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    आईआईटी बॉम्बे ने छात्र की मौत पर पुराने बयान के लिए मांगी माफी, प्रोफेसर की डीन पद से छुट्टी

    44 minutes ago

     

    Yugcharan News / 22-09-2026

    मुंबई: आईआईटी बॉम्बे ने बीटेक छात्र साहिल वाकोड़े की मौत को लेकर अपने पहले के बयान पर माफी मांगी है। संस्थान ने कहा कि छात्र की मौत से पहले की परिस्थितियों के बारे में उसके शुरुआती बयान में की गई टिप्पणियां उचित जांच पूरी होने से पहले की गई थीं। इसी बीच, परिसर में छात्रों का विरोध जारी है और छात्र मामले की स्वतंत्र जांच तथा संस्थान की प्रक्रियाओं में बदलाव की मांग कर रहे हैं।

    दूसरे वर्ष के बीटेक छात्र साहिल वाकोड़े की शुक्रवार को छात्रावास के कमरे में मौत हो गई थी। इसके बाद आईआईटी बॉम्बे में छात्रों के बीच विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। छात्र की मौत को लेकर उसके परिवार ने जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। पुलिस ने परिवार की शिकायत के आधार पर आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित प्रावधानों और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।

    पुराने बयान पर संस्थान ने जताया खेद

    आईआईटी बॉम्बे ने सोमवार को जारी अपने नए बयान में कहा कि साहिल की मौत से संबंधित परिस्थितियों पर पहले जारी की गई जानकारी के लिए वह माफी मांगता है। संस्थान ने यह भी कहा कि मामले की जांच जारी है और जांच पूरी होने से पहले घटना से जुड़े विवरणों को तय तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं है।

    संस्थान के अनुसार, जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही छात्र की मौत से पहले हुई घटनाओं के बारे में स्पष्ट निष्कर्ष सामने आ सकेंगे।

    आईआईटी बॉम्बे ने यह भी स्पष्ट किया कि संस्थान के निदेशक शिरीष केदारे ने इस्तीफा नहीं दिया है। उनके इस्तीफे से संबंधित खबरों को संस्थान ने गलत बताया। हालांकि, विरोध कर रहे छात्रों से बातचीत के दौरान केदारे ने सोमवार को इस्तीफा देने की बात कही थी।

    परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन का मामला

    साहिल की मौत के बाद संस्थान ने शनिवार को एक बयान जारी किया था। इसमें कहा गया था कि छात्र ने एक मध्यावधि परीक्षा का प्रश्नपत्र अपने मोबाइल फोन से ChatGPT पर अपलोड कर उत्तर हासिल करने का प्रयास किया था।

    आईआईटी बॉम्बे के अनुसार, इसके बाद छात्र से संबंधित शिक्षक और विभागाध्यक्ष ने बातचीत की थी। संस्थान ने कहा था कि छात्र को समझाया गया और उसे आश्वस्त किया गया कि इस घटना का उसके अकादमिक करियर पर असर नहीं पड़ेगा। संस्थान ने यह भी कहा था कि उसके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी।

    इस शुरुआती बयान की छात्रों ने आलोचना की। छात्रों का कहना था कि छात्र की मौत के तुरंत बाद परीक्षा और मोबाइल फोन से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करना मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उचित नहीं था। संस्थान के सोशल मीडिया अकाउंट पर पुराना बयान बाद में जारी किए गए स्पष्टीकरण के बावजूद मौजूद रहा।

    छात्रों ने की स्वतंत्र जांच की मांग

    साहिल की मौत के बाद आईआईटी बॉम्बे परिसर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन तेज हुआ। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मामले की स्वतंत्र जांच कराने, संस्थान की अनुशासनात्मक प्रक्रियाओं में बदलाव करने और छात्रों के लिए बेहतर सुरक्षा एवं सहायता व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।

    विरोध के बीच संस्थान के निदेशक ने छात्रों के साथ बैठक की और 18 मांगों वाले एक चार्टर पर हस्ताक्षर किए। संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की एक आपात बैठक भी प्रस्तावित है। इसके बाद निदेशक द्वारा छात्रों के साथ ओपन हाउस आयोजित किए जाने की बात कही गई है।

    परिवार ने लगाए जातिगत भेदभाव के आरोप

    साहिल वाकोड़े के माता-पिता ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे को आईआईटी बॉम्बे में जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था। परिवार की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है।

    हालांकि, ये आरोप अभी जांच के अधीन हैं और किसी जांच या न्यायिक प्रक्रिया में अभी स्थापित तथ्य के रूप में सामने नहीं आए हैं। आईआईटी बॉम्बे ने जातिगत भेदभाव के आरोपों से इनकार किया है। संस्थान का कहना है कि साहिल ने उसके एससी/एसटी छात्र एवं कर्मचारी प्रकोष्ठ में ऐसी कोई शिकायत नहीं की थी।

    मामले में प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला का नाम भी एफआईआर में शामिल किया गया है। इसके बाद उन्होंने आईआईटी बॉम्बे में अपने पद से हटने की घोषणा की है।

    फैकल्टी फोरम ने प्रोफेसर का समर्थन किया

    इस बीच आईआईटी बॉम्बे के फैकल्टी फोरम ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के समर्थन में बयान जारी किया है। फोरम के अनुसार, परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के कथित अनधिकृत इस्तेमाल की स्थिति में प्रोफेसर संस्थान द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

    फैकल्टी फोरम ने कहा कि उसके सहयोगी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली कार्रवाई को लेकर वह चिंतित है और उसके अनुसार प्रोफेसर ने परीक्षा संबंधी निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया था।

    इस मामले पर कुछ राजनीतिक नेताओं और सार्वजनिक हस्तियों की ओर से भी प्रतिक्रियाएं आई हैं। भाजपा के तेनकासी जिला अध्यक्ष अनंतन अय्यासामी ने सोशल मीडिया पर प्रोफेसर के खिलाफ एससी/एसटी अधिनियम के तहत दर्ज मामले का विरोध किया। उन्होंने मामले में कानून के कथित दुरुपयोग का आरोप भी लगाया।

    ज़ोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने अय्यासामी की पोस्ट को साझा करते हुए प्रोफेसर डूला के समर्थन में अपनी प्रतिक्रिया दी। शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि परीक्षा में कथित नकल की रिपोर्टिंग करने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई को छात्र की मौत के पूरे विवाद का समाधान मानना पर्याप्त नहीं होगा।

    इन राजनीतिक और सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं के बावजूद, साहिल की मौत तथा जातिगत भेदभाव से जुड़े आरोपों की जांच अभी जारी है।

    सात महीनों में तीसरी अप्राकृतिक मौत

    साहिल वाकोड़े की मौत इस वर्ष आईआईटी बॉम्बे परिसर में अप्राकृतिक मौत की तीसरी घटना बताई जा रही है।

    फरवरी में 21 वर्षीय बीटेक सिविल इंजीनियरिंग के दूसरे वर्ष के छात्र नमन अग्रवाल की छात्रावास की इमारत की छत से गिरने के बाद मौत हुई थी। पुलिस ने उस समय आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट दर्ज की थी और कहा था कि कोई सुसाइड नोट नहीं मिला।

    जुलाई में 20 वर्षीय मटेरियल साइंस के दूसरे वर्ष के छात्र सोहिल राजकुमार संगवान छात्रावास के कमरे में मृत मिले थे। पुलिस की प्रारंभिक जांच में पारिवारिक परिस्थितियों और निजी संबंधों से जुड़ी परेशानियों की ओर संकेत किया गया था और उस समय किसी साजिश की आशंका नहीं जताई गई थी।

    देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में छात्रों की मौत की घटनाओं ने अकादमिक दबाव, मानसिक स्वास्थ्य और कैंपस सहायता व्यवस्था को लेकर भी चर्चा तेज की है।

    अन्य आईआईटी में भी सामने आईं चिंताएं

    आईआईटी दिल्ली में मार्च में प्रथम वर्ष के बीटेक सिविल इंजीनियरिंग छात्र हर्षित स्वामी की परिसर में मौत हुई थी। संस्थान के सुरक्षा अधिकारी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित मामला दर्ज किया था। संस्थान ने उस समय घटना पर दुख जताते हुए छात्रों और शिक्षकों के लिए सहायता तथा काउंसलिंग की व्यवस्था उपलब्ध कराने की बात कही थी।

    आईआईटी बॉम्बे में 2023 में 18 वर्षीय प्रथम वर्ष के बीटेक छात्र दर्शन सोलंकी की आत्महत्या से भी कैंपस में जातिगत भेदभाव को लेकर गंभीर बहस हुई थी। उनके परिवार ने जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया था। पुलिस की चार्जशीट में भी उनके परिवार के सामने जाति का पता चलने के बाद छात्रों के व्यवहार में बदलाव की बात दर्ज की गई थी।

    इन घटनाओं के बीच विभिन्न आईआईटी संस्थानों ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और परीक्षा संबंधी दबाव को लेकर सहायता उपायों को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए हैं।

    आईआईटी खड़गपुर के निदेशक सुमन चक्रवर्ती ने भी परीक्षाओं से पहले छात्रों के लिए संदेश जारी करते हुए उन्हें अकादमिक परिणामों को अपनी पूरी पहचान से जोड़कर नहीं देखने की सलाह दी थी। उन्होंने छात्रों को यह भरोसा दिलाने पर जोर दिया कि कठिन समय में संस्थान की सहायता उनके साथ है।

    फिलहाल आईआईटी बॉम्बे में साहिल वाकोड़े की मौत से जुड़ी जांच जारी है। संस्थान ने अपने शुरुआती बयान पर माफी मांगते हुए कहा है कि जांच पूरी होने से पहले घटना की परिस्थितियों पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। छात्रों की मांग, परिवार के आरोप और संस्थान के पक्ष के बीच अब पुलिस जांच तथा प्रस्तावित संस्थागत बैठकों के नतीजे इस मामले की आगे की दिशा तय करेंगे।

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