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    NHAI ने हाई-स्पीड एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे के लिए जारी किए एक समान डिजाइन मानक, जानिए क्या बदलेगा

    38 minutes ago

    Yugcharan News / 22-09-2026

    भारत में हाई-स्पीड सड़क नेटवर्क के विस्तार के बीच भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड नेशनल हाईवे के लिए एक समान डिजाइन फ्रेमवर्क पेश किया है। नए दिशानिर्देशों का उद्देश्य देश में ऐसे हाईवे की योजना, डिजाइन, यातायात आकलन, लेन व्यवस्था, इंटरचेंज और सुरक्षा प्रावधानों को एक समान बनाना है।

    NHAI के अनुसार, नए मानक आगामी चार और छह लेन वाले एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड राष्ट्रीय राजमार्गों पर लागू होंगे। हालांकि, एक्सप्रेसवे इन दिशानिर्देशों के दायरे से बाहर रहेंगे।

    यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत में हाई-स्पीड और नियंत्रित प्रवेश वाले सड़क गलियारों का नेटवर्क तेजी से विस्तार करने की योजना पर काम हो रहा है। सरकार के Viksit Bharat 2047 रोडमैप के तहत करीब 50,000 किलोमीटर एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

    अब तक अलग मानकों के कारण थी असमानता

    NHAI के मुताबिक, अब तक एक्सप्रेसवे के अलावा एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड राष्ट्रीय राजमार्गों की योजना और डिजाइन के लिए अलग से व्यापक मानक मौजूद नहीं थे। इसके चलते अलग-अलग कॉरिडोर के लिए Detailed Project Report (DPR) तैयार करते समय तकनीकी मानकों में अंतर देखने को मिलता था।

    नए फ्रेमवर्क का उद्देश्य इस स्थिति में एकरूपता लाना है। इसके तहत परियोजनाओं की योजना बनाते समय यातायात की मात्रा, लेन की संख्या, सड़क की ज्यामिति, संरचनाओं, इंटरचेंज और प्रवेश नियंत्रण जैसे पहलुओं के लिए साझा मानक अपनाए जाएंगे।

    इससे अलग-अलग राज्यों और परियोजनाओं में तैयार होने वाले हाई-स्पीड कॉरिडोर की डिजाइन प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करने की कोशिश की गई है।

    यातायात के आधार पर तय होगी लेन की संख्या

    नए दिशानिर्देशों में हाईवे की संरचना को अपेक्षित यातायात के आधार पर तय करने का प्रावधान किया गया है। इसका मतलब है कि जिस कॉरिडोर पर वाहनों की संख्या जितनी अधिक होगी, वहां सड़क और संबंधित संरचनाओं की क्षमता उसी हिसाब से निर्धारित की जाएगी।

    दिशानिर्देशों के अनुसार, जिन कॉरिडोर पर प्रतिदिन 15,000 तक वाहनों का यातायात अनुमानित है, वहां चार लेन का हाईवे और चार लेन की संरचनाएं बनाई जाएंगी। ऐसे कॉरिडोर के लिए प्रस्तावित चौड़ाई 60 मीटर होगी।

    यदि यातायात 15,000 से 25,000 वाहनों के बीच है, तो चार लेन का हाईवे और छह लेन की संरचनाओं का प्रावधान होगा। इस श्रेणी के कॉरिडोर की प्रस्तावित चौड़ाई 70 मीटर रखी गई है।

    वहीं, 25,000 से 40,000 वाहनों वाले कॉरिडोर के लिए छह लेन का हाईवे और छह लेन की संरचनाएं प्रस्तावित की गई हैं। इस श्रेणी में भी कॉरिडोर की चौड़ाई 70 मीटर निर्धारित की गई है।

    इस व्यवस्था के जरिए सड़क की क्षमता को वास्तविक और अनुमानित यातायात मांग से जोड़ने की कोशिश की गई है।

    हाईवे के प्रवेश और निकास पर ज्यादा ध्यान

    नए डिजाइन फ्रेमवर्क में हाई-स्पीड यातायात की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रवेश और निकास बिंदुओं के बारे में भी नए प्रावधान शामिल किए गए हैं।

    सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, हाईवे पर एंट्री और एग्जिट की पहले से सूचना देने के लिए पर्याप्त संकेत और अग्रिम सूचना व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इसका उद्देश्य वाहन चालकों को निकास या प्रवेश बिंदु के बारे में पहले से जानकारी देना है, ताकि वे अचानक लेन बदलने या तेज ब्रेक लगाने जैसी परिस्थितियों से बच सकें।

    हाई-स्पीड सड़कों पर अचानक किसी इंटरचेंज या निकास के सामने आने से दुर्घटना का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए नए मानकों में ड्राइवर को पहले से पर्याप्त जानकारी देने पर विशेष जोर दिया गया है।

    महत्वपूर्ण सड़कों पर इंटरचेंज और रैंप

    NHAI के नए मानकों में हाई-स्पीड कॉरिडोर पर सीधे प्रवेश को सीमित करने की व्यवस्था भी की गई है। महत्वपूर्ण सड़क क्रॉसिंग पर इंटरचेंज और रैंप विकसित किए जाएंगे।

    इनका प्रावधान एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग और ऐसे महत्वपूर्ण आर्टेरियल रोड के साथ क्रॉसिंग पर किया जाएगा, जहां पर्याप्त मात्रा में यातायात उत्पन्न होता है।

    इस व्यवस्था का उद्देश्य हाई-स्पीड कॉरिडोर पर अनियंत्रित या सीधे प्रवेश को कम करना है। इससे मुख्य राजमार्ग पर चल रहे तेज यातायात और स्थानीय या दूसरे मार्गों से आने वाले वाहनों के बीच संभावित टकराव की स्थितियों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

    एयरपोर्ट, पोर्ट और लॉजिस्टिक्स हब से बेहतर कनेक्टिविटी

    नए दिशानिर्देशों में प्रमुख यातायात पैदा करने वाले स्थानों को हाई-स्पीड हाईवे से जोड़ने पर भी ध्यान दिया गया है।

    पोर्ट, एयरपोर्ट, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, औद्योगिक क्षेत्र और बड़े पर्यटन स्थलों जैसे प्रमुख गंतव्यों तक पहुंच के लिए आवश्यक स्थानों पर इंटरचेंज उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।

    इससे हाई-स्पीड हाईवे केवल लंबी दूरी के यातायात के लिए ही नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण आर्थिक और लॉजिस्टिक केंद्रों से कनेक्टिविटी के लिए भी उपयोगी बनाए जा सकेंगे।

    विशेष रूप से औद्योगिक क्षेत्रों और लॉजिस्टिक्स पार्कों के साथ बेहतर कनेक्टिविटी माल परिवहन के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। इसी तरह एयरपोर्ट और बंदरगाहों से सीधी और नियंत्रित पहुंच यात्रियों तथा माल की आवाजाही को अधिक व्यवस्थित करने में मदद कर सकती है।

    हाईवे के किनारे एक मीटर ऊंची बाउंड्री वॉल

    एक्सेस कंट्रोल को मजबूत करने के लिए NHAI ने हाईवे के बाहरी किनारे पर एक मीटर ऊंची बाउंड्री वॉल बनाने का प्रावधान भी किया है।

    इस दीवार का उद्देश्य हाईवे पर अनधिकृत प्रवेश, अतिक्रमण और आवारा पशुओं के प्रवेश को रोकना है। हाई-स्पीड कॉरिडोर पर अचानक पैदल यात्रियों, स्थानीय वाहनों या पशुओं के पहुंचने से गंभीर दुर्घटना का खतरा पैदा हो सकता है।

    इसलिए भौतिक अवरोध को नए डिजाइन फ्रेमवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। इससे सड़क के प्रवेश बिंदुओं को अधिक नियंत्रित रखने और हाई-स्पीड यातायात के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने की कोशिश की गई है।

    ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड दोनों परियोजनाओं पर लागू

    नए मानक केवल नई सड़कों तक सीमित नहीं रहेंगे। NHAI के अनुसार, इनका इस्तेमाल ग्रीनफील्ड परियोजनाओं के साथ-साथ मौजूदा हाईवे को एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर में अपग्रेड करने वाली ब्राउनफील्ड परियोजनाओं में भी किया जाएगा।

    ग्रीनफील्ड परियोजनाएं ऐसे नए सड़क कॉरिडोर हैं जिन्हें नए सिरे से विकसित किया जाता है, जबकि ब्राउनफील्ड परियोजनाओं में मौजूदा सड़क ढांचे को अपग्रेड या पुनर्विकसित किया जाता है।

    दोनों प्रकार की परियोजनाओं के लिए समान आधारभूत मानक निर्धारित करने से डिजाइन और योजना प्रक्रिया में अंतर कम करने की कोशिश की गई है।

    DPR तैयार करने में आएगी एकरूपता

    NHAI के नए फ्रेमवर्क का एक प्रमुख उद्देश्य Detailed Project Report यानी DPR तैयार करने की प्रक्रिया में एकरूपता लाना है। किसी बड़े हाईवे प्रोजेक्ट की DPR में यातायात अनुमान, लेन की जरूरत, सड़क की ज्यामिति, पुल और अन्य संरचनाएं, इंटरचेंज, प्रवेश नियंत्रण और सुरक्षा उपायों जैसे पहलुओं का आकलन किया जाता है।

    अब इन पहलुओं के लिए साझा मानक होने से अलग-अलग परियोजनाओं की योजना तैयार करने में अधिक स्पष्टता आने की उम्मीद है।

    NHAI का मानना है कि एक समान डिजाइन व्यवस्था से हाई-स्पीड कॉरिडोर की योजना और निर्माण में तकनीकी अंतर कम होंगे तथा सड़क नेटवर्क के संचालन में भी अधिक एकरूपता लाई जा सकेगी।

    भारत के हाई-स्पीड रोड नेटवर्क के विस्तार की दिशा में कदम

    भारत में आर्थिक गतिविधियों, औद्योगिक क्षेत्रों, बंदरगाहों, एयरपोर्ट और बड़े शहरों के बीच तेज कनेक्टिविटी की जरूरत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड हाईवे का नेटवर्क विस्तार बुनियादी ढांचे की योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है।

    NHAI का नया डिजाइन फ्रेमवर्क इसी विस्तार को एक समान तकनीकी और सुरक्षा मानकों के साथ आगे बढ़ाने का प्रयास है। यातायात के आधार पर लेन की संख्या तय करने, महत्वपूर्ण स्थानों पर इंटरचेंज उपलब्ध कराने, प्रवेश और निकास की अग्रिम सूचना देने तथा हाईवे के किनारे भौतिक अवरोध बनाने जैसे प्रावधानों के जरिए परियोजनाओं की योजना को अधिक व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया गया है।

    नए दिशानिर्देशों का प्रभाव आने वाले समय में उन चार और छह लेन वाले एक्सेस-कंट्रोल्ड राष्ट्रीय राजमार्गों की डिजाइन और निर्माण प्रक्रिया में दिखाई देगा, जिन्हें देश के विभिन्न हिस्सों में विकसित या अपग्रेड किया जाना है। सरकार के Viksit Bharat 2047 के तहत प्रस्तावित बड़े हाई-स्पीड कॉरिडोर नेटवर्क के संदर्भ में इन मानकों को एक महत्वपूर्ण आधार के रूप में देखा जा रहा है।

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