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    भारतीय ज्ञान परंपरा के डिजिटलीकरण में युवाओं की सहभागिता सराहनीय : डॉ. अमृता कौर

    2 hours ago

    राष्ट्र सम्मत/नागपुर। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली एवं इम्म्वर्स एआई के संयुक्त तत्वावधान में नागपुर में आयोजित 21 दिवसीय समर स्कूल "बिल्डिंग सिविलाइजेशनल एआई फ्रॉम भारत" के दसवें दिवस पर केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण विभाग की सहायक आचार्या एवं समन्वयक डॉ. अमृता कौर ने प्रतिभागियों के साथ संवाद करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा के डिजिटलीकरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में हो रहे नवाचारों पर विचार साझा किए।

    उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत साहित्य और पांडुलिपि संपदा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से संरक्षित करना समय की आवश्यकता है। संस्कृत और एआई का समन्वय भविष्य के ज्ञान-निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने प्रतिभागियों द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए इसे राष्ट्र की बौद्धिक धरोहर के संरक्षण का सशक्त प्रयास बताया।

    उल्लेखनीय है कि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी के मार्गदर्शन तथा विश्वविद्यालय की अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. लीना सक्करवाल के संरक्षण में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का समन्वयन एवं निर्देशन प्रो. मधुकेश्वर भट्ट, सह संयोजक सहायक आचार्य योगेंद्र दीक्षित द्वारा किया जा रहा है। कार्यक्रम में देश के 23 प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों से चयनित 30 विद्यार्थी भाग ले रहे हैं।

    प्रशिक्षण के अंतर्गत पांडुलिपियों एवं प्राचीन ग्रंथों के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया में ओसीआर (ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन) तकनीक द्वारा जनित पदों एवं वाक्यों का प्रतिभागियों द्वारा सत्यापन एवं प्रमाणीकरण किया जा रहा है। इससे भारतीय ज्ञान-संपदा को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित एवं शोधोपयोगी बनाने का कार्य आगे बढ़ रहा है।

    इस अवसर पर प्रतिभागियों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि यह प्रशिक्षण उन्हें संस्कृत, भारतीय ज्ञान प्रणाली और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के व्यावहारिक समन्वय को समझने का अवसर प्रदान कर रहा है। कार्यक्रम में इम्म्वर्स एआई के प्रोजेक्ट मैनेजर नई दिल्ली से ऑनलाइन माध्यम से जुड़े तथा उन्होंने परियोजना की प्रगति, उद्देश्यों और तकनीकी पहलुओं पर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।

    समर स्कूल के माध्यम से प्रतिभागियों को भारतीय ज्ञान प्रणाली, पांडुलिपि विज्ञान, ग्रंथों के डिजिटलीकरण, भाषा प्रौद्योगिकी, मशीन लर्निंग तथा एआई आधारित नवाचारों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। यह पहल भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक के समन्वय का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभर रही है।

     

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