Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    “एथिक्स, टेक्नोलॉजी एंड जस्टिस इन अ ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया” विषय पर सेमिनार

    2 hours ago

    12वॉ अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार

    “एथिक्स, टेक्नोलॉजी एंड जस्टिस इन अ ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया”

    “सूरज संस्थान” द्वारा कानोड़िया स्कूल ऑफ लॉ फॉर वीमेन, जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 11 मईको प्रातः 10ः30 बजे राजस्थान प्रौढ़ षिक्षा समिति, जयपुर में 12वें अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन हुआ। सेमिनार का विषय “एथिक्स, टेक्नोलॉजी एंड जस्टिस इन अ ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया” रहा।

    इस अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में शिक्षाविदों, विधि विशेषज्ञों, शोधार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम में आधुनिक भारत में तकनीकी विकास, नैतिक मूल्यों एवं न्याय व्यवस्था के बदलते स्वरूप पर विस्तृत चर्चा हुई। साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल न्याय, साइबर कानून, मानवाधिकार तथा सामाजिक परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

    आयोजकों ने बताया कि सेमिनार का उद्देश्य शिक्षा, तकनीक और न्याय के बीच संतुलन स्थापित करने के साथ-साथ समाज में नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ करना रहा। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न अकादमिक सत्र, व्याख्यान एवं शोध पत्र प्रस्तुतियाँ आयोजित हुईं। सेमिनार में लगभग 70 विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं शोधकर्ताओं की सहभागिता रही।

    कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में स्वागत उद्बोधन एवं कॉन्सेप्ट नोट डॉ. संजुला थानवी, हैड एवं डीन, विधि विभाग, राजस्थान विष्वविद्यालय द्वारा प्रस्तुत किया गया। अनिल थानवी ने सूरज संस्थान की स्थापना व अब तक के सफर व कार्यों के बारे में सभी प्रतिभागियों को अवगत करवाया। इसके पश्चात् डॉ. वर्तिका अरोड़ा, प्राचार्या, कानोड़िया स्कूल ऑफ लॉ फोर वीमेन, जयपुर द्वारा महाविद्यालय के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गई।

    उद्घाटन सत्र में डॉ. इड़ामती व्यास, चेयरमैन, सुरज संस्थान उपस्थित रही। मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. डॉ. वागेश्वरी देषवाल, दिल्ली विष्वविद्यालय ऑनलाईन उपस्थिति रही। उन्होंने कहा कि ए.आई. और डिजिटल लेनदेन आधुनिक स्टार्टअप्स के विकास में महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कोविड काल के तकनीकी विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि तकनीक के साथ कानून और नैतिकता का संतुलित विकास न्याय सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक है।

    मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ. पूजा सक्सेना, फाउण्डर ऑफ ग्लोबल डिजिटल लॉ फर्म, अमिटी लॉ स्कूल, दुबई ने सभी को संबोधित करते हुए बढ़ते साइबर अपराधों पर चिंता जताते हुए कहा कि डिजिटल खतरों से निपटने हेतु विधि विशेषज्ञों को तकनीक और कानून दोनों में दक्ष होना चाहिए। उन्होंने डेटा प्राइवेसी, साइबर फॉरेंसिक व जीडीपीआर पाठ्यक्रमों की जानकारी भी दी।

    सम्मानित अतिथि के रूप में डॉ. रश्मि चतुर्वेदी, निदेषक, कानोड़िया स्कूल ऑफ लॉ फोर वीमेन, जयपुर उपस्थिति रहीं उन्होंने डिजिटल विभाजन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एआई एक प्रभावी साधन है, पर मानव मस्तिष्क से श्रेष्ठ नहीं। उन्होंने तकनीक के संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग पर विशेष बल दिया।

    विशेष अतिथि राजेन्द्र बोड़ा, चेयरमैन, राजस्थान प्रौढ़ षिक्षा समिति, जयपुर ने कहा कि तकनीक ने भारत को जोड़ने के साथ अमीर-गरीब के बीच डिजिटल अंतर भी बढ़ाया है। उन्होंने गांधीजी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि समस्या तकनीक नहीं, बल्कि उसके दुरुपयोग में है; डिजिटल साधनों का उपयोग जनकल्याण हेतु होना चाहिए। उद्घाटन सत्र का समापन सुश्री अनिरुद्धि थानवी द्वारा सभी को धन्यवाद ज्ञापित कर किया गया।

    इसके उपरांत प्रथम तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रो. (डॉ.) पी. पी. मित्रा, डीन, विवेकानन्द ग्लोबल विष्वविद्यालय ने की तथा सह-अध्यक्ष के रूप में डॉ. पूजा सुमन, सहायक आचार्य, केन्द्रीय संस्कृति विष्वविद्यालय, जयपुर उपस्थित रहीं। इस सत्र में सर्वश्रेष्ट वाचन का सम्मान कु. खनक कुमावत को प्रदान किया गया।

    द्वितीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ. दिनेश दायमा, वरिष्ट, सहायक आचार्य, दिल्ली विष्वविद्यालय एवं डॉ. रुचि जोशी, सहायक आचार्य, मनोविज्ञान विभाग, मनिपाल विष्वविद्यालय, जयपुर द्वारा की गई। तृतीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो. मृदुला पुरोहित, डीन, फैकल्टी ऑफ साइन्स, विवेकानन्द ग्लोबल विष्वविद्यालय एवं प्रतिमा सोनी, एसोसिएट डीन, आईसीएफएआई, विष्वविद्यालय, जयपुर द्वारा की गई।

    तकनीकी सत्रों के आयोजन के पश्चात् समापन सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं राष्ट्रीय गीत के साथ हुआ। स्वागत उद्बोधन, डॉ. वर्तिका अरोड़ा द्वारा प्रस्तुत किया गया।

    मुख्य वक्ता डॉ. मिनल बाफना, उपाध्यक्ष, एसीटी एकैडमी, तमिलनाडू ने तकनीक एवं इसके बढ़ते उपयोग पर अपने विचार व्यक्त किए, वहीं विशिष्ट अतिथि डॉ. आराधना परमार, डीन, रिसर्च सैल, महर्षि अरविन्द विष्वविद्यालय, जयपुर ने प्रतिभागियों को संबोधित किया। 12वें अंतरराष्ट्रीय सेमिनार की अंतिम प्रतिवेदन प्रस्तुति अधिवक्ता नवीन तिवाड़ी द्वारा दी गई। समापन सत्र में ओजस थानवी द्वारा सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया गया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरण किए गए एवं राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।

    Click here to Read More
    Previous Article
    “एथिक्स, टेक्नोलॉजी एंड जस्टिस इन अ ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया” पर सेमिनार
    Next Article
    चौपाल सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद का सशक्त माध्यम : कुमावत

    Related शिक्षा Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment