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    नवयुग में खुशियों और हुनर के मंच पर निखरे नन्हे सितारों के सपने

    1 hour ago

    आईएसआर समिट में विशेषज्ञों ने शिक्षा और सामाजिक ज़िम्मेदारी पर की चर्चा

     

    -जेईसीआरसी के ज़रूरत से संवर रहा वंचित बच्चों का भविष्य

     

    जयपुर,

     

    बाल प्रतिभाओं के सपनों को आकार और उनके हौसलों को नया आकाश देते हुए, जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के सोशल आर्म 'अभ्युदय' की पहल 'ज़रूरत' के 12वें संस्करण 'नवयुग' का आयोजन हुआ।

     

    इस दो दिवसीय इवेंट में 'नव-युग ऑन व्हील्स' के तहत बच्चों को आउटिंग पर ले जाया गया जहाँ उन्हें बिड़ला ऑडिटोरियम, अल्बर्ट हॉल म्यूज़ियम और सॉफ्ट प्ले एरिया घुमाया गया। नई चीजें देखने के साथ बच्चों ने फोटोग्राफी और 'क्ले क्राफ्ट', 'हाफ टू होल' (ड्राइंग), 'एक्सटेम्पोर' जैसी एक्टिविटीज़ में अपनी कला का प्रदर्शन किया।

     

    साथ ही, इंस्टिट्यूशनल सोशल रेस्पोंसिबिलिटी (आईएसआर) समिट की राउंड-टेबल कॉन्फ्रेंस में एक्सपर्ट्स ने बच्चों के भविष्य के लिए सामाजिक बदलाव और शिक्षा की रणनीतियों पर चर्चा की।

     

    कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी को कानूनी नियम के साथ-साथ अपना नैतिक कर्तव्य मानते हुए, उद्घाटन समारोह की चीफ़ गेस्ट, सोनल उपाध्याय (वाईस प्रेसिडेंट, एचआर- प्रथम सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड) ने यह संदेश दिया कि समाज का असली विकास तभी मुमकिन है, जब हम युवाओं को सिर्फ साधन ही नहीं बल्कि सही रास्ता भी दिखाएं।

     

    वहीं, पहल सोशल ऑर्गनाइजेशन के फाउंडर व प्रेसीडेंट, मलय कुमार चक्रबर्ती ने स्टूडेंट्स को प्रेरित करते हुए निस्वार्थ सेवा को दुनिया की किसी भी दौलत से बढ़कर बताया। उन्होंने युवाओं से शहर की साफ-सफाई के प्रति जागरूक रहने और दूसरों की मदद करने को अपनी आदत बनाने की अपील की, क्योंकि हमारे यही छोटे-छोटे कदम कल समाज में एक बड़ा बदलाव लाते हैं।

     

    शिक्षा और समाज के बीच का गहरा नाता बताते हुए अर्पित अग्रवाल (वाइस चेयरपर्सन, जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी) ने कहा कि हमारी असली कामयाबी देश को ऐसे जिम्मेदार नागरिक देने में है जो दूसरों के प्रति संवेदनशील हों। उनके अनुसार इंसानियत के काम आना ही सबसे सच्ची शिक्षा है।

     

    इवेंट में धीमांत अग्रवाल (डायरेक्टर, डिजिटल स्ट्रेटेजीज) व ध्रुवी अग्रवाल (डायरेक्टर, पीपल एंड कल्चर) भी शामिल हुए। जिनका लक्ष्य एक ऐसा माहौल बनाना है जहां हर स्टूडेंट अपने प्रोफेशन में माहिर होने के साथ समाज के प्रति भी अपनी जिम्मेदारी बखूबी समझे।

     

    इसी कड़ी में, सपना शर्मा (डीन-आईएसआर) ने बताया कि किस तरह वंचित बच्चों को मंच देकर, ज़रूरत द्वारा उनके कौशल को निखारा जा रहा है, साथ ही गोद लिए गांवों में दी जा रही कानूनी और तकनीकी मदद जमीनी बदलाव ला रही है। 

     

    यूनिवर्सिटी के छात्रों द्वारा संचालित 'ज़रूरत' पिछले एक दशक से अधिक बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि कंप्यूटर, कला, एजुकेशनल ट्रिप्स और त्योहारों की खुशियों के साथ उनके संपूर्ण विकास पर काम कर रही है। 'नवयुग' दरअसल इसी साल भर की मेहनत और टैलेंट का एक खूबसूरत जश्न है, जो इन्हें बिना किसी झिझक के अपनी खूबियां दुनिया के सामने रखने का खुला मंच देता है।

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