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    बजट से कर्मचारियों और युवाओं में निराशा: ओपीएस और टैक्स स्लैब पर चुप्पी ने बढ़ाई चिंता

    3 months ago

    जयपुर। हाल ही में पेश हुए बजट को लेकर कर्मचारी वर्ग और युवाओं के बीच असंतोष के स्वर उभरने लगे हैं। खेल शिक्षक राजेश चौधरी ने बजट पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे आम आदमी और नौकरीपेशा वर्ग की उम्मीदों के विपरीत बताया है। उनके अनुसार, यह बजट न केवल पुरानी पेंशन योजना (OPS) जैसे बुनियादी मुद्दों पर मौन है, बल्कि भविष्य में निजीकरण के खतरों को भी न्योता देता है।

    पेंशन और टैक्स स्लैब: मध्यम वर्ग को नहीं मिली राहत

    बजट विश्लेषण में सबसे बड़ी कमी पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर देखी गई है। राजेश चौधरी का कहना है कि शिक्षक और कर्मचारी लंबे समय से अपनी सामाजिक सुरक्षा के लिए ओपीएस की बहाली या सुदृढ़ीकरण की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन सरकार ने इस पर कोई बात नहीं की।

    इसके साथ ही, आयकर (Income Tax) के स्लैब में कोई बदलाव न होने से वेतनभोगी वर्ग को महंगाई के इस दौर में भारी निराशा हाथ लगी है। टैक्स में रियायत न मिलना मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा।

    रोजगार का अभाव और निजीकरण की चुनौती

    युवाओं के भविष्य को लेकर चिंता जताते हुए राजेश चौधरी ने कहा कि बजट में रोजगार के लिए कोई ठोस रोड मैप दिखाई नहीं देता। सरकारी क्षेत्रों में नई रिक्तियों और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर स्पष्टता की कमी है।

     * निजीकरण का बढ़ता प्रभाव: बजट के प्रावधानों से संकेत मिलता है कि सरकार सार्वजनिक उपक्रमों में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में बढ़ रही है।

     * असुरक्षित भविष्य: निजीकरण के इस रुझान से सरकारी नौकरियों की सुरक्षा कम होगी और युवाओं के लिए करियर के स्थायी विकल्प सीमित हो जाएंगे।

    खेल और शिक्षा जगत की उम्मीदें धराशायी

    एक खेल शिक्षक के नजरिए से राजेश चौधरी ने बताया कि शिक्षा और खेल ढांचे के विकास के लिए जिस बड़े निवेश की आवश्यकता थी, वह बजट के आंकड़ों में कहीं नजर नहीं आता। जब तक युवाओं को शारीरिक और मानसिक विकास के लिए उचित मंच और स्थायी रोजगार की गारंटी नहीं मिलेगी, तब तक देश की प्रगति की नींव कमजोर बनी रहेगी।

    प्रतिक्रिया के मुख्य बिंदु:

     * OPS पर मौन: कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़े सबसे बड़े मुद्दे को नजरअंदाज किया गया।

     * टैक्स की मार: टैक्स स्लैब यथावत रहने से बचत के अवसरों में कमी आएगी।

     * युवा विरोधी दृष्टिकोण: रोजगार सृजन के लिए किसी भी नई नीति या योजना का अभाव।

     * पूंजीवादी झुकाव: सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण की संभावनाओं से आम जन में असुरक्षा का भाव।

     

     

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