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    एलपीजी की कमी का असर देश के कई शहरों में, दिल्ली-मुंबई से बेंगलुरु तक मेनू घटे, लंबी कतारें और बढ़ती कीमतों से लोगों की परेशानी बढ़ी

    1 month ago

    नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण भारत में एलपीजी गैस की आपूर्ति को लेकर चिंता गहराती जा रही है। देश के कई बड़े शहरों—दिल्ली, मुंबई, पुणे, बेंगलुरु और कोलकाता—में गैस की अनियमित आपूर्ति और कीमतों में बढ़ोतरी से आम लोगों के साथ-साथ होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबार प्रभावित हो रहे हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति मार्गों में बाधा आई है, जिससे एलपीजी आयात करने वाले देशों में चिंता बढ़ गई है। भारत भी एलपीजी का बड़ा आयातक है, इसलिए इस स्थिति का असर देश की घरेलू और व्यावसायिक गैस आपूर्ति पर पड़ रहा है।

    दिल्ली में कैंटीनों के मेनू घटने लगे

    राजधानी दिल्ली में कई कॉलेज और विश्वविद्यालयों की कैंटीनों ने गैस की अनिश्चित आपूर्ति के कारण अपने मेनू सीमित करना शुरू कर दिया है।

    दिल्ली स्थित Jawaharlal Nehru University के कैंपस में चलने वाली कुछ कैंटीनों ने स्नैक्स और अन्य खाद्य पदार्थों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। एक कैंटीन संचालक के अनुसार यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो केवल चाय और कुछ सीमित आइटम ही उपलब्ध कराए जा सकेंगे।

    इसी तरह Delhi School of Economics की कैंटीन ने भी अपने मेनू से कई लोकप्रिय व्यंजन अस्थायी रूप से हटा दिए हैं। संचालकों का कहना है कि विश्वविद्यालयों में भोजन की कीमतें तय होती हैं, इसलिए गैस महंगी होने के बावजूद वे कीमतें बढ़ाने में असमर्थ हैं।

    मुंबई में गैस के लिए लंबी कतारें

    मुंबई में स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण दिखाई दे रही है। जिन घरों में केवल एक गैस सिलेंडर होता है, वहां रहने वाले लोगों को रिफिल के लिए लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ रहा है।

    शहर के कई इलाकों में लोग काम से छुट्टी लेकर गैस एजेंसी के बाहर घंटों खड़े रहने को मजबूर हैं। पुराने आवासीय इलाकों और झुग्गी बस्तियों में पाइप्ड नेचुरल गैस की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण लोग पूरी तरह एलपीजी पर निर्भर हैं।

    पुणे में छात्रों पर असर

    पुणे के छात्र क्षेत्रों में भी एलपीजी की कमी का असर दिखाई देने लगा है। कई मेस संचालकों ने बताया कि सिलेंडर मिलना मुश्किल हो गया है और लागत बढ़ने के कारण उन्हें भोजन की कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं।

    कुछ मेस बंद होने की स्थिति में हैं, जिसके कारण कई छात्र अब सस्ते घरेलू मेस या छोटे ढाबों की तलाश कर रहे हैं। कई छात्रों ने बताया कि खर्च कम करने के लिए दो छात्र एक ही टिफिन साझा करने लगे हैं।

    बेंगलुरु में ऑटो चालकों पर बढ़ा बोझ

    बेंगलुरु में ऑटो-रिक्शा चालकों को भी इस संकट का सामना करना पड़ रहा है। शहर में ऑटो एलपीजी की कीमत दो दिनों में लगभग ₹10 प्रति लीटर तक बढ़ गई है, जिससे चालकों की आय पर दबाव बढ़ गया है।

    ईंधन स्टेशनों के कर्मचारियों के अनुसार आपूर्ति में बाधा के कारण सीमित मात्रा में ही एलपीजी उपलब्ध कराई जा रही है।

    इस स्थिति का असर शहर की लोकप्रिय Indira Canteen योजना पर भी पड़ सकता है। यह योजना गरीब और निम्न आय वर्ग के लोगों को कम कीमत पर भोजन उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई थी।

    कोलकाता और अजमेर में वैकल्पिक ईंधन का सहारा

    कोलकाता में कई रेस्टोरेंट और भोजनालयों ने गैस की कमी के कारण अपने मेनू घटा दिए हैं या अस्थायी रूप से बंद होने पर विचार कर रहे हैं। कुछ स्थानों पर लकड़ी से चलने वाले ओवन और पारंपरिक चूल्हों का इस्तेमाल फिर से शुरू किया गया है।

    राजस्थान के अजमेर में भी कई होटल और रेस्टोरेंट कोयला और लकड़ी से खाना बनाने लगे हैं। बढ़ती मांग के कारण इन ईंधनों की कीमतों में भी तेजी देखी जा रही है।

    व्यापारियों के अनुसार कोयले की कीमत लगभग ₹30 प्रति किलोग्राम से बढ़कर ₹35 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है, जबकि लकड़ी की कीमत भी ₹8 से बढ़कर लगभग ₹10 प्रति किलोग्राम हो गई है।

    आगे और बढ़ सकती है चिंता

    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में जारी तनाव लंबा खिंचता है तो एलपीजी आपूर्ति पर दबाव और बढ़ सकता है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं, छोटे कारोबारों और खाद्य सेवा क्षेत्र को अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

    फिलहाल सरकार लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और घबराहट में गैस का अतिरिक्त भंडारण न करने की अपील कर रही है, जबकि ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

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