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    राजस्थान: बजट 2026-27 के लिए बेरोजगारों ने खोला मांगों का पिटारा, इधर राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव पर बढ़ी हलचल

    बेरोजगार यूनियन ने मुख्यमंत्री को भेजा 17 सूत्री मांग पत्र; साक्षात्कार खत्म करने और 1 लाख नई भर्तियों की गूंज जयपुर। राजस्थान के आगामी बजट को लेकर प्रदेश के युवा बेरोजगारों और छात्र राजनीति के गलियारों में सरगर्मी तेज हो गई है। एक ओर जहाँ राजस्थान बेरोजगार यूनियन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर युवाओं के भविष्य के लिए बड़े बदलावों की मांग की है, वहीं दूसरी ओर राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनावों को लेकर न्यायालय के दखल के बाद प्रशासनिक सक्रियता बढ़ गई है। बजट में युवा शक्ति की हुंकार: साक्षात्कार हटाने और नई भर्तियों पर जोर राजस्थान बेरोजगार यूनियन ने बजट 2026-27 के लिए सरकार के समक्ष एक विस्तृत मांग पत्र पेश किया है। यूनियन की प्रमुख मांगों में भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर देना शामिल है। मांग पत्र की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:  * भर्ती सुधार: अन्य राज्यों की तर्ज पर राजस्थान उप निरीक्षक (SI) भर्ती से साक्षात्कार प्रक्रिया को पूर्णतः समाप्त करने की मांग की गई है। इसके अलावा, प्रतियोगिता परीक्षाओं की OMR शीट गुजरात मॉडल के आधार पर ऑनलाइन उपलब्ध कराने का सुझाव दिया गया है।  * पदों की घोषणा: बजट में कम से कम 1 लाख नए पदों पर भर्तियों की घोषणा करने और शिक्षा विभाग में व्याख्याता, वरिष्ठ अध्यापक व अध्यापकों के रिक्त पदों को तत्काल भरने की अपील की गई है।  * वेतन और भत्ता: पशु परिचर और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का पे-लेवल L-3 करने तथा बेरोजगारी भत्ते में बढ़ोतरी करने की मांग उठाई गई है।  * व्यवस्था परिवर्तन: एक वर्ष के भीतर नौकरी छोड़ने वालों के स्थान पर वेटिंग लिस्ट का प्रावधान करने और संविदा कर्मियों को उनके गृह जिले में ही नियुक्ति देने जैसी महत्वपूर्ण माँगें रखी गई हैं।  * जांच की मांग: RSSB की पुरानी भर्तियों में हुए OMR घोटाले की निष्पक्ष जांच और PTI भर्ती 2022 की जांच प्रक्रिया जल्द पूरी करने पर जोर दिया गया है। राजस्थान विश्वविद्यालय: छात्रसंघ चुनावों पर हाईकोर्ट के निर्देश के बाद बड़ी बैठक छात्र राजनीति के केंद्र राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव आयोजन को लेकर चल रहा गतिरोध अब टूटने की कगार पर है। माननीय न्यायालय द्वारा विभिन्न याचिकाओं (Civil Writ Petitions) पर दिए गए निर्देशों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।  * आपात बैठक का आह्वान: अधिष्ठाता छात्र कल्याण (DSW) कार्यालय ने 19 जनवरी 2026 को प्रातः 11:00 बजे वनस्पति शास्त्र विभाग के सेमिनार भवन में एक विशेष बैठक बुलाई है।  * मुख्य एजेंडा: इस बैठक का मुख्य विषय छात्रसंघ चुनावों का न होना और भविष्य में इनके आयोजन की रूपरेखा तय करना है।  * प्रतिनिधियों की उपस्थिति: इस संवाद सत्र में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के छात्र प्रतिनिधियों, अभ्यर्थियों और व्यथित विद्यार्थियों को आमंत्रित किया गया है ताकि चुनावों से जुड़ी शिकायतों का निस्तारण हो सके। युवाओं की उम्मीदों पर टिकी सरकार की नजर राजस्थान की राजनीति में युवाओं और छात्रों का बड़ा दखल रहा है। एक तरफ बेरोजगारों का 17 सूत्री मांग पत्र सरकार की प्रशासनिक कुशलता की परीक्षा लेगा, तो दूसरी तरफ राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने का दबाव प्रशासन पर बना हुआ है। बजट में इन मांगों को कितनी जगह मिलती है और विश्वविद्यालय में चुनाव की तारीखों पर कब सहमति बनती है, इस पर प्रदेशभर के युवाओं की नजरें टिकी हैं।  

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    चीन में बिजली खपत ने 2025 में बनाया नया रिकॉर्ड, पहली बार 10 ट्रिलियन किलोवाट-घंटे के पार; हाई-टेक उद्योग बने सबसे बड़े कारण

    चीन में बिजली की खपत ने वर्ष 2025 में नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड कायम कर दिया है। देश की कुल बिजली खपत पहली बार 10 ट्रिलियन किलोवाट-घंटे (kWh) के आंकड़े को पार करते हुए 10.37 ट्रिलियन किलोवाट-घंटे तक पहुंच गई। यह जानकारी चीन की राष्ट्रीय ऊर्जा प्रशासन (National Energy Administration – NEA) ने शनिवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में दी। ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, यह वृद्धि चीन की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, औद्योगिक गतिविधियों में विस्तार और खासतौर पर हाई-टेक तथा नई ऊर्जा से जुड़े उद्योगों की मजबूत मांग का परिणाम है। चीन की यह बिजली खपत अब यूरोपीय संघ, रूस, भारत और जापान की संयुक्त बिजली खपत से भी अधिक हो चुकी है, जो वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में चीन की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है। 5 प्रतिशत की सालाना वृद्धि, ऐतिहासिक उपलब्धि राष्ट्रीय ऊर्जा प्रशासन के मुताबिक, वर्ष 2025 में चीन की बिजली खपत में साल-दर-साल आधार पर लगभग 5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि न केवल मात्रा के लिहाज से अहम है, बल्कि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसने पहली बार 10 ट्रिलियन किलोवाट-घंटे की मनोवैज्ञानिक सीमा को पार किया है। राज्य मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 10.37 ट्रिलियन किलोवाट-घंटे की यह खपत वर्ष 2024 में यूरोपीय संघ, रूस, भारत और जापान की कुल संयुक्त बिजली खपत से अधिक है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि चीन दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता बन चुका है और उसकी ऊर्जा जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं। हाई-टेक उद्योग बने प्रमुख चालक विशेषज्ञों का कहना है कि चीन में बिजली की बढ़ती खपत का सबसे बड़ा कारण हाई-टेक उद्योगों का तेज़ विस्तार है। खासकर इंटरनेट सेवाओं, डेटा सेंटर्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल इकोनॉमी से जुड़े क्षेत्रों में बिजली की मांग में जबरदस्त उछाल देखा गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2025 के पहले 11 महीनों में इंटरनेट और उससे संबंधित सेवाओं के क्षेत्र में बिजली की खपत में 30 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि चीन में डिजिटल सेवाओं का दायरा तेजी से बढ़ रहा है और इसके साथ ही ऊर्जा की मांग भी बढ़ रही है। नई ऊर्जा वाहनों से बढ़ी मांग बिजली की खपत बढ़ाने में नई ऊर्जा वाहनों (New Energy Vehicles – NEVs) की भूमिका भी अहम रही है। इसमें इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और हाइब्रिड कारें शामिल हैं। निर्माण क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, नई ऊर्जा वाहनों के निर्माताओं की बिजली मांग में 2025 के दौरान 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। चीन पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक वाहन बाजार है और सरकार की नीतियों के चलते इस क्षेत्र में निवेश और उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार, बैटरी निर्माण और उससे जुड़े उद्योगों ने भी बिजली की मांग को तेज़ी से बढ़ाया है। औद्योगिक और शहरीकरण का असर चीन की बिजली खपत में वृद्धि के पीछे औद्योगिक उत्पादन और शहरीकरण भी बड़े कारण हैं। भारी उद्योगों, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और निर्यात आधारित इकाइयों में उत्पादन बढ़ने से ऊर्जा की जरूरत भी बढ़ी है। इसके अलावा, शहरी आबादी में वृद्धि, स्मार्ट सिटी परियोजनाएं, मेट्रो रेल नेटवर्क, हाई-स्पीड रेलवे और बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं ने भी बिजली की मांग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। वैश्विक तुलना में चीन की स्थिति ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की बिजली खपत का यह स्तर उसे वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक अलग स्थान पर ले जाता है। जहां कई विकसित देश ऊर्जा दक्षता और खपत में स्थिरता की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं चीन की खपत लगातार बढ़ रही है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि चीन की आबादी, औद्योगिक पैमाना और आर्थिक संरचना अन्य देशों से काफी अलग है, इसलिए सीधी तुलना हमेशा पूरी तस्वीर नहीं दिखाती। फिर भी, 10 ट्रिलियन किलोवाट-घंटे से अधिक की खपत अपने आप में एक बड़ा संकेत है। ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण की चुनौती बिजली की बढ़ती खपत के साथ चीन के सामने ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। देश अभी भी कोयले पर काफी हद तक निर्भर है, हालांकि नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी उसने बड़ा निवेश किया है। चीन सरकार सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और जलविद्युत के क्षेत्र में लगातार क्षमता बढ़ा रही है ताकि बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके और कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित किया जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बिजली की मांग इसी गति से बढ़ती रही, तो चीन को ऊर्जा उत्पादन के स्रोतों में संतुलन बनाना होगा, ताकि पर्यावरणीय लक्ष्यों और आर्थिक विकास के बीच सामंजस्य कायम रखा जा सके। वैश्विक नीति और व्यापार पर असर चीन की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों का असर वैश्विक नीति और व्यापार पर भी पड़ सकता है। ऊर्जा संसाधनों की मांग बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमतों पर दबाव आ सकता है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी निर्माण जैसे क्षेत्रों में चीन की बढ़ती क्षमता वैश्विक प्रतिस्पर्धा को भी प्रभावित कर रही है। हाल के महीनों में चीन, अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापार और शुल्क से जुड़े मुद्दों पर तनाव देखने को मिला है। ऐसे में ऊर्जा और हाई-टेक उद्योगों में चीन की बढ़ती भूमिका वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में भी अहम साबित हो सकती है। भविष्य की राह ऊर्जा विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले वर्षों में भी चीन की बिजली खपत बढ़ती रहने की संभावना है, हालांकि इसकी गति नीतिगत फैसलों और वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। सरकार की ओर से ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, स्मार्ट ग्रिड विकसित करने और नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है। यदि ये योजनाएं सफल रहती हैं, तो चीन अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को अधिक टिकाऊ तरीके से पूरा कर सकता है। निष्कर्ष कुल मिलाकर, वर्ष 2025 में चीन की बिजली खपत का 10 ट्रिलियन किलोवाट-घंटे के पार जाना न केवल एक आंकड़ा है, बल्कि यह देश की आर्थिक संरचना, औद्योगिक ताकत और तकनीकी विस्तार का प्रतीक भी है। हाई-टेक उद्योगों, नई ऊर्जा वाहनों और डिजिटल सेवाओं ने इस वृद्धि में निर्णायक भूमिका निभाई है।   हालांकि, इसके साथ ही ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक संतुलन जैसी चुनौतियां भी चीन के सामने खड़ी हैं। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि चीन अपनी बढ़ती ऊर्जा मांग को किस तरह संतुलित और टिकाऊ तरीके से पूरा करता है।

    डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती, शुरुआती कारोबार में 12 पैसे की बढ़त; वैश्विक संकेतों और घरेलू चुनौतियों के बीच बाजार सतर्क

    भारतीय मुद्रा रुपये ने सोमवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती दर्ज की और 12 पैसे की बढ़त के साथ 90.66 के स्तर पर पहुंच गई। यह सुधार ऐसे समय में देखने को मिला है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में नरमी दिखाई दी और प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक कमजोर हुआ। हालांकि, विदेशी पूंजी की लगातार निकासी, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चित परिस्थितियों के कारण निवेशकों की सतर्कता बनी हुई है। विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों के अनुसार, रुपये में यह मजबूती मुख्य रूप से डॉलर इंडेक्स में आई गिरावट का नतीजा है। डॉलर इंडेक्स, जो अमेरिकी मुद्रा की ताकत को छह प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं के मुकाबले मापता है, सोमवार को गिरकर 98.99 के स्तर पर आ गया। इससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं, विशेष रूप से भारतीय रुपये को कुछ राहत मिली। शुरुआती कारोबार में रुपये की चाल अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में सोमवार सुबह रुपये की शुरुआत 90.68 के स्तर पर हुई। शुरुआती सौदों के दौरान इसमें और सुधार देखने को मिला और यह 90.66 के स्तर पर पहुंच गया। यह पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले 12 पैसे की बढ़त को दर्शाता है। गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार को रुपया भारी दबाव में रहा था और 44 पैसे की गिरावट के साथ लगभग अपने निचले स्तर 90.78 पर बंद हुआ था। इसके पहले के दो कारोबारी सत्रों में भी रुपये में कुल 17 पैसे की कमजोरी दर्ज की गई थी। इस तरह, हालिया मजबूती को बाजार विशेषज्ञ एक अस्थायी राहत के रूप में देख रहे हैं, न कि किसी स्थायी रुझान के रूप में। डॉलर में नरमी से मिला सहारा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी डॉलर में आई बिकवाली ने रुपये को सहारा दिया है। हाल के दिनों में अमेरिका की व्यापार नीति से जुड़े बयानों ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ाई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूरोपीय देशों पर संभावित शुल्क लगाने की घोषणा के बाद डॉलर पर दबाव बढ़ा। इन बयानों से निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना और उन्होंने सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया, जिससे डॉलर की मांग कुछ हद तक घटी। इसका सीधा असर उभरते बाजारों की मुद्राओं पर पड़ा, जिनमें भारतीय रुपया भी शामिल है। डॉलर में आई कमजोरी के चलते रुपये को कुछ राहत मिली और यह शुरुआती कारोबार में मजबूती के साथ कारोबार करता दिखा। कच्चे तेल की कीमतें बनीं चिंता का कारण हालांकि, रुपये की मजबूती पर कच्चे तेल की कीमतों का दबाव बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें सोमवार को वायदा कारोबार में 0.17 प्रतिशत की बढ़त के साथ 64.24 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गईं। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी से देश के चालू खाते पर दबाव बढ़ता है और रुपये पर नकारात्मक असर पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो रुपये की मजबूती को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी घरेलू मुद्रा बाजार पर विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की गतिविधियों का भी गहरा असर पड़ता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार से करीब 4,346 करोड़ रुपये की निकासी की। विदेशी पूंजी के लगातार बाहर जाने से न केवल शेयर बाजार में दबाव बढ़ता है, बल्कि रुपये पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों से धन निकालते हैं, तो उन्हें डॉलर की आवश्यकता होती है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव आता है। शेयर बाजार में गिरावट सोमवार को घरेलू शेयर बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 482.80 अंकों या 0.58 प्रतिशत की गिरावट के साथ 83,087.55 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। वहीं, एनएसई निफ्टी 129.30 अंकों या 0.50 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,565.05 के स्तर पर आ गया। विश्लेषकों के अनुसार, शेयर बाजार में यह गिरावट वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण देखने को मिली। शेयर बाजार में कमजोरी का असर अक्सर मुद्रा बाजार पर भी पड़ता है, क्योंकि निवेशकों का भरोसा कमजोर होने पर वे सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख करते हैं। वैश्विक परिस्थितियों का असर वर्तमान समय में वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक घटनाक्रम का असर सभी प्रमुख मुद्राओं पर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार नीतियों से जुड़ी अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियां मुद्रा बाजार की दिशा तय कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर स्थिरता नहीं आती और विदेशी निवेशकों का भरोसा बहाल नहीं होता, तब तक रुपये में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालांकि, भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद, बड़े विदेशी मुद्रा भंडार और नियंत्रित मुद्रास्फीति रुपये को लंबी अवधि में सहारा दे सकती है। आगे का रुख क्या होगा? मुद्रा बाजार के जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में रुपये की चाल कई कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें डॉलर की वैश्विक स्थिति, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों का रुख और घरेलू आर्थिक आंकड़े प्रमुख होंगे। यदि डॉलर में कमजोरी का रुझान जारी रहता है और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आती है, तो रुपये को और मजबूती मिल सकती है। वहीं, अगर वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ती है या विदेशी पूंजी की निकासी तेज होती है, तो रुपये पर फिर से दबाव बन सकता है। निष्कर्ष   कुल मिलाकर, सोमवार को रुपये में दर्ज की गई 12 पैसे की बढ़त ने बाजार को कुछ राहत जरूर दी है, लेकिन चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं। विदेशी निवेशकों की सतर्कता, ऊंची कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक घटनाक्रम रुपये की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते रहेंगे। निवेशकों और कारोबारियों की नजर आने वाले दिनों में वैश्विक संकेतों और घरेलू आर्थिक घटनाओं पर बनी रहेगी, जो भारतीय मुद्रा के भविष्य के रुख को निर्धारित करेंगी।

    टी20 वर्ल्ड कप 2026 में बांग्लादेश की भागीदारी पर 21 जनवरी को होगा अंतिम फैसला

    आईसीसी पुरुष टी20 वर्ल्ड कप 2026 में बांग्लादेश की भागीदारी को लेकर लंबे समय से चल रही अनिश्चितता अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) द्वारा स्पष्ट कर दिया गया है कि इस अहम मुद्दे पर अंतिम फैसला 21 जनवरी 2026 को लिया जाएगा। यह निर्णय खास तौर पर इस बात को लेकर होगा कि बांग्लादेश की टीम भारत में अपने निर्धारित मुकाबले खेलने के लिए यात्रा करेगी या नहीं। यह टूर्नामेंट भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में आयोजित किया जाना है। बांग्लादेश की टीम को ग्रुप चरण के अपने कई मुकाबले भारत में खेलने हैं, जिनमें कोलकाता और मुंबई प्रमुख वेन्यू हैं। हालांकि, हाल के हफ्तों में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर चिंताओं का हवाला देते हुए अपने मैचों को भारत के बाहर कराने की मांग रखी है। ICC और BCB के बीच लगातार बातचीत मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड और आईसीसी के बीच बीते एक सप्ताह में दो अहम बैठकें हो चुकी हैं। इनमें से एक बैठक ढाका में आयोजित की गई, जहां दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी स्थिति स्पष्ट रूप से रखी। आईसीसी ने बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड को साफ तौर पर यह जानकारी दी कि टूर्नामेंट के तय कार्यक्रम में किसी भी तरह का बदलाव करना आसान नहीं है। वहीं, बांग्लादेश बोर्ड ने भी यह दोहराया कि वह टी20 वर्ल्ड कप में हिस्सा लेना चाहता है, लेकिन भारत में मैच खेलने को लेकर वह अभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। बांग्लादेश की आपत्ति का कारण बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए वह अपने खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना चाहता है। इसी आधार पर BCB ने यह सुझाव दिया था कि बांग्लादेश के मैचों को श्रीलंका में स्थानांतरित किया जाए या फिर ग्रुप में बदलाव कर दिया जाए, जिससे टीम को भारत की यात्रा न करनी पड़े। हालांकि, आईसीसी ने इन प्रस्तावों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। परिषद का मानना है कि पूरे टूर्नामेंट की योजना, सुरक्षा व्यवस्था और लॉजिस्टिक्स पहले से तय हैं और अंतिम समय में बदलाव से आयोजन पर व्यापक असर पड़ सकता है। ICC का रुख: सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त आईसीसी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, टूर्नामेंट से पहले स्वतंत्र सुरक्षा आकलन कराया गया है। यह आकलन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सुरक्षा विशेषज्ञों द्वारा किया गया, जिसमें भारत में होने वाले मैचों को लेकर जोखिम को कम से मध्यम स्तर का बताया गया है। इन रिपोर्ट्स में यह भी स्पष्ट किया गया है कि बांग्लादेश टीम, उसके अधिकारियों या मैच स्थलों को लेकर कोई प्रत्यक्ष या विशिष्ट खतरा सामने नहीं आया है। आईसीसी का कहना है कि भारत जैसे बड़े खेल आयोजनों की मेजबानी करने वाले देश में पहले भी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट सफलतापूर्वक आयोजित होते रहे हैं और सुरक्षा प्रबंधन को लेकर व्यापक अनुभव मौजूद है। तय कार्यक्रम पर अडिग ICC आईसीसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि बांग्लादेश को जिस ग्रुप में रखा गया है, उसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा। बांग्लादेश ग्रुप सी में शामिल है, जहां उसे वेस्टइंडीज, न्यूजीलैंड, इटली और नेपाल के साथ मुकाबले खेलने हैं। टीम का पहला मैच 7 फरवरी 2026 को कोलकाता में वेस्टइंडीज के खिलाफ निर्धारित है। इसके बाद दो और ग्रुप मुकाबले कोलकाता में होंगे, जबकि अंतिम ग्रुप मैच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाना है। ऐसे में टूर्नामेंट की शुरुआत में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। विकल्प के तौर पर स्कॉटलैंड का नाम आईसीसी ने यह भी संकेत दिया है कि यदि बांग्लादेश अंतिम समय पर भारत आने से इनकार करता है, तो टूर्नामेंट के नियमों के अनुसार उसकी जगह किसी अन्य टीम को शामिल किया जा सकता है। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग के आधार पर स्कॉटलैंड को संभावित विकल्प माना जा रहा है। हालांकि, यह कदम केवल अंतिम विकल्प के तौर पर ही उठाया जाएगा। आईसीसी की प्राथमिकता यही है कि सभी क्वालिफाई की गई टीमें टूर्नामेंट में हिस्सा लें और किसी भी तरह का बदलाव न्यूनतम रखा जाए। बांग्लादेश बोर्ड के सामने कठिन फैसला बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के लिए यह फैसला आसान नहीं माना जा रहा है। एक ओर टीम और देश के क्रिकेट प्रशंसक विश्व कप में बांग्लादेश की भागीदारी देखना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर बोर्ड किसी भी तरह का जोखिम उठाने से बचना चाहता है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बांग्लादेश टूर्नामेंट से बाहर होता है, तो इससे न केवल टीम को बल्कि वैश्विक क्रिकेट को भी नुकसान पहुंचेगा। टी20 वर्ल्ड कप जैसे बड़े आयोजन में किसी टीम का अंतिम समय पर हटना हमेशा चर्चा का विषय बनता है। क्रिकेट जगत की नजर 21 जनवरी पर अब पूरे क्रिकेट जगत की नजरें 21 जनवरी पर टिकी हुई हैं। इसी दिन यह तय होगा कि बांग्लादेश भारत में अपने निर्धारित मुकाबले खेलेगा या नहीं। यदि बांग्लादेश सहमति देता है, तो यह मामला यहीं समाप्त हो जाएगा और टीम अपनी तैयारियों पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर सकेगी। वहीं, यदि इनकार किया जाता है, तो आईसीसी को वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी, जिससे टूर्नामेंट की संरचना प्रभावित हो सकती है। टूर्नामेंट की तैयारियों पर असर टी20 वर्ल्ड कप 2026 के आयोजन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। भारत और श्रीलंका में स्टेडियम, सुरक्षा व्यवस्था, प्रसारण और लॉजिस्टिक्स को लेकर बड़े पैमाने पर काम चल रहा है। ऐसे समय में किसी टीम की भागीदारी पर अनिश्चितता आयोजकों के लिए भी चुनौती बन जाती है। आईसीसी अधिकारियों का कहना है कि वे सभी सदस्य बोर्ड्स के साथ समन्वय बनाए हुए हैं और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। निष्कर्ष बांग्लादेश की टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भागीदारी को लेकर चल रहा यह मामला अब निर्णायक चरण में है। 21 जनवरी को लिया जाने वाला फैसला न केवल बांग्लादेश क्रिकेट के भविष्य के लिए अहम होगा, बल्कि पूरे टूर्नामेंट की दिशा भी तय करेगा।   अब देखना होगा कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड आईसीसी के सुरक्षा आश्वासनों पर भरोसा करता है या किसी अन्य विकल्प को चुनता है। फिलहाल, क्रिकेट प्रेमी उम्मीद कर रहे हैं कि सभी टीमें मैदान पर उतरें और विश्व कप का रोमांच अपने पूरे शबाब पर पहुंचे।

    चांदी ने रचा इतिहास: वायदा कारोबार में पहली बार ₹3 लाख प्रति किलो के पार पहुंची कीमत

    घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिल रहे मजबूत संकेतों के बीच सोमवार को चांदी की कीमतों ने नया इतिहास रच दिया। वायदा कारोबार में चांदी पहली बार ₹3 लाख प्रति किलोग्राम के स्तर को पार कर गई। निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी, औद्योगिक मांग में तेजी और अमेरिकी डॉलर की कमजोरी को इस उछाल की प्रमुख वजह माना जा रहा है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर मार्च डिलीवरी वाली चांदी के वायदा भाव में तेज उछाल दर्ज किया गया। कारोबार के दौरान चांदी की कीमतों में ₹13,500 से अधिक की बढ़त देखने को मिली, जिससे यह ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई। यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है और इससे पहले चांदी ने घरेलू वायदा बाजार में इतना ऊंचा आंकड़ा कभी नहीं छुआ था। MCX पर रिकॉर्ड तेजी, निवेशकों में उत्साह MCX के आंकड़ों के अनुसार, चांदी के मार्च वायदा अनुबंध में करीब 4.5 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार से ही कीमतों में मजबूती दिखी और दिन चढ़ने के साथ-साथ तेजी और तेज होती चली गई। कमोडिटी बाजार के जानकारों का कहना है कि बीते कुछ सत्रों से चांदी लगातार सोने से बेहतर प्रदर्शन कर रही है। जहां सोने की कीमतें सीमित दायरे में कारोबार कर रही हैं, वहीं चांदी ने तेज रफ्तार पकड़ ली है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिला मजबूत समर्थन घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखी गई। वैश्विक बाजारों में मार्च डिलीवरी वाले चांदी के वायदा अनुबंध ने प्रति औंस 94 डॉलर के पार का स्तर छू लिया, जो अब तक का रिकॉर्ड माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह तेजी केवल सट्टा गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे मजबूत बुनियादी कारण मौजूद हैं। खास तौर पर औद्योगिक उपयोग में चांदी की बढ़ती मांग ने कीमतों को नया आधार दिया है। औद्योगिक मांग बनी प्रमुख कारण चांदी को केवल कीमती धातु या निवेश के विकल्प के रूप में ही नहीं, बल्कि एक अहम औद्योगिक धातु के तौर पर भी देखा जाता है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन, मेडिकल उपकरण और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में चांदी की मांग तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि हरित ऊर्जा परियोजनाओं और इलेक्ट्रिक वाहनों की वैश्विक मांग में हो रही वृद्धि ने चांदी की खपत को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। इसके चलते निवेशकों को भविष्य में भी चांदी की मांग मजबूत रहने की उम्मीद है। कमजोर डॉलर से मिली अतिरिक्त मजबूती अमेरिकी डॉलर में कमजोरी भी चांदी की कीमतों को सहारा देने वाला एक अहम कारक बनकर उभरी है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो डॉलर में कीमत तय होने वाली धातुएं अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए सस्ती हो जाती हैं, जिससे उनकी मांग बढ़ती है। कमोडिटी विश्लेषकों के मुताबिक, हाल के दिनों में डॉलर इंडेक्स में आई नरमी ने न केवल चांदी बल्कि अन्य कीमती धातुओं की कीमतों को भी समर्थन दिया है। हालांकि, चांदी ने इस माहौल में सोने की तुलना में कहीं अधिक तेज प्रतिक्रिया दी है। क्या सोने से बेहतर विकल्प बन रही है चांदी? हाल के महीनों में सोने और चांदी—दोनों की कीमतें रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंची हैं। लेकिन मौजूदा रुझानों को देखें तो चांदी ने रिटर्न के मामले में सोने को पीछे छोड़ दिया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जहां सोना पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है, वहीं चांदी में निवेश को अब दोहरा फायदा मिल रहा है—कीमती धातु के रूप में निवेश और औद्योगिक धातु के रूप में बढ़ती मांग। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव सोने की तुलना में अधिक होता है। ऐसे में निवेशकों को सतर्कता के साथ कदम उठाने की सलाह दी जाती है। आगे क्या रह सकता है रुझान? कमोडिटी बाजार से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां इसी तरह बनी रहीं और औद्योगिक मांग में मजबूती जारी रही, तो चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव के साथ ऊंचे स्तर देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, किसी भी निवेश से पहले बाजार जोखिमों को समझना जरूरी है। ब्याज दरों में बदलाव, वैश्विक भू-आर्थिक घटनाक्रम और डॉलर की चाल जैसे कारक चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। निवेशकों के लिए क्या है संकेत? चांदी के ₹3 लाख प्रति किलो के पार पहुंचने को बाजार में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। यह दर्शाता है कि निवेशक केवल पारंपरिक सुरक्षित विकल्पों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे ऐसे एसेट्स की ओर भी रुख कर रहे हैं जिनमें औद्योगिक ग्रोथ की संभावनाएं जुड़ी हों। विशेषज्ञों का मानना है कि पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखने के लिए चांदी एक विकल्प हो सकती है, लेकिन इसमें निवेश हमेशा दीर्घकालिक रणनीति और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए।   चांदी की यह ऐतिहासिक तेजी न केवल कमोडिटी बाजार के लिए अहम है, बल्कि यह वैश्विक आर्थिक रुझानों और निवेशकों की बदलती प्राथमिकताओं को भी दर्शाती है। आने वाले दिनों में बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या चांदी इस ऊंचे स्तर पर टिक पाती है या इसमें मुनाफावसूली देखने को मिलती है।

    टाटा स्टील मास्टर्स शतरंज: लगातार दूसरी हार से जूझे प्रज्ञानानंदा, गुकेश को वैन फॉरेस्ट ने ड्रॉ पर रोका

    दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित शतरंज टूर्नामेंटों में शामिल टाटा स्टील मास्टर्स शतरंज टूर्नामेंट में भारतीय खिलाड़ियों के लिए दूसरा राउंड मिश्रित परिणाम लेकर आया। मौजूदा चैंपियन आर. प्रज्ञानानंदा को लगातार दूसरी हार का सामना करना पड़ा, जबकि विश्व चैंपियन डी. गुकेश एक बेहद जटिल मुकाबले में नीदरलैंड के जॉर्डन वैन फॉरेस्ट के खिलाफ ड्रॉ खेलने पर मजबूर हुए। इस टूर्नामेंट को शतरंज की दुनिया का “विंबलडन” कहा जाता है, जहाँ हर मुकाबला बेहद उच्च स्तर का होता है। शुरुआती दो राउंड के बाद ही टूर्नामेंट में रोमांच अपने चरम पर पहुँच गया है। प्रज्ञानानंदा की मुश्किल शुरुआत, दूसरी हार ने बढ़ाई चिंता भारतीय शतरंज के युवा सितारे और डिफेंडिंग चैंपियन आर. प्रज्ञानानंदा का यह टूर्नामेंट उम्मीदों के अनुरूप शुरू नहीं हो सका है। उज्बेकिस्तान के ग्रैंडमास्टर नोदिरबेक अब्दुसत्तोरोव के खिलाफ खेले गए मुकाबले में प्रज्ञानानंदा को कड़ी टक्कर देने के बावजूद हार झेलनी पड़ी। यह मुकाबला क्वीन्स गैम्बिट डिक्लाइंड ओपनिंग से शुरू हुआ, जिसमें काले मोहरों से खेलते हुए प्रज्ञानानंदा ने शुरुआती चरण में संतुलन बनाए रखा। लंबे समय तक खेल बराबरी का रहा और ऐसा लग रहा था कि यह मुकाबला ड्रॉ की ओर बढ़ रहा है। हालांकि, खेल का निर्णायक मोड़ 31वीं चाल पर आया, जब एक छोटी-सी चूक के कारण प्रज्ञानानंदा एंडगेम में एक प्यादा पीछे हो गए। यह स्थिति तकनीकी रूप से अब भी ड्रॉ मानी जा रही थी, लेकिन एंडगेम की जटिलताओं में अब्दुसत्तोरोव ने बेहतरीन धैर्य और सटीकता दिखाई। लगभग 60 चालों तक चले इस मुकाबले में प्रज्ञानानंदा बराबरी की सही राह नहीं खोज पाए और अंततः उन्हें हार स्वीकार करनी पड़ी। शुरुआती दो राउंड के बाद बिना अंक के प्रज्ञानानंदा अंकतालिका में सबसे नीचे हैं। आगे की राह आसान नहीं, लेकिन उम्मीद बाकी टूर्नामेंट में अभी 11 राउंड शेष हैं और प्रज्ञानानंदा के पास वापसी का पूरा मौका है। हालांकि, टाटा स्टील मास्टर्स जैसे उच्च स्तरीय टूर्नामेंट में हर हार आत्मविश्वास पर असर डालती है। 2025 में शानदार प्रदर्शन करने वाले प्रज्ञानानंदा से शतरंज विशेषज्ञों और प्रशंसकों को अब मजबूत वापसी की उम्मीद होगी। आने वाले राउंड्स में उनके लिए हर मुकाबला “करो या मरो” जैसा होगा। गुकेश बनाम वैन फॉरेस्ट: संघर्षपूर्ण ड्रॉ दूसरी ओर, विश्व चैंपियन डी. गुकेश ने भी दूसरे राउंड में पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन उन्हें नीदरलैंड के जॉर्डन वैन फॉरेस्ट के खिलाफ ड्रॉ से संतोष करना पड़ा। यह मुकाबला एक अनियमित ओपनिंग से शुरू हुआ, जिसने जल्दी ही खेल को जटिल मिडिल गेम में बदल दिया। गुकेश ने सफेद मोहरों से आक्रामक खेल दिखाया और लगातार दबाव बनाए रखा। खेल के मध्य चरण में गुकेश ने एक बिशप की कुर्बानी देकर लगातार चेक्स के ज़रिये मुकाबले को ड्रॉ की ओर मोड़ा। वैन फॉरेस्ट ने भी शांत दिमाग से सटीक बचाव किया और अंततः दोनों खिलाड़ियों को आधा-आधा अंक मिला। दो राउंड के बाद गुकेश के खाते में एक अंक है, जो उन्हें टूर्नामेंट की दौड़ में बनाए रखता है। अर्जुन एरिगैसी संयुक्त बढ़त में कायम भारतीय शतरंज के एक और मजबूत दावेदार अर्जुन एरिगैसी ने दूसरे राउंड में चेक गणराज्य के थाई दाई वान गुयेन के खिलाफ ड्रॉ खेला। अर्जुन ने मुकाबले में बढ़त बनाने की कोशिश की, लेकिन गुयेन की मजबूत रक्षा को भेद नहीं सके। यह मुकाबला भी अंततः रूक और प्यादों के एंडगेम में बदला और ड्रॉ पर समाप्त हुआ। हालांकि, पहले राउंड की जीत के चलते अर्जुन 1.5 अंकों के साथ संयुक्त रूप से टूर्नामेंट में शीर्ष स्थान पर बने हुए हैं। उनके साथ उज्बेकिस्तान के अब्दुसत्तोरोव और अमेरिका के हंस मोके नीमन भी संयुक्त बढ़त में हैं। अरविंद चिथंबरम ने बचाया ड्रॉ भारतीय दल के चौथे खिलाड़ी अरविंद चिथंबरम ने तुर्की के युवा ग्रैंडमास्टर यागिज़ कान एर्दोगमुस के खिलाफ ड्रॉ खेला। यह मुकाबला सिसिलियन डिफेंस से शुरू हुआ, जिसमें अरविंद को कुछ समय के लिए मुश्किल स्थिति का सामना करना पड़ा। हालांकि, अनुभव और धैर्य के दम पर उन्होंने मुकाबले को संभाल लिया और महत्वपूर्ण आधा अंक हासिल किया। दो राउंड के बाद अरविंद के खाते में भी एक अंक है। अन्य मुकाबलों के नतीजे दूसरे राउंड में कुछ अन्य अहम परिणाम भी देखने को मिले। स्लोवेनिया के व्लादिमीर फेडोसेव ने पहले राउंड की हार के बाद शानदार वापसी करते हुए जर्मनी के विंसेंट कीमर को हराया। नीदरलैंड के अनुभवी खिलाड़ी अनिश गिरी को उज्बेकिस्तान के जावोखिर सिंदारोव ने ड्रॉ पर रोक दिया। गिरी फिलहाल अंकतालिका में निचले हिस्से में हैं, लेकिन टूर्नामेंट लंबा होने के कारण उनके लिए भी मौके बाकी हैं। अंकतालिका में कड़ा मुकाबला दो राउंड के बाद अंकतालिका बेहद कसी हुई है। शीर्ष पर तीन खिलाड़ी हैं, जबकि नौ खिलाड़ी केवल आधा अंक पीछे हैं। इसका मतलब है कि आने वाले हर राउंड में तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। टाटा स्टील मास्टर्स की खासियत यही है कि यहाँ हर खिलाड़ी विश्व स्तरीय है और कोई भी किसी को भी मात दे सकता है। भारतीय शतरंज के लिए अहम टूर्नामेंट भारतीय शतरंज इस समय स्वर्णिम दौर से गुजर रहा है। गुकेश का विश्व चैंपियन बनना, प्रज्ञानानंदा और अर्जुन जैसे युवा खिलाड़ियों का निरंतर शीर्ष स्तर पर खेलना, भारत की गहराई को दर्शाता है। हालांकि, इस टूर्नामेंट में शुरुआती झटकों के बावजूद भारतीय खिलाड़ियों से उम्मीदें कायम हैं। गुकेश और अर्जुन जहां खिताब की दौड़ में बने हुए हैं, वहीं प्रज्ञानानंदा की संभावित वापसी टूर्नामेंट में नया रोमांच जोड़ सकती है। आगे क्या? तीसरा राउंड भारतीय खिलाड़ियों के लिए बेहद अहम होगा। प्रज्ञानानंदा के लिए जीत जरूरी है, जबकि गुकेश और अर्जुन अपनी स्थिति मजबूत करना चाहेंगे।   टाटा स्टील मास्टर्स शतरंज टूर्नामेंट जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा, मुकाबले और भी तीखे होते जाएंगे और शतरंज प्रेमियों को उच्च स्तर का खेल देखने को मिलेगा।

    पाताल लोक तक गूंजा देवनारायण का पराक्रम: राक्षसों का संहार कर नाग कन्या और दैत्य कन्या से रचाया विवाह

    भोपा की ढाणी बेगस स्थित श्री देवनारायण मंदिर  देवधाम के महा फड़ वाचक  बिरदी चंद कुमावत ने साझा की देव अवतार की अद्भुत गाथा जयपुर/बेगस। लोक देवता देवनारायण के जीवन से जुड़ी अलौकिक घटनाएं आज भी समाज के लिए श्रद्धा और विस्मय का केंद्र हैं। बेगस स्थित भोपा की ढाणी में प्रतिष्ठित देवधाम श्री देवनारायण मंदिर के महा फड़ वाचक भोपा जी बिरदी चंद कुमावत ने देवनारायण के पाताल लोक प्रस्थान और वहां हुए उनके विवाह प्रसंगों पर प्रकाश डाला है। यह गाथा बताती है कि किस तरह नारायण ने राक्षसी शक्तियों का अंत कर धर्म की स्थापना की और भोपा संस्कृति को उसके प्रतीक चिन्ह प्रदान किए। गढ़ गाजणा का युद्ध और 64 जोगणियों का आह्वान  बिरदी चंद कुमावत के अनुसार, देवनारायण का राक्षसों के साथ भीषण युद्ध गढ़ गाजणा के द्वार पर हुआ था। वहां स्थिति ऐसी थी कि एक राक्षस को मारने पर उसके रक्त की बूंदों से कई नए राक्षस जन्म ले रहे थे। इस संकट को भांपते हुए नारायण ने अपने दाहिने पैर से 64 जोगणियों और 52 भैरुओं को प्रकट किया। उन्होंने आदेश दिया कि राक्षसों के रक्त की एक भी बूंद धरती पर नहीं गिरनी चाहिए। जोगणियों ने रक्त का पान किया और नारायण ने राक्षसों का समूल नाश कर दिया। पाताल लोक प्रस्थान और शेषनाग से मिलन युद्ध के अंत में गज दन्त और नीम दन्त नामक दो राक्षस साढ़ू माता की घोड़ी लेकर पाताल लोक की खाई में छिप गए। उनका पीछा करते हुए नारायण भी पाताल लोक जा पहुंचे। वहां पृथ्वी को धारण करने वाले शेषनाग आराम कर रहे थे, जो घोड़े के टापों की आवाज से जागृत हुए। नारायण ने जब राक्षसों के बारे में पूछा, तो शेषनाग ने एक शर्त रखी। उन्होंने अपनी कुंवारी नाग कन्या के विवाह का प्रस्ताव नारायण के सम्मुख रखा। नाग कन्या से विवाह और भोपा समाज को 'सेली' की सौगात लोक मान्यताओं के अनुसार, देवनारायण ने नाग कन्या के साथ विवाह स्वीकार किया। विवाह का पहला फेरा पूरा करने के बाद उन्होंने अपनी चंवरी से उठकर एक फटकार मारी, जिससे 'सेली' (काली डोरी) का निर्माण हुआ। नारायण ने यह सेली जोगी भोपा को प्रदान की। यही कारण है कि आज भी देवनारायण की फड़ बांचने वाले भोपे अपने गले में काली डोरी (सेली) धारण करते हैं, जो उनके आध्यात्मिक पद का प्रतीक है। दैत्य कन्या चीमटी बाई से विवाह और फड़ का लकड़ी प्रतीक शेषनाग से रास्ता जानकर नारायण पुनः गढ़ गाजणा पहुंचे और दैत्यराज पर प्रहार किया। भयभीत होकर गज दन्त और नीम दन्त ने साढ़ू माता की काली घोड़ी वापस कर दी और अपनी राजकुमारी चीमटी बाई (दैत्य कन्या) से विवाह का प्रस्ताव रखा। नारायण ने दूसरा विवाह चीमटी बाई से किया। इस अवसर पर दूसरे फेरे के बाद उन्होंने फटकार मारकर एक लकड़ी तैयार की और भोपा को दी। यह लकड़ी आज भी फड़ बांचते समय दृश्यों को दर्शाने (परिचय देने) के काम आती है। आस्था का केंद्र: देवधाम बेगस  बिरदी चंद कुमावत ने बताया कि देवनारायण के ये प्रसंग केवल कथाएं नहीं हैं, बल्कि उनके द्वारा स्थापित परंपराएं हैं जिन्हें भोपा समाज सदियों से सहेज रहा है। बेगस स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां भक्त नारायण के इन चमत्कारों और उनके द्वारा दी गई सीखों को याद करते हैं। 'जय देव धणी' और 'जय सवाई भोज' के उद्घोष के साथ श्रद्धालु यहां अपनी मन्नतें मांगते हैं।  

    जैन आचार्य लोकेशजी द्वारा आयोजित मोरारीबापू राम कथा में दिल्ली विधानसभा के स्पीकर आए

      जैन आचार्य लोकेशजी द्वारा आयोजित मोरारीबापू राम कथा में दिल्ली विधानसभा के स्पीकर आए   श्री राम धर्म रूप हैं, वो नैतिकता, आदर्श, जीवन और न्याय के प्रतीक है - पूज्य श्री मोरारी बापू   सनातन धर्म किसी एक पंथ का नाम नहीं, बल्कि एक शाश्वत सिद्धांत है – आचार्य लोकेश   भारत से विश्व को शांति सद्भावना का संदेश-विजेंद्र गुप्ता स्पीकर, दिल्ली विधानसभा   नई दिल्ली: भारत मंडपम में मोरारी बापू रामकथा के द्वितीय दिवस पर अहिंसा विश्व भारती एवं विश्व शांति केंद्र के संस्थापक जैन आचार्य लोकेश ने मुख्य अतिथि  विजेंद्र गुप्ता, स्पीकर, दिल्ली विधानसभा ने माल्यार्पण कर स्वागत किया। विश्व शांति मिशन के लिए भारत मंडपम के मल्टीपर्पस हाल में 17-25 जनवरी तक नौ दिवसीय रामकथा में देश विदेश से आए श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आयोजक जैन आचार्य लोकेश ने कहा सनातन धर्म किसी एक पंथ का नाम नहीं, बल्कि एक शाश्वत सिद्धांत है।    मोरारी बापू ने कहा कि ‘राम विग्रहवान धर्मः, राम स्वयं धर्म के साकार स्वरूप हैं, जो नैतिकता, आदर्श, जीवन और न्याय के प्रतीक है। उनका जीवन 'राजधर्म' और 'लोकधर्म' के बीच संतुलन को दर्शाता है। सनातन धर्म सत्य, करुणा, सेवा, अहिंसा जैसे मूल सिद्धांतों पर केंद्रित हैं | धार्मिक मान्यताओं में ठहराव नहीं, बल्कि प्रगतिशील सोच और बहाव होना चाहिए। रामचरितमानस हर जीव के कल्याण के लिए है और इसके माध्यम से जीवन को समझना कि रामकथा का उद्देश्य है। विश्व शांति मिशन के लिए आयोजित इस कथा के मध्याम से जन जन में मानव धर्म का प्रचार हो यही इसकी सफलता है।   मुख्य अतिथि विजेंद्र गुप्ता, स्पीकर, दिल्ली विधानसभा ने कहा कि भारत भूमि केवल एक देश नहीं, बल्कि एक पवित्र आध्यात्मिक केंद्र है जहाँ वेद, उपनिषद, आगमों की रचना हुई, योग, ध्यान, आयुर्वेद जैसी ज्ञानधाराएँ विश्व को मिली। यह भूमि धार्मिक विविधता, शांति और सहिष्णुता का प्रतीक है, जहाँ सनातन धर्म के साथ-साथ कई अन्य धर्मों ने भी जड़ें जमाई हैं। भारत की राजधानी दिल्ली में जैन आचार्य लोकेश द्वारा पूज्य मोरारी बापू कि रामकथा का आयोजन अनेकता में एकता का प्रतीक है। कथा के दूसरे दिन स्वामी शैंलद्र (ओशो के भाई) ने कहा कि राम सभी का मूल है।   विश्व शांतिदूत आचार्य लोकेश ने कहा कि सनातन चेतना को जोड़ने वाली शक्ति हैं, जो सभी धर्मों हिंदू, जैन, सिख, बौद्ध आदि को एक सूत्र में पिरोती है। भगवान महावीर के अहिंसा, शांति और सद्भावना के सिद्धांतों की आज विश्व को आवश्यकता है। युद्ध, हिंसा, असंतुलन से जूझ रहे विश्व की अनेक समस्याओं का समाधान भगवान महावीर दर्शन में मिलता है।   राम कथा में आज रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का परिवार भी शामिल हुआ। उनके बेटे नीरज सिंह और बहु ने कथा सुनी। इसके साथ भी भाजपा के वरिष्ठ नेता श्याम जाजू भी शामिल हुए।   विश्व शांति केंद्र मिशन के लिए भारत मंडपम में आयोजित रामकथा में 3000 से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लेकर कथा का आनंद उठाया।  

    इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेट्रीज के अजमेर चैप्टर के सत्र 2026 के लिए चुनाव हुए

    इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेट्रीज के अजमेर चैप्टर के सत्र 2026 के लिए चुनाव हुए l संसथान की वर्तमान अध्यक्ष सीएस सुरभि माथुर ने बताया की प्रतिवर्ष जनवरी माह आने वाली नई कार्यकारणी का चुनाव किया जाता हैं l जिसमे अध्यक्ष सीएस सुनील कुमार शर्मा , उपाध्यक्ष सीएस मोनिका लालवानी ,सचिव सीएस प्रिंस शर्मा एवम कोषाध्यक्ष सीएस रोनक सोगानी को बनाया गया l निर्वाचन के बाद नवनिर्वाचित कार्यकारणी को वर्तमान अध्यक्ष सीएस सुरभि माथुर ने माल्यार्पण कर सम्मान किया l इस मौके पर अजमेर चैप्टर की अध्यक्ष सीएस सुरभि माथुर , पूर्व अध्यक्ष मुक्ता भंसाली एवं चैप्टर इंचार्ज  आनंद मिश्रा भी मौजूद रहे। नवनिर्वाचित अध्यक्ष ने बताया कि मेंबर्स और स्टूडेंट्स के लिए ज्यादा से ज्यादा प्रोफेशनल डेवलपमेंट प्रोग्राम और सेमिनार आयोजित करेगे।        

    “द फूड विजार्ड शेफ – जेके मसाले प्रेज़ेंट्स द फूड विजार्ड शेफ प्रतियोगिता” का सफल आयोजन

    डंगायच स्कूल ऑफ होटल मैनेजमेंट, जयपुर में भव्य रूप से “द फूड विजार्ड शेफ – जेके मसाले प्रेज़ेंट्स द फूड विजार्ड शेफ प्रतियोगिता” का सफल आयोजन किया गया। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में विभिन्न स्कूलों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने अपने पाक-कौशल, रचनात्मकता एवं नवाचार का शानदार प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता का सम्मान समारोह (Felicitation Ceremony) शहर के प्रतिष्ठित होटल जयपुर मैरियट में गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। इस अवसर पर जयपुर एवं देश के कई नामी फाइव स्टार होटल्स के एग्जीक्यूटिव शेफ, जनरल मैनेजर्स, उद्योग जगत से जुड़े विशेषज्ञों तथा प्रतियोगिता के स्पॉन्सर्स की विशेष उपस्थिति रही, जिन्होंने प्रतिभागी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के दौरान प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा दंगायच ग्रुप से अतुल दंगायच एवम कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ ज्योति अरोड़ा एंड समस्त जूरी मेंबर्स के द्वारा की गई, जिसमें इंडिया इंटरनेशनल स्कूल ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए विजेता ट्रॉफी अपने नाम की। इसके साथ ही फर्स्ट रनर-अप रावत स्कूल विवेक विहार, सेकंड रनर-अप वर्धमान स्कूल रही एवं विभिन्न विशेष कैटेगरी अवॉर्ड्स में भी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को व्यावसायिक पाक कला की ओर प्रेरित करना, उनकी प्रतिभा को मंच प्रदान करना तथा होटल एवं हॉस्पिटैलिटी उद्योग से उन्हें परिचित कराना रहा। कार्यक्रम का समापन उत्साह, प्रेरणा एवं सकारात्मक ऊर्जा के साथ हुआ।  

    वित्त पोषित विश्वविद्यालयों का प्रतिनिधिमंडल फेडरेशन की हुई चर्चा

    आज रविवार को वित्त पोषित विश्वविद्यालयों का प्रतिनिधिमंडल फेडरेशन के अध्यक्ष प्रोफेसर सोमदेव, महासचिव, राजीव सक्सेना एवं संयोजक प्रोफेसर बी डी रावत के संयुक्त नेतृत्व में घनश्याम तिवारी सांसद के निवास स्थान पर मिला। घनश्याम तिवारी को शिष्ट मंडल ने विश्वविद्यालयों में व्याप्त पेंशन की समस्या के संदर्भ में विभिन्न पहलुओं पर विचार प्रस्तुत किया। तिवारी ने त्वरित रूप से मुख्यमंत्री भजनलाल के मुख्य सचिव अखिल अरोड़ा से इस समस्या के संदर्भ में फोन पर बात की तथा शिष्ट मंडल को मिलने का समय मांगा। अरोड़ा ने मुख्यमंत्री कार्यालय में 5:00 का समय दिया। अखिल अरोड़ा जी से शिष्ट मंडल ने मिलकर विश्वविद्यालयों में 1990 -91 से लागू पेंशन की समस्या के निराकरण के लिए मुख्यमंत्री से चर्चा कर निर्णय करने की गुहार लगाई। अरोड़ा जी ने सार्थक हल निकालने का आश्वासन दिया।  प्रतिनिधिमंडल में फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष एवं रूपा के अध्यक्ष प्रोफेसर हरिशंकर शर्मा एवं प्रोफेसर मधुसूदन शर्मा भी मौजूद रहे।

    देवनारायण का पाताल विजय अभियान: राक्षसों का संहार कर नाग कन्या और दैत्य पुत्री से रचाया विवाह

    गढ़ गाजणा के युद्ध से पाताल लोक तक गूंजा देव अवतार का प्रताप, भोपा संस्कृति के प्रतीकों का हुआ प्राकट्य राजस्थान। लोक संस्कृति के महानायक और विष्णु स्वरूप देवनारायण की गाथाएं शौर्य और अध्यात्म का अनूठा संगम हैं। उनके जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय गढ़ गाजणा का युद्ध और उसके पश्चात पाताल लोक में उनकी विजय से जुड़ा है। यह कथा न केवल उनके पराक्रम को दर्शाती है, बल्कि यह भी स्पष्ट करती है कि किस प्रकार देवनारायण की फड़ बांचने वाले भोपा समाज के पारंपरिक प्रतीकों का जन्म हुआ। रक्तबीज सदृश राक्षसों का अंत और जोगणियों का आह्वान पौराणिक वृत्तांत के अनुसार, जब देवनारायण ने गढ़ गाजणा के बाहर राक्षसों का संहार प्रारंभ किया, तो एक विचित्र स्थिति उत्पन्न हो गई। किसी भी राक्षस को मारने पर उसके रक्त की बूंदें जमीन पर गिरते ही नए राक्षसों को जन्म दे रही थीं। इस मायावी संकट को देखते हुए देवनारायण ने अपने दाहिने पांव से 64 जोगणियों और 52 भैरुओं को प्रकट किया। उन्होंने आदेश दिया कि राक्षसों के रक्त की एक भी बूंद धरती का स्पर्श न करे। जोगणियों और भैरुओं ने समस्त रक्त का पान किया, जिससे राक्षसों का समूल नाश संभव हो सका। पाताल लोक प्रस्थान और शेषनाग से साक्षात्कार भयंकर युद्ध के अंत में गज दन्त और नीम दन्त नामक दो शेष राक्षस साडू माता की घोड़ी लेकर पाताल लोक की खाई में जा छिपे। उनका पीछा करते हुए देवनारायण भी पाताल लोक जा पहुंचे, जहां पृथ्वी को धारण करने वाले शेषनाग विश्राम कर रहे थे। देवनारायण के अश्व की टापों की गूँज से शेषनाग जागृत हुए। जब देवनारायण ने उनसे राक्षसों के विषय में पूछा, तो शेषनाग ने अपनी कुंवारी नाग कन्या के साथ विवाह का प्रस्ताव रखा, जिसे देवनारायण ने स्वीकार कर लिया। 'सेली' का रहस्य: जोगी भोपा को मिला वरदान नाग कन्या के साथ प्रथम फेरा पूर्ण करने के बाद, देवनारायण ने चंवरी से उठकर एक तीव्र फटकार मारी। इस अलौकिक क्रिया से 'सेली' (काली डोरी) का निर्माण हुआ, जिसे उन्होंने जोगी भोपा को प्रदान किया। यही कारण है कि आज भी देवनारायण की फड़ बांचने वाले भोपे परंपरा के अनुसार अपने गले में इस काली डोरी को धारण करते हैं। दैत्य कन्या चीमटी बाई और फड़ दर्शन की लकड़ी शेषनाग से मार्ग का ज्ञान प्राप्त कर देवनारायण पुनः गढ़ गाजणा पहुंचे और दैत्यराज की सेना पर आक्रमण किया। भयभीत होकर गज दन्त और नीम दन्त ने साडू माता की काली घोड़ी और किवाड़ लौटा दिए। इसके साथ ही उन्होंने अपनी राजकुमारी चीमटी बाई (दैत्य कन्या) से विवाह का आग्रह किया। देवनारायण ने वहां दूसरा विवाह किया और दूसरे फेरे के बाद पुनः फटकार मारकर एक लकड़ी तैयार की। यह वही लकड़ी है जिसका उपयोग भोपा आज भी फड़ का परिचय देते समय दृश्यों को दर्शाने के लिए करते हैं। एक जीवंत परंपरा का आधार देवनारायण के ये प्रसंग केवल कथाएं नहीं हैं, बल्कि ये उस संस्कृति का आधार हैं जो सदियों से ग्रामीण अंचलों में रची-बसी है। पाताल लोक की इस विजय गाथा ने समाज को यह संदेश दिया कि अधर्म चाहे कितना भी गहरा क्यों न छिपा हो, नारायण का प्रताप उसे खोज निकालता है। आज भी 'जय देव धणी' के जयघोष के साथ भक्त इन चमत्कारों को याद करते हैं।