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    21वीं इंडिया - जापान इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ‘बायकॉन 2026 का हुआ समापन : एआई के सही इस्तेमाल पर विशेषज्ञों ने दिया जोर

    1 hour ago

    एआई को यूज़ करे लेकिन खुद पर हावी न होने दें : डॉ. संजय बियानी

    जयपुर । बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेस में आयोजित चार दिवसीय 21वीं इंडो-जापान इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ‘बायकॉन-2026’ का बुधवार को समापन हुआ। समापन दिवस पर दो महत्वपूर्ण अकादमिक सत्र आयोजित किए गए। प्रथम सत्र में सोशल साइंसेज एवं एजुकेशन विभाग द्वारा “इंटेलिजेंट सोसाइटीज़: AI ट्रांसफॉर्मिंग सोशल सिस्टम्स, ह्यूमन डेवलपमेंट एंड एजुकेशन” विषय पर विशेषज्ञ चर्चा हुई। वहीं, द्वितीय सत्र में लॉ विभाग द्वारा “द फ्यूचर ऑफ लॉ एंड गवर्नेंस इन द ऐज ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” विषय पर विचार-विमर्श किया गया।

    सत्रों में एआई के समाज, शिक्षा, मीडिया एवं कानून पर प्रभाव, डेटा प्राइवेसी, साइबर सिक्योरिटी तथा इसके अवसरों और चुनौतियों पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं गणेश वंदना के साथ हुई, इसके बाद अतिथियों एवं विशेषज्ञ वक्ताओं का स्वागत किया गया।

    समापन समारोह में मुख्य अतिथि डिप्टी चीफ मिनिस्टर के डिप्टी चीफ हनुमान सिंह शेखावत, राजस्थान सचिवालय के हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट से समीर शर्मा, विशिष्ट अतिथि इशिकावा प्रीफेक्चरल यूनिवर्सिटी से प्रो. बाबा, ओसाका कॉलेज ऑफ टूरिज्म एंड बिजनेस से प्रो. क्यो एवं नवीन, डॉ. ली और डॉ. याहो सहित आयोजक चेयरमैन डॉ. राजीव बियानी, डायरेक्टर डॉ. संजय बियानी तथा डीन एवं प्रिंसिपल डॉ. ध्यान सिंह गोठवाल उपस्थित रहे।

    डिप्टी चीफ मिनिस्टर के डिप्टी चीफ हनुमान सिंह शेखावत ने कहा कि बियानी कॉलेज द्वारा समय-समय पर इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं, जो एक सराहनीय पहल है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से विभिन्न देशों के शिक्षा और संस्कृति से जुड़ी जानकारी को साझा करने और एक-दूसरे को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने इस सफल आयोजन के लिए बियानी कॉलेज को शुभकामनाएं दीं ।

    राजस्थान सचिवालय के हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट से समीर शर्मा ने कहा कि भारत ने करीब 1700 वर्षों तक अपने ज्ञान और समृद्ध परंपरा के आधार पर विश्व का मार्गदर्शन किया है। आज की युवा पीढ़ी के पास विचार, विज़न और नवाचार की क्षमता है। यदि उन्हें उचित संसाधन और सरकारी सहयोग मिले, तो वे आगे बढ़कर भारत की ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

    इसी क्रम में गुलाबी प्रोग्राम के तहत भारत आए जापानी विद्यार्थियों ने अपने भारत प्रवास के अनुभव सभी के साथ साझा किए। विद्यार्थियों ने भारत की संस्कृति, परंपराओं और यहां मिले भावनात्मक जुड़ाव के बारे में अपने विचार व्यक्त किए। साथ ही, उन्होंने राजस्थानी लोक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति देकर सभी का उत्साह बढ़ाया।

    समारोह में कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग चेयर एवं डायरेक्टर (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) प्रो. डॉ. मनीष बियानी ने एजुकेशन और लॉ के विद्यार्थियों को जापान में उपलब्ध करियर अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने ओसीटीबी–बियानी टी2सी (ट्रेनिंग टू करियर) जॉइंट एजुकेशन एंड जॉब प्रोग्राम के तहत पढ़ाई, ट्रेनिंग और रोजगार के अवसरों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने गुलाबी प्रोग्राम और साकुरा साइंस प्रोग्राम के माध्यम से विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीखने और आगे बढ़ने के अवसरों से अवगत कराया। साथ ही, उन्होंने विद्यार्थियों को अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग देश के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

    वहीं कॉलेज के एकेडमिक डायरेक्टर डॉ. संजय बियानी ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि मोटिवेशन के लिए केवल लेक्चर देने के बजाय विद्यार्थियों को छोटे-छोटे साप्ताहिक लक्ष्य और प्रैक्टिकल गतिविधियां दी जानी चाहिए। हर सोमवार लक्ष्य तय करें और शुक्रवार को उसकी समीक्षा करें, इससे आत्मविश्वास और एफिशियंसी बढ़ेगी। उन्होंने कहा, “आप एआई को चलाएं, एआई आपको न चलाए।” विद्यार्थियों को एआई टूल्स का सही उपयोग सीखने और चैटजीपीटी का उपयोग करियर व सीखने से जुड़े सवालों के लिए करने की सलाह दी। उन्होंने कहा, “जिंदगी काम करने से बदलती है, सिर्फ समझने से नहीं।” उन्होंने फैकल्टी से इंटरेस्टिंग प्रोजेक्ट तैयार करने और विद्यार्थियों को जापान की शिक्षा व कार्य संस्कृति से सीखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि बियानी का हर विद्यार्थी लीडर बने और अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए स्वयं पहल करे।

    तकनीकी सत्र में केंद्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा के प्रो. दिनेश चाहल ने कहा कि एआई नए दौर की शुरुआत है। युवाओं को इसके सही उपयोग के साथ नियंत्रण और संयम भी रखना चाहिए। एआई से नए आय के अवसर तलाशते हुए वैल्यूज, एथिक्स और रिस्पॉन्सिबिलिटी का भी ध्यान रखना जरूरी है।

    वनस्थली विद्यापीठ के प्रो. अजय सुराणा ने कहा कि कोरोना महामारी के बाद शिक्षा क्षेत्र में कई बदलाव आए हैं। एआई के आने से नई चुनौतियाँ सामने आई हैं, ऐसे में शिक्षकों को नवाचार के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। उन्होंने एआई के प्रभाव, चुनौतियों और उनके समाधान के लिए आवश्यक सुझाव भी साझा किए।

    नई दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया से प्रो.डॉ. इंदरजीत सिंह सोढ़ी ने कहा कि कृषि, ट्रैफिक मैनेजमेंट और ग्रामीण प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में प्रभावी एआई टूल्स की कमी है। उन्होंने इन क्षेत्रों के लिए सुलभ और उपयोगी एआई समाधान विकसित करने पर जोर दिया।

    जयपुर के शिक्षा संकुल से नोडल अधिकारी डॉ. चंदर कंवर पलावत ने शिक्षा, प्रशासन एवं सामाजिक विषयों पर अपने विचार साझा किए।

    इसके बाद मौखिक प्रस्तुति सत्र आयोजित हुआ, जिसमें शोधकर्ताओं ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए और प्रश्नोत्तर सत्र में विचार-विमर्श किया।

    लॉ एवं गवर्नेंस सत्र की शुरुआत में प्रेसिडेंसी यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु की प्रो.डॉ. सरोज शर्मा बोहरा ने कहा कि एआई कानून और न्याय के क्षेत्र में मददगार है, लेकिन अंतिम फैसला इंसान ही करेगा। उन्होंने डिजिटल सबूतों और साइबर लॉ में एआई के सही और जिम्मेदारी से उपयोग पर जोर दिया।

    वीजीयू से डॉ. शिल्पा राव रस्तोगी ने एआई के बढ़ते इस्तेमाल से जुड़े साइबर चैलेंज और प्राइवेसी पर चर्चा की। उन्होंने डिजिटल अरेस्ट जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा और एआई के जिम्मेदार इस्तेमाल पर जोर दिया।

    लॉ डेस्क के फाउंडर एडवोकेट प्रतीक कासलीवाल ने कहा कि एआई के बढ़ते उपयोग के साथ डेटा प्राइवेसी, डीपफेक, मॉनिटरिंग, डिस्क्रिमिनेशन और मिसइन्फॉर्मेशन जैसी चुनौतियां बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि एआई के डिसीजन में ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट कानूनी व्यवस्था जरूरी है।

    अंत में सहायक निदेशक डॉ. राधिका बियानी डागा ने कार्यक्रम की रिपोर्ट प्रस्तुत की और सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। सम्मेलन का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

    समापन के साथ BICON-2026 ने यह संदेश दिया कि AI का भविष्य केवल तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, समाज, कानून और मानव जीवन के साथ उसके संतुलित और जिम्मेदार उपयोग में भी निहित है।

     

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