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    साण्डेराव में खुलेगा देश का इकलौता 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इंडीजिनस फार्म'

    1 hour ago

    60 करोड़ की लागत से सुधरेगी पशुओं की नस्ल

    -पशुपालन विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने किया भूमिपूजन एवं शिलान्यास

    जयपुर। पशुओं में नस्ल सुधार और उनके संरक्षण की दिशा में राजस्थान ने रविवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रदेश के एकमात्र एवं प्रथम 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इंडीजिनस फार्म' के प्रशासनिक भवन के निर्माण कार्य का भूमि पूजन एवं शिलान्यास किया गया। यह शिलान्यास पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत द्वारा पाली जिले के सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत गांव साण्डेराव में स्थापित हो रहे इस सेंटर के प्रशासनिक भवन का भूमि पूजन एवं शिलान्यास वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया गया। संभंतया यह देश का भी पहला एवं एकमात्र एक्सीलेंस इंडीजिनस सेंटर है, जहां एक साथ गाय, भैंस, बकरी, भेड़, ऊंट व घोड़े की 30 प्रजातियों के नस्ल सुधार एवं संवर्धन का कार्य होगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए राजस्थान सरकार की बजट घोषणा (2025-26) की क्रियान्विति के तहत काम शुरू कर दिया गया है। इस पूरे सेंटर के निर्माण और विकास पर करीब 60 करोड़ रुपए की लागत आएगी। यह अत्याधुनिक सेंटर करीब 200 बीघा की विशाल भूमि पर स्थापित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य राजस्थान की पारंपरिक और विशिष्ट पशु प्रजातियों का संरक्षण करना है।

    पशुओं की 30 प्रजातियों के पशुओं की नस्लों का होगा सुधार और संवर्धन

     पशुपालन, मंत्री जोराराम कुमावत ने बताया कि करीब दो वर्ष में यह सेंटर पूर्ण रूप से अपना मूर्त रूप ले लगा। यह देश का एकमात्र ऐसा सेंटर होगा, जहां एक साथ गाय, भैंस, बकरी, भेड़, ऊंट व घोड़े की 30 प्रजातियों के नस्ल सुधार व संवर्धन पर रिसर्च होंगे। उन्होंने बताया कि खासकर उन प्रजातियों पर अधिक फोकस होगा, जो कि राजस्थान की हैं। कुमावत ने बताया कि गाय में गिर, कॉकरेंच, राठी, थारपारकर, साहिवाल, नागौरी, मालवी व हरियाणा नस्ल का सैक्स सोर्टेड सीमन, कृत्रिम गर्भाधान व उन्नत नस्ल के सांड से सुधार व संवर्धन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि खासकर दुनिया की सबसे छोटी गाय की पुंगनूर प्रजाति के नस्ल सुधार को लेकर भी संरक्षण व संवर्धन के लिए रिसर्च किया जाएगा। मूल रूप् से आंध्रप्रदेश की इस पुंगनूर नस्ल की गाय के पालन को लेकर पशुपालकों में खासा उत्साह है। इसके अलावा भैंस की स्वदेशी प्रजाति- मुर्रा, सूरती, जाफराबादी, मेहसाना, भेड़ की मगरा, मारवाड़ी, नाली, चोकला, पूगल, जैसलमेरी, मालपुरा व सोनाड़ी, बकरी की राजस्थान की प्रजाति- बारबरी, सिरोही, जमनापारी, जखराना, सोजत, मारवाड़ी, ऊंट की प्रजाति- जैसलमेरी व बीकानेरी तथा घोड़े की एकमात्र राजस्थान की प्रजाति मारवाड़ी के नस्ल का संरक्षण व संवर्धन किया जाएगा।

    पशुपालकों को मिलेगा प्रशिक्षण और उन्नत नस्ल के पशु

    यह सेंटर सिर्फ एक अनुसंधान केंद्र नहीं होगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक बड़ा जरिया बनेगा। पशुपालन मंत्री कुमावत ने बताया कि उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए पशुपालन के क्षेत्र में नए स्टार्टअप और उद्यमिता को विकसित किया जाएगा। इसके साथ-साथ पशुपालकों को आधुनिक और नवीन वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। वहीं, समय-समय पर पशुपालकों के लिए ट्रेनिंग कैंप आयोजित किए जाएंगे। यहाँ से पशुपालकों को सीधे उन्नत नस्ल के उच्च गुणवत्ता वाले पशु भी उपलब्ध करवाए जाएंगे।

    प्रशासनिक ढांचा और नए पदों का सृजन

    इस महत्वाकांक्षी परियोजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए राज्य सरकार के वित्त विभाग ने प्रशासनिक मंजूरी दे दी है। इसके तहत पशुपालन विभाग के लिए कुल 15 पदों का सृजन किया गया है, जिनमें 07 स्थायी पद शामिल हैं। वहीं, 8 पद संविदाकर्मियों के लिए सृजित किए गए हैं।

    इको-फ्रेंडली और ग्रीन टेक्नोलॉजी से लैस होगा सेंटर

    आधुनिकता के साथ-साथ इस सेंटर को पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा रहा है। इस फार्म की दो सबसे बड़ी तकनीकी खास बातें होंगी। पहला, पूरे परिसर की बिजली और ऊर्जा जरूरतों के लिए सौर ऊर्जा जैसे पर्यावरण-अनुकूल स्रोतों का बेहतरीन उपयोग किया जाएगा। साथ ही पानी की हर बूंद को सहेजने के लिए उन्नत वर्षा जल संचयन प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे भूजल स्तर सुधरेगा और फार्म आत्मनिर्भर बनेगा। वहीं, इस सेंटर का पर्यटन की दृष्टि से भी विकसित किया जा रहा है।

    इस शिलान्यास समारोह के दौरान सरस डेयरी, पाली के अध्यक्ष प्रताप सिंह बिठिया, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष करण सिंह नेतरा, सुमेरपुर एसडीएम कालूराम कुम्हार, विकास अधिकारी शैलेंद्र जोशी, निम्बेश्वर महादेव ट्रस्ट, साण्डेराव के अध्यक्ष जगत सिंह राणावत, साण्डेराव की प्रशासक दाकू देवी, साण्डेराव मण्डल के अध्यक्ष जोराराम देवासी, समाजसेवी गणपत सिंह देवतरा सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, पशुपालन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में क्षेत्र के प्रगतिशील पशुपालक व ग्रामीण मौजूद रहे।

     

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