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    केरल की अर्थव्यवस्था ‘तेज़ और व्यापक विकास’ के चरण में प्रवेश कर चुकी है: राज्यपाल का नीति भाषण

    1 hour ago

    केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने मंगलवार को विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन अपने नीति भाषण में कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था अब “तेज़ और व्यापक विकास” के चरण में प्रवेश कर चुकी है। लगभग दो घंटे तक चले इस संबोधन में उन्होंने केरल के भविष्य को एक ऐसे राज्यव्यापी शहरी क्षेत्र के रूप में प्रस्तुत किया, जो बेहतर संपर्क, समावेशी विकास और सतत योजनाओं पर आधारित होगा।

    राज्यपाल ने अपने भाषण में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार की नीतियों और उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि सामाजिक कल्याण, मानव विकास और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में केरल ने उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का उद्देश्य आर्थिक विकास को समाज के सभी वर्गों तक पहुंचाना है, जिससे असमानता को कम किया जा सके।

    राज्यव्यापी शहरी विकास की परिकल्पना

    नीति भाषण में केरल को भविष्य में “दुनिया का सबसे बड़ा, अच्छी तरह से जुड़ा हुआ राज्यव्यापी शहरी क्षेत्र” बनाने की परिकल्पना रखी गई। राज्यपाल ने कहा कि परिवहन, डिजिटल कनेक्टिविटी, आवास और शहरी सुविधाओं के विस्तार से राज्य के विभिन्न हिस्सों को एकीकृत विकास की दिशा में ले जाया जाएगा। इस मॉडल के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच की खाई को कम करने पर जोर दिया जाएगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि केरल की विकास रणनीति केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास इसके मुख्य आधार हैं। नवीकरणीय ऊर्जा, हरित परिवहन और जलवायु-अनुकूल नीतियों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

    सामाजिक कल्याण पर विशेष जोर

    राज्यपाल के अनुसार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में राज्य सरकार की योजनाओं ने केरल को मानव विकास के कई सूचकांकों पर अग्रणी बनाए रखा है। सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने, सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने और सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के विस्तार का उल्लेख भी भाषण में किया गया।

    उन्होंने कहा कि महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और हाशिए पर मौजूद समुदायों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का उद्देश्य आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। सरकार का प्रयास है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

    वित्तीय चुनौतियों का उल्लेख

    नीति भाषण में राज्य की वित्तीय स्थिति पर भी चर्चा की गई। राज्यपाल ने कहा कि मौजूदा वित्तीय वर्ष के एक महत्वपूर्ण चरण में राज्य के सामने संसाधनों से जुड़ी चुनौतियां रही हैं। उन्होंने संकेत दिया कि केंद्र की कुछ नीतियों के कारण राज्यों के वित्तीय प्रबंधन पर दबाव बढ़ा है, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन में कठिनाइयां आई हैं।

    हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने इन परिस्थितियों में संतुलन बनाए रखते हुए विकास और कल्याण कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। वित्तीय अनुशासन के साथ-साथ सामाजिक खर्च को प्राथमिकता देने की नीति पर जोर दिया गया।

    ‘जोड़-घटाव’ को लेकर उठा विवाद

    राज्यपाल के भाषण से पहले और बाद में विधानसभा में कुछ बिंदुओं को लेकर मतभेद भी सामने आए। कथित रूप से नीति भाषण में कुछ अंशों के शामिल या बाहर किए जाने को लेकर चर्चा हुई। हालांकि, सदन की कार्यवाही निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ी और सरकार ने इसे संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया।

    राज्यपाल ने अपने संबोधन में संविधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक परंपराओं के पालन पर जोर देते हुए कहा कि नीति भाषण सरकार की प्राथमिकताओं और भविष्य की दिशा को प्रस्तुत करने का माध्यम होता है।

    बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय संदर्भ

    भाषण में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और उनके राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों का भी उल्लेख किया गया। राज्यपाल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे बदलावों के बीच केरल को अपनी आर्थिक रणनीतियों को लचीला और अनुकूल बनाना होगा। पर्यटन, प्रवासी आय और सेवा क्षेत्र की भूमिका को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

    उन्होंने कहा कि निवेश के अनुकूल माहौल, कौशल विकास और नवाचार को बढ़ावा देकर केरल नई आर्थिक संभावनाओं का लाभ उठा सकता है।

    आगे की राह

    नीति भाषण के समापन पर राज्यपाल ने कहा कि सरकार का लक्ष्य समावेशी, संतुलित और सतत विकास है। उन्होंने विश्वास जताया कि योजनाबद्ध शहरीकरण, मजबूत सामाजिक ढांचा और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील नीतियों के जरिए केरल आने वाले वर्षों में विकास का एक अलग मॉडल प्रस्तुत कर सकता है।

    कुल मिलाकर, नीति भाषण में केरल की आर्थिक स्थिति, सामाजिक प्राथमिकताओं और भविष्य की विकास रणनीति का व्यापक खाका पेश किया गया। बजट सत्र के दौरान इन नीतियों और योजनाओं पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है, जिससे राज्य की आर्थिक और सामाजिक दिशा तय होगी।

     
     
     
     
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