता है।”

    बॉक्स ऑफिस और व्यक्तिगत सोच

    बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों को लेकर रानी बेहद व्यावहारिक सोच रखती हैं। वह मानती हैं कि फिल्म का व्यावसायिक प्रदर्शन महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इससे उद्योग चलता है, लेकिन एक अभिनेता के तौर पर उनका ध्यान कहानी और किरदार की सच्चाई पर रहता है।

    उनका कहना है कि हर फिल्म करोड़ों का कारोबार करे, यह जरूरी नहीं, लेकिन हर फिल्म ईमानदारी से बनाई जानी चाहिए। दर्शक अंततः उसी काम को याद रखते हैं जिसमें सच्चाई और संवेदनशीलता हो।

    शिवानी शिवाजी रॉय: एक जिम्मेदारी

    रानी के लिए शिवानी शिवाजी रॉय केवल एक किरदार नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। वह मानती हैं कि इस भूमिका के ज़रिए वह उन महिलाओं की आवाज़ बनती हैं, जो खुद के लिए आवाज़ नहीं उठा पातीं।

    वह कहती हैं कि इस तरह के किरदार निभाते समय उन्हें यह एहसास रहता है कि दर्शक उनसे केवल अभिनय नहीं, बल्कि एक संदेश की उम्मीद भी रखते हैं।

    आगे की राह

    ‘मर्दानी 3’ के ज़रिए रानी मुखर्जी एक बार फिर यह साबित करने जा रही हैं कि उम्र या समय किसी अभिनेता की प्रासंगिकता तय नहीं करता, बल्कि उसका काम और सोच तय करती है। वह ऐसे सिनेमा में विश्वास रखती हैं जो मनोरंजन के साथ-साथ समाज को सोचने पर मजबूर करे।

    उनकी बातचीत से साफ झलकता है कि अनुभव के साथ उनकी दृष्टि और भी गहरी हुई है। आत्म-संरक्षण, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी — यही तीन शब्द उनके मौजूदा अभिनय दर्शन को परिभाषित करते हैं।

    जैसे-जैसे ‘मर्दानी 3’ की रिलीज़ नज़दीक आ रही है, दर्शकों की उम्मीदें भी बढ़ रही हैं। रानी मुखर्जी के लिए यह सिर्फ एक और फिल्म नहीं, बल्कि उस यात्रा का अगला अध्याय है, जिसमें सिनेमा समाज से सीधा संवाद करता है।

     
     
    Click here to Read More
    Previous Article
    IAS Officer Vs Politicians, BSP Exposed? Corruption, India & PM Modi - Anil Swarup
    Next Article
    दीपा सिंह को मिली पीएचडी उपाधि

    Related देश Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment