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    सीपीआई(एम) का आरोप: दिल्ली पुलिस ने एसएफआई नेता ऐशी घोष को गिरफ्तार करने की कोशिश की, पुलिस ने कहा—पुराने मामले में नियमित कार्रवाई

    1 hour ago

    Yugcharan News / 29-07-2026

    नई दिल्ली: छात्र आंदोलनों और हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के बीच राजधानी दिल्ली में एक नया विवाद सामने आया है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई-एम) ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस ने पार्टी मुख्यालय में प्रवेश कर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की संयुक्त सचिव ऐशी घोष को गिरफ्तार करने की कोशिश की। पार्टी का दावा है कि यह कार्रवाई हाल में जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन में उनकी कथित भागीदारी के कारण की गई।

    हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को अलग तरीके से पेश करते हुए स्पष्ट किया है कि यह किसी हालिया विरोध प्रदर्शन से जुड़ा मामला नहीं था। पुलिस के अनुसार, अधिकारी एक पुराने गैर-जमानती मामले में अदालत के निर्देशों के तहत नियमित कानूनी प्रक्रिया के लिए पहुंचे थे। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में बहस को और तेज कर दिया है, जहां विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर दबाव बताने का प्रयास कर रहा है, जबकि पुलिस इसे कानून के अनुसार की गई कार्रवाई बता रही है।

    पार्टी मुख्यालय पहुंची पुलिस, सीपीआई(एम) ने लगाए गंभीर आरोप

    सीपीआई(एम) के अनुसार, मंगलवार को पुलिस का एक दल पार्टी के केंद्रीय कार्यालय ए.के.जी. भवन पहुंचा और ऐशी घोष को हिरासत में लेने का प्रयास किया। पार्टी नेताओं का कहना है कि पुलिस बिना स्पष्ट कानूनी दस्तावेज दिखाए परिसर में प्रवेश करना चाहती थी, जिसका वहां मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विरोध किया।

    पार्टी की ओर से सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी साझा किया गया, जिसमें कुछ नेताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच बहस होती दिखाई देती है। हालांकि वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

    सीपीआई(एम) का आरोप है कि यह कार्रवाई हाल के छात्र आंदोलन और जंतर-मंतर में आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने के कारण की गई, जबकि पुलिस ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है।

    जॉन ब्रिटास ने उठाए सवाल

    राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने दावा किया कि जब पुलिस अधिकारियों से गिरफ्तारी वारंट या संबंधित दस्तावेज दिखाने को कहा गया, तब उन्होंने बताया कि उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों से फोन पर निर्देश मिले हैं।

    ब्रिटास के अनुसार, पुलिस ने यह भी कहा कि संबंधित मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को निर्धारित है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि छात्र आंदोलनों से जुड़े नेताओं पर दबाव बनाया जा रहा है।

    उन्होंने यह भी कहा कि हाल के छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और इस घटना के बीच समानताएं दिखाई देती हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    एम.ए. बेबी ने कहा—लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला

    सीपीआई(एम) के महासचिव एम.ए. बेबी ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए चिंताजनक बताया।

    उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस निजी वाहनों में आई थी और कुछ अधिकारी वर्दी में भी नहीं थे। उनके अनुसार, पार्टी नेताओं द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद पुलिस वहां से लौट गई।

    बेबी ने यह भी दावा किया कि पिछले कुछ समय से ऐशी घोष की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। हालांकि इस संबंध में दिल्ली पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

    पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की प्रतिक्रिया

    केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति रखने वालों के खिलाफ राज्य शक्ति का दुरुपयोग चिंताजनक है।

    उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की असहमति को अपराध की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। विजयन ने लोकतंत्र में संवाद और संवैधानिक मूल्यों के महत्व को रेखांकित किया।

    दिल्ली पुलिस का पक्ष

    दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कार्रवाई किसी हालिया प्रदर्शन या राजनीतिक गतिविधि से संबंधित नहीं थी।

    पुलिस के अनुसार, जांच अधिकारी अदालत के निर्देशों के तहत एक पुराने गैर-जमानती मामले में नियमित प्रक्रिया पूरी करने पहुंचे थे। पुलिस का कहना है कि इसे हाल की घटनाओं से जोड़ना उचित नहीं होगा।

    अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी तथा सभी आवश्यक कदम कानूनी प्रावधानों के तहत उठाए जाएंगे।

    पुराना मामला क्या है?

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह मामला वर्ष 2021 में बंग भवन के बाहर हुए एक विरोध प्रदर्शन से जुड़ा बताया जा रहा है। उसी मामले में न्यायालय की प्रक्रिया के तहत जांच आगे बढ़ रही है।

    हालांकि इस मामले की विस्तृत न्यायिक जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है और अदालत में इसकी सुनवाई जारी है। इसलिए अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

    एआई निगरानी को लेकर भी उठे थे सवाल

    हाल ही में ऐशी घोष ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख करते हुए आरोप लगाया था कि छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों की पहचान करने के लिए दिल्ली पुलिस ने चेहरे की पहचान (फेशियल रिकग्निशन) आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तकनीक का उपयोग किया।

    इस याचिका में निगरानी व्यवस्था और निजता के अधिकार से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए थे। हालांकि इस विषय पर अंतिम न्यायिक निर्णय अभी आना बाकी है।

    तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक सुरक्षा और नागरिकों की निजता के बीच संतुलन बनाए रखना भविष्य की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक होगा।

    छात्र आंदोलन और बढ़ती राजनीतिक बहस

    देश में हाल के छात्र आंदोलनों के बाद कई राजनीतिक दलों ने कानून-व्यवस्था, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पुलिस कार्रवाई को लेकर अलग-अलग राय व्यक्त की है।

    कुछ दलों का कहना है कि छात्रों के लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए, जबकि दूसरी ओर प्रशासन का तर्क है कि किसी भी प्रदर्शन के दौरान कानून और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया और निष्पक्ष जांच सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है ताकि तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट हो सके।

    आगे क्या?

    फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। सीपीआई(एम) अपने आरोपों पर कायम है, जबकि दिल्ली पुलिस इसे अदालत से जुड़े पुराने मामले की नियमित कार्रवाई बता रही है।

    मामले की अगली सुनवाई न्यायालय में निर्धारित है और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक जानकारियों के आधार पर दोनों पक्ष अपने-अपने दावे प्रस्तुत कर रहे हैं।

     

    विश्लेषकों का मानना है कि छात्र आंदोलनों, डिजिटल निगरानी, पुलिस कार्रवाई और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे आने वाले समय में भी राष्ट्रीय राजनीति और सार्वजनिक विमर्श के महत्वपूर्ण विषय बने रहेंगे।

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