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    लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: कांग्रेस के कदम से संसद में सियासी टकराव तेज

    1 month ago

     

    संसद के निचले सदन में लगातार जारी हंगामे और स्थगन के बीच मंगलवार को सियासी माहौल और ज्यादा गरमा गया, जब कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया। कार्यवाही के दौरान भारी शोर-शराबे के चलते लोकसभा को दिन में दो बजे तक स्थगित करना पड़ा, जिससे साफ हो गया कि मौजूदा सत्र में टकराव की स्थिति अभी खत्म होने वाली नहीं है।

     कांग्रेस का आरोप: सदन संचालन में पक्षपात

    इस अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक के. सुरेश और सचेतक जावेद अहमद ने मिलकर लोकसभा सचिवालय के महासचिव को सौंपा। विपक्षी दलों का आरोप है कि सदन की कार्यवाही के दौरान उन्हें बार-बार बोलने से रोका जा रहा है, जबकि सत्तापक्ष को अधिक अवसर दिए जा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि यह स्थिति लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है और इसी वजह से यह असाधारण कदम उठाया गया है।

     हंगामे के बीच अध्यक्ष पर सीधा निशाना

    अविश्वास प्रस्ताव के केंद्र में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला हैं। विपक्ष का तर्क है कि अध्यक्ष का पद निष्पक्षता और संतुलन का प्रतीक होता है, लेकिन हालिया कार्यवाही में वह संतुलन दिखाई नहीं दे रहा। जैसे ही प्रस्ताव का ज़िक्र सदन में हुआ, विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई, जिसके बाद कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा।

    आगे क्या होगा: राजनीतिक संदेश ज़्यादा, गणित कम

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संख्या बल के लिहाज़ से यह अविश्वास प्रस्ताव पारित होना मुश्किल है, लेकिन इसका राजनीतिक महत्व कहीं अधिक है। विपक्ष इस प्रस्ताव के ज़रिये सरकार और सदन संचालन के तरीकों पर सवाल उठाकर दबाव बनाना चाहता है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या यह कदम बातचीत का रास्ता खोलता है या संसद का गतिरोध और गहराता है।

    फिलहाल इतना तय है कि यह अविश्वास प्रस्ताव केवल एक संसदीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि संसद के भीतर चल रहे बड़े सियासी संघर्ष का प्रतीक बन चुका है।

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