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    देश के कई शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर, वैश्विक तेल संकट के बीच बाजारों में बनी अनिश्चितता

    1 month ago

    Yugcharan News / 13 मार्च 2026

    नई दिल्ली: वैश्विक तेल बाजार में जारी अस्थिरता के बावजूद भारत के कई प्रमुख शहरों में शुक्रवार, 13 मार्च को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के बावजूद देश के अधिकांश शहरों में ईंधन दरें लगभग स्थिर बनी हुई हैं।

    हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता आने वाले दिनों में ईंधन कीमतों को प्रभावित कर सकती है।

    प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल के दाम

    देश के बड़े महानगरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मामूली अंतर देखा जा रहा है, जो मुख्य रूप से राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स के कारण होता है।

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत लगभग ₹94.77 प्रति लीटर और डीजल की कीमत ₹87.67 प्रति लीटर दर्ज की गई। वहीं मुंबई में पेट्रोल ₹103.50 प्रति लीटर और डीजल ₹90.03 प्रति लीटर के आसपास बना हुआ है।

    कोलकाता और हैदराबाद जैसे शहरों में पेट्रोल की कीमतें अपेक्षाकृत अधिक हैं। कोलकाता में पेट्रोल ₹105.41 प्रति लीटर और डीजल ₹92.02 प्रति लीटर है, जबकि हैदराबाद में पेट्रोल ₹107.50 प्रति लीटर और डीजल ₹95.70 प्रति लीटर तक पहुंच गया है।

    दक्षिण भारत के प्रमुख शहर चेन्नई में पेट्रोल लगभग ₹100.90 प्रति लीटर और डीजल ₹92.48 प्रति लीटर दर्ज किया गया। वहीं बेंगलुरु में पेट्रोल ₹102.96 और डीजल लगभग ₹90.99 प्रति लीटर के आसपास बना हुआ है।

    अपेक्षाकृत सस्ते शहर

    कुछ शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अपेक्षाकृत कम बनी हुई हैं। अहमदाबाद में पेट्रोल करीब ₹94.49 प्रति लीटर और डीजल ₹90.21 प्रति लीटर है, जबकि लखनऊ में पेट्रोल ₹95.48 और डीजल ₹88.64 प्रति लीटर दर्ज किया गया।

    विशेषज्ञों के अनुसार राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले वैट और अन्य करों में अंतर होने के कारण विभिन्न शहरों में ईंधन की कीमतें अलग-अलग दिखाई देती हैं।

    वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें हाल के दिनों में काफी तेजी से बढ़ी हैं। वैश्विक मानक माने जाने वाले ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है।

    इस तेजी की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों को लेकर बनी अनिश्चितता है। खासतौर पर Strait of Hormuz को लेकर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।

    यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यदि इस मार्ग में बाधा आती है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है।

    रुपये पर भी पड़ा दबाव

    बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों का असर भारतीय मुद्रा पर भी दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर लगभग 92.37 के स्तर पर पहुंच गया, जो अब तक के निचले स्तरों में से एक माना जा रहा है।

    विश्लेषकों का कहना है कि विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से पैसा निकालने और वैश्विक अनिश्चितता के कारण रुपया दबाव में बना हुआ है।

    स्थिति को संभालने के लिए Reserve Bank of India समय-समय पर बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है ताकि रुपये की गिरावट को नियंत्रित किया जा सके।

    शेयर बाजार पर भी असर

    ऊर्जा कीमतों में तेजी और वैश्विक तनाव का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी देखने को मिला है। प्रमुख सूचकांक BSE Sensex और Nifty 50 में गिरावट दर्ज की गई।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में स्थिति स्थिर नहीं होती, तब तक वैश्विक ऊर्जा बाजार और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बनी रह सकती है।

    आगे क्या हो सकता है

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो आने वाले समय में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

    फिलहाल देश के अधिकांश शहरों में ईंधन कीमतें स्थिर हैं, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए बाजार की नजर आने वाले दिनों में तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रम पर बनी हुई है।

     

     

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