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    राजस्थान विश्वविद्यालय में "एंडोमेट्रियोसिस : प्रजनन विज्ञान के लिए चुनौती" विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित

    6 months ago

    जर्नल क्लब व प्राणीशास्त्र विभाग की संयुक्त पहल, वैज्ञानिक नवाचार और पर्यावरण संरक्षण का संदेश

    जयपुर।
    राजस्थान विश्वविद्यालय के प्राणीशास्त्र विभाग द्वारा जर्नल क्लब के सहयोग से “एंडोमेट्रियोसिस की व्याख्या: प्रजनन विज्ञान के लिए एक चुनौती” विषय पर एक विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विभागाध्यक्ष प्रो. पी. सी. माली के नेतृत्व में आयोजित हुआ, जिसमें हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय, महेंद्रगढ़ के प्रो. पवन कुमार मौर्य, डीन (जैव रसायन एवं उपापचय विभाग) मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।


    वैज्ञानिक चेतना और स्वास्थ्य संवर्धन पर केंद्रित व्याख्यान

    अपने व्याख्यान में प्रो. मौर्य ने एंडोमेट्रियोसिस जैसी जटिल स्त्री-स्वास्थ्य संबंधी समस्या की वैज्ञानिक पृष्ठभूमि और इसके बढ़ते सामाजिक-चिकित्सकीय प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपनी टीम के नवीन शोध कार्यों का परिचय देते हुए बताया कि बायोमार्कर-आधारित डायग्नोस्टिक चिप के विकास से इस रोग की प्रारंभिक पहचान और उपचार में क्रांतिकारी सुधार संभव है।
    यह शोध न केवल प्रजनन स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह भारत में चिकित्सा अनुसंधान की दिशा को भी सशक्त बनाएगा।


    शिक्षा, अनुसंधान और पर्यावरण—तीनों क्षेत्रों में संतुलित दृष्टिकोण

    कार्यक्रम के अंतर्गत एक वृक्षारोपण अभियान भी आयोजित किया गया, जिससे वैज्ञानिक चेतना के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन और स्थिरता के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता को भी अभिव्यक्ति मिली।
    विभागाध्यक्ष प्रो. पी. सी. माली ने कहा कि “शिक्षा और अनुसंधान तभी सार्थक हैं, जब वे मानव जीवन और पर्यावरण—दोनों के कल्याण में योगदान दें।”


    गणमान्य विद्वानों की उपस्थिति ने बढ़ाई गरिमा

    इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कई प्रतिष्ठित शिक्षाविद उपस्थित रहे जिनमें प्रो. लोहिया, प्रो. अशोक कुमार, प्रो. सीमा श्रीवास्तव, प्रो. रश्मि सिसोदिया, प्रो. ए. एस. अंसारी और डॉ. रेणु बिष्ट सहित अन्य संकाय सदस्य, शोधार्थी एवं विद्यार्थी शामिल थे।
    कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया और विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे वैज्ञानिक अनुसंधान को समाजोपयोगी दृष्टिकोण से जोड़ें


    नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व का संगम

    इस व्याख्यान ने न केवल प्रजनन स्वास्थ्य विज्ञान में नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त किया, बल्कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच और सामाजिक संवेदनशीलता का समन्वय भी स्थापित किया।
    कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने एक स्वर में कहा कि इस प्रकार के आयोजन युवाओं को शोध, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरित करते हैं।

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