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    संविधान दिवस के अवसर पर जवाबदेही यात्राओं का समागम

    1 month ago

    लोकतंत्र में व्यक्ति की गरिमा और अधिकारों की सुरक्षा तभी संभव है जब जवाबदेही हो, जवाबदेही के बिना संविधान का सपना अधूरा है- अरुणा रॉय

     

     राजस्थान में गिग वर्कर्स, न्यूनतम आय गारंटी एवं स्वाथ्य के अधिकार कानून के नियम नहीं बनाना, राजनीतिक जवाबदेही की भयंकर कमी- निखिल डे

     

     हर गाँव में वही दर्द—पानी, पेंशन, स्कूलपढाई, दवाई के लिए भटकते लोग, कर्मचारी, अधिकारी और जनप्रतिनिधि जवाबदेह होंगे तभी जनता को न्याय मिलेगा - शंकर सिंह

     

     SIR की अव्यवस्था से मताधिकार खतरे में- कविता श्रीवास्तव

     

     जवाबदेही आंदोलन अब हर गाँव, हर गली, हर बस्ती तक

    जयपुर

    सूचना एवं रोज़गार अधिकार अभियान राजस्थान की ओर से ब्यावर से जयपुर तक शुरू की गई जवाबदेही पद यात्रा एवं अन्य 4 संभागों से आज यात्रायें जयपुर के शहीद स्मारक पर पहुंची जहाँ पर एक हज़ार से अधिक मजदूर, किसान, विद्यार्थी में एकत्र हुए और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से राज्य में जवाबदेही कानून लाये जाने की पुरजोर तरीके से मांग की. यात्राओं के समापन के अवसर पर मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित एवं प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय ने कहा कि आज संविधान दिवस के अवसर पर हम जयपुर आये हैं, हमारा संविधान लोकतंत्र की बुनियाद है, लोकतंत्र में व्यक्ति की गरिमा और अधिकारों की सुरक्षा तभी संभव है जब जवाबदेही हो, बिना जवाबदेही के लोकतंत्र अधूरा है. उन्होंने कहा कि राज्य में जल्दी से जल्दी जवाबदेही कानून बनाया जाये जिससे सबसे वंचित और पीड़ित अपने अधिकार प्राप्त कर सकें.

     

    पिछले 15 दिनों से जवाबदेही यात्रा में पैदल चल रहे और लोगों की समस्याओं से रूबरू हो रहे शंकर सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि हमने इन पंद्रह दिनों में गाँव-गाँव घूमकर देखा कि लोगों की शिकायतें सुनने वाला कोई नहीं है। पानी से लेकर पेंशन तक और स्कूल से लेकर अस्पताल तक—हर जगह लोग दर-दर भटक रहे हैं। कानून बने हुए हैं, योजनाएँ भी हैं, पर कोई पूछने वाला नहीं। उन्होंने कहा कि मैंने ऐसी स्थितियां भी देखी जिन्हें देखकर मन बहुत व्यथित हुआ और व्यवस्था में बैठे लोगों पर बहुत गुस्सा भी आया, उन्होंने कहा कि मोटी-मोटी तनख्वाहें लेने वाले कर्मचारी और अधिकारी असंवेदनशील हो गए हैं उन्हें जवाबदेह बनाने की जरुरत है. उन्होंने काह कि सरकारी कर्मचारी, अधिकारी और जन प्रतिनिधि जवाबदेह होंगे तभी जनता को न्याय मिलेगा. लम्बे समय से जवाबदेही कानून के लिए संघर्ष कर रहे सामाजिक कार्यकर्त्ता निखिल डे ने कहा कि राजस्थान में गिग वर्कर्स कल्याण एवं पजीकरण, न्यूनतम आया गारंटी, स्वास्थ्य का अधिकार कानून के नियम पिछले 2 वर्ष से भी अधिक समय से नहीं बने हैं जो राजनीतिक जवाबदेही की भयंकर कमी को दर्शाता है, उन्होंने कहा कि हमें हर हाल में राजनीतिक जवाबदेही लेनी होगी. उन्होंने आगे कहा कि हर दफ्तर में एक सीमित संख्या में लोग हैं जो काम करते हैं और बाकी काम करते ही नहीं है और जो काम नहीं करते हैं उनसे काम करवाना अधिकारीयों और जन प्रतिनिधियों के भी बस की बात नहीं रही है इसलिए हर स्तर पर जवाबदेही जरुरी है, इसी से व्यवस्था बदलेगी और लोकतंत्र मजबूत होगा.

     

     शिकायतों का अंबार, लेकिन सुनवाई कहीं नहीं

     

    जवाबदेही पद यात्रा जो ब्यावर से जयपुर तक पैदल आई उसने और उसके साथ अन्य यात्रायें जो विभिन्न संभागों में चल रही यात्राओं ने यह उजागर किया कि राज्य में चल रहे अधिकांश अधिकार-आधारित कानून केवल कागज़ों पर मौजूद हैं और आम, गरीब और वंचितों को उनका लाभ नहीं मिल रहा है. पहली जवाबदेही यात्रा जो 2015-2016 में निकाली गई उसमें भी 10 हजार से अधिक शिकायतें दर्ज की थीं और उनका निस्तारण हामने देखा है उससे हमें पता चला है कि शिकायतें दर्ज होती हैं और निस्तारित हो जाती हैं लेकिन लोगों का समाधान नहीं होता है. इसी प्रकार जो 2021 एवं 22 में जो यात्रायें निकाली गई उनमें भी शिकायतें दर्ज की लेकिन कोई गुणवत्तापूर्ण समाधान नहीं किये गए हैं. यात्रा के दौरान ग्रामीण-शहरी रोजगार, खाद्य सुरक्षा, पेंशन, सिलीकोसिस, पेयजल, किसानों के मुद्दे, स्वास्थ्य सेवाएँ, आंगनवाड़ी, SIR प्रक्रिया की खामियाँ और राजस्थान सम्पर्क पोर्टल की लंबित शिकायतें राज्यभर में एक गहरी और व्यापक जवाबदेही संकट को दर्शाती हैं, गाँवों में मिली पीड़ा ने यह सिद्ध कर दिया है कि बिना जवाबदेही कानून के जनता के अधिकार असुरक्षित हैं।

     

     घुमंतुओं ने अपना दर्द साझा किया

     

    घुमंतुओं अपने दर्द को साझा किया। जयपुर की बस्तियों में रहने वाले लोग, टोंक और कोटा की विभिन्न बस्तियों से आए, साथ ही जयपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में घुमंतू जन आए। उन्होंने छुआछूत से लेकर उनकी आधारभूत सुविधाओं की कमी की समस्याएँ सामने रखीं।

     

     RTI पर वार और वोट की चोट: DPDPA व SIR पर गंभीर सवाल

    अभियान ने DPDPA के माध्यम से RTI को कमजोर करने वाले संशोधनों को तुरंत वापस लेने की माँग उठाई। अभियान ने कहा कि पारदर्शिता और नागरिक निगरानी लोकतंत्र की रीढ़ है, और DPDPA के प्रावधान इन्हीं सिद्धांतों पर प्रहार हैं। साथ ही अभियान ने भारत निर्वाचन आयोग से मांग की कि

     

    मतदाता सूची का सामाजिक लेखा-जोखा,

    गलत नामों की पहचान एवं सुधार,

    नए पात्र मतदाताओं का पंजीकरण,

    नागरिक निगरानी सुनिश्चित की जाये ताकि सार्वभौमिक मताधिकार मजबूत हो.

    आज सभा को संबोधित करते हुए पीयूसीएल की राष्ट्रीय अध्यक्ष कविता श्रीवास्तव ने कहा कि राजस्थान सहित देश के 12 राज्यों में चल रहा SIR यह दिखाता है कि मतदाता सूची कितनी त्रुटिपूर्ण और अपारदर्शी है। लाखों नाम बिना सूचना के काटे जा रहे हैं, नए पंजीकरण लंबित हैं और शिकायतों की सुनवाई लगभग शून्य है। मतदाता सूची गलत हो जाए, तो लोकतंत्र की बुनियाद ही हिल जाती है। SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक भागीदारी आवश्यक है.

     

     हर गाँव, हर गली तक जाएगा जवाबदेही आंदोलन

    आज की सभा में यह स्पष्ट आह्वान किया गया कि जवाबदेही आंदोलन अब हर गाँव, हर गली और हर बस्ती तक जाएगा, जनता की आवाज़ अब रुकेगी नहीं.

     

     विभिन्न अधिकारीयों से धरने के मिले प्रतिनिधिमंडल

     

    धरने से कई प्रतिनिधिमंडल गए जिनमें सबसे पहले श्रम एवं रोज़गार के अतिरिक्त मुख्य सचिव संदीप वर्मा, उसके बाद स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ के साथ महात्मा गांधी नरेगा आयुक्त श्रीमती पुष्पा सत्यानी आदि से प्रतिनिधिमंडल मिले और उनके सामने अपनी मांगें रखी जिन पर उन्होंने तुरंत कार्यवाही करने का आश्वासन दिया है.

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