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    पांडुलिपि संरक्षण एवं डिजिटलीकरण पर विशेष कार्यशाला संपन्न

    1 month ago

    जयपुर: ज्ञान भारतम् मिशन के तहत पांडुलिपि संरक्षण एवं डिजिटलीकरण पर विशेष कार्यशाला संपन्न

    ​जयपुर। भारतीय प्राचीन ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने की दिशा में जयपुर में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के अंतर्गत झालाना डूंगरी स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी में आयोजित "मैन्युस्क्रिप्ट वर्कशॉप" का सफल समापन हुआ।

    ​युवाओं को मिला आधुनिक और वैज्ञानिक प्रशिक्षण

    ​इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य युवाओं को पांडुलिपियों के संरक्षण, संवर्धन और उनके वैज्ञानिक प्रबंधन से जोड़ना था। क्लस्टर सेंटर ‘विश्वगुरु दीप आश्रम शोध संस्थान’ के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में 30 चयनित प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान पांडुलिपियों के:

    ​सर्वेक्षण और सूचीकरण (Cataloging)

    ​डिजिटलीकरण (Digitization)

    ​प्रिवेंटिव एवं क्यूरेटिव कन्जर्वेशन

    जैसे तकनीकी विषयों पर गहन व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई।

    ​सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण अनिवार्य: डॉ. अनुराधा गोगिया

    ​कार्यशाला का उद्घाटन राजस्थान सरकार की कला एवं संस्कृति विभाग की उप शासन सचिव डॉ. अनुराधा गोगिया द्वारा किया गया। उन्होंने प्रशिक्षण केंद्र का निरीक्षण करते हुए कहा, "भारतीय ज्ञान परंपरा को सुरक्षित रखने के लिए पांडुलिपियों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। ऐसी कार्यशालाएं युवाओं को उनकी जड़ों और समृद्ध इतिहास से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं।"

    ​ऐतिहासिक ग्रंथों पर विशेषज्ञों का मंथन

    ​कार्यशाला में ऐतिहासिक पांडुलिपियों की प्रासंगिकता पर विशेष चर्चा की गई:

    ​अमृत सागर: डॉ. सुरेन्द्र शर्मा ने बताया कि महाराजा सवाई प्रताप सिंह द्वारा रचित यह ग्रंथ आयुर्वेद के त्रिदोष, धातु और रोग-निदान जैसे सिद्धांतों का व्यावहारिक दस्तावेज है।

    ​रामाअश्वमेध यज्ञ: जयपुर की स्थापना और वास्तुशास्त्र के आध्यात्मिक पहलुओं को उजागर करने वाली इस पांडुलिपि के महत्व को भी समझाया गया।

    ​वैज्ञानिक विधियां: अमृतसर से आए विशेषज्ञ श्री अमित राणा ने पांडुलिपियों को कीड़ों और समय की मार से बचाने की आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन किया।

    ​राष्ट्रीय अभियान से जुड़ने का आह्वान

    ​नोडल अधिकारी डॉ. रजनीश हर्ष ने कार्यशाला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश के नवयुवकों की सक्रिय भागीदारी से ही हम अपनी प्राचीन मेधा को भविष्य के लिए सुरक्षित रख पाएंगे। उन्होंने इसे एक राष्ट्रीय जिम्मेदारी बताया।

    ​इस अवसर पर वैदिक हेरिटेज पांडुलिपी शोध संस्थान के डॉ. सुरेन्द्र शर्मा, जय प्रकाश, अवदेश वैध, बाल कृष्ण गोस्वामी और विनय शर्मा सहित कई विद्वान उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी सफल प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

    ​मुख्य बिंदु:

    ​आयोजक: ज्ञान भारतम् मिशन एवं पंडित जवाहरलाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी।

    ​प्रशिक्षण: पांडुलिपि संरक्षण की वैज्ञानिक एवं डिजिटल विधियां।

    ​विशेष आकर्षण: जयपुर के महाराजाओं द्वारा रचित आयुर्वेद एवं वास्तु ग्रंथों का विश्लेषण।

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