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    माइक्रोग्रीन्स पर एक कार्यशाला का आयोजन किया

    1 month ago

    कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर के इंटर्नशिप सेल ने ITRA फाउंडेशन के सहयोग से माइक्रोग्रीन्स पर एक कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सस्टेनेबल शहरी खेती और पोषण के बारे में जागरूकता बढ़ाना था। कार्यशाला का लक्ष्य छात्राओं को कम बजट में माइक्रोग्रीन्स उगाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना और उन्हें शहरी बागवानी एवं ‘सुपरफूड्स’ की अवधारणा से परिचित कराना था। इसके साथ ही, इसका उद्देश्य नेतृत्व कौशल का विकास, महिला उद्यमिता जैविक खाद्य बाजार (Organic Food Market) में संभावित व्यावसायिक अवसरों पर शोध करना भी था। कार्यशाला की शुरुआत धरती माँ की प्रार्थना से हुई। इस कार्यशाला में कुल 45 छात्राओं एवं 15 विभिन्न संकाय शिक्षिकाओं ने भाग लिया। यह कार्यक्रम युवा महिलाओं को कौशलों और सूचनाओं से लैस करने पर केंद्रित था, जो शहरी घरों के सीमित स्थान में ‘सुपरफूड’ उगाने के लिए आवश्यक हैं। ITRA फाउंडेशन के संस्थापक ऋचा सिंघी ने माइक्रोग्रीन्स के अंकुरण और कटाई पर विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया। ITRA फाउंडेशन ने खान-पान उद्योग (Culinary Industry) में जैविक भोजन की बढ़ती मांग पर प्रकाश डाला, ताकि छात्राओं को माइक्रोग्रीन बागवानी को एक व्यवहार्य घरेलू व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। इस वर्कशॉप में छात्राओं ने प्रदर्शन, व्यवहारिकता एवं क्रियाशीलता के जरिए माइक्रोग्रीन की खेती का स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस सीखा, जिसमें बीज चुनना, बोना, रोशनी की जरूरतों का ध्यान रखना और ज्यादा पानी से बचाने वाली ‘मिस्टिंग’ टेक्निक शामिल है। इस ओरिएंटेशन प्रोग्राम के जरिए छात्रों ने व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया और उन्हें ITRA फाउंडेशन के साथ इंटर्नशिप का मौका मिला। महाविद्यालय की प्राचार्य, डॉ. सीमा अग्रवाल ने छात्राओं में आत्मनिर्भरता और पर्यावरणीय चेतना विकसित करने में ऐसी गतिविधियों में भाग लेने के महत्व पर जोर दिया। संस्था ने ITRA फाउंडेशन के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoA) पर भी हस्ताक्षर किए। कार्यक्रम का समापन एक दिलचस्प प्रश्नोत्तरी सत्र के साथ हुआ, जहां प्रतिभागियों ने जैविक खेती की चुनौतियों और इसके भविष्य पर चर्चा की।

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