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    PSLV रॉकेट की बार-बार विफलता से ISRO को झटका, भारत ने फिर गंवाया रणनीतिक उपग्रह

    4 hours ago

    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के भरोसेमंद माने जाने वाले ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) को एक बार फिर गंभीर झटका लगा है। जनवरी 2026 में हुए PSLV-C62 मिशन की असफलता के साथ भारत ने एक और महत्वपूर्ण रणनीतिक उपग्रह खो दिया है। इससे पहले मई 2025 में भी PSLV-C61 मिशन विफल रहा था।

    ISRO प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से जानकारी देते हुए बताया कि रॉकेट का प्रदर्शन तीसरे चरण के अंत तक सामान्य रहा, लेकिन उसी दौरान उड़ान पथ में गड़बड़ी देखी गई, जिसके कारण मिशन को सफलतापूर्वक पूरा नहीं किया जा सका। फिलहाल पूरे डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है।

    तीसरे चरण में तकनीकी गड़बड़ी

    दोनों असफलताओं में एक समानता सामने आई है—PSLV के तीसरे चरण (थर्ड स्टेज) में तकनीकी खराबी। यह चरण ठोस ईंधन (सॉलिड फ्यूल मोटर) पर आधारित होता है। मई 2025 के मिशन में भी इसी चरण में चैम्बर प्रेशर में गिरावट दर्ज की गई थी।

    रणनीतिक उपग्रह EOS-N1 (अन्वेषा) हुआ नष्ट

    PSLV-C62 मिशन के तहत EOS-N1 (अन्वेषा) नामक अत्याधुनिक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह को कक्षा में स्थापित किया जाना था। यह उपग्रह DRDO द्वारा विकसित हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग तकनीक से लैस था, जो सैन्य निगरानी, पर्यावरण विश्लेषण, कृषि, जल गुणवत्ता और छिपे हुए सैन्य ठिकानों की पहचान में अहम भूमिका निभा सकता था।

    इस उपग्रह को लगभग 511 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया जाना था, लेकिन मिशन असफल होने के कारण इसे खो दिया गया।

    15 सह-यात्री उपग्रह भी नष्ट

    मुख्य उपग्रह के अलावा PSLV-C62 में 15 अन्य सह-यात्री उपग्रह भी थे, जिनमें भारत, ब्राज़ील, यूरोप और नेपाल के शैक्षणिक संस्थानों और स्टार्टअप्स के उपग्रह शामिल थे। ये सभी उपग्रह भी मिशन के साथ नष्ट हो गए।

    फेल्योर एनालिसिस रिपोर्ट पर उठे सवाल

    ISRO की परंपरा रही है कि किसी भी असफल मिशन के बाद Failure Analysis Committee (FAC) की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाती है। हालांकि, मई 2025 के PSLV-C61 और जनवरी 2025 के NVS-02 उपग्रह की विफलता से जुड़ी रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई हैं। यह स्थिति ISRO की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रही है, हालांकि बताया गया है कि रिपोर्टें भारत सरकार को सौंपी जा चुकी हैं।

    विश्वसनीयता और गुणवत्ता नियंत्रण पर चिंता

    PSLV जैसे विश्वसनीय प्रक्षेपण यान में लगातार तीसरे चरण की विफलता ने गुणवत्ता नियंत्रण और विश्वसनीयता को लेकर चिंता बढ़ा दी है, खासकर तब जब ISRO विदेशी उपग्रहों के प्रक्षेपण की जिम्मेदारी भी निभाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ISRO को न केवल तकनीकी सुधारों पर ध्यान देना होगा, बल्कि पारदर्शिता के माध्यम से वैश्विक भरोसे को भी मजबूत करना होगा।

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