Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    वचन की शक्ति: जब मेहन्दू ने चुकाया पिता सवाई भोज का कर्ज

    3 months ago

    बिजौरी कांजरी को सौंपे करोड़ों के जेवर

    अजमेर। राजस्थान की वीर प्रसूता धरा पर बगड़ावतों की दानवीरता के किस्से आज भी हवाओं में गूँजते हैं। हाल ही में अजमेर के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में एक ऐसी घटना जीवंत हुई, जिसने यह सिद्ध कर दिया कि क्षत्रिय धर्म में केवल युद्ध जीतना ही नहीं, बल्कि पिता के दिए गए वचनों को निभाना भी सर्वोपरि है। सवाई भोज के पुत्र मेहन्दू ने बिजौरी कांजरी को उसके शरीर के आधे जेवर लौटाकर एक पुरानी अमानत को उसके हकदार तक पहुँचाया।

    बिजौरी की अंतहीन खोज और बगड़ावतों का बलिदान

    संसार भर में अपने करतबों का लोहा मनवा चुकी बिजौरी कांजरी एक ऐसे दानवीर की तलाश में थी जो बगड़ावतों से बड़ा हो। उसकी यात्रा कागरु देश से शुरू होकर बाबा रुपनाथ के आश्रम तक पहुँची। यहाँ उसे ज्ञात हुआ कि 23 बगड़ावत भाई रणभूमि में वीरगति को प्राप्त हो चुके हैं। हताश बिजौरी जब पाटन में तेजाजी से मिली, तो उसे पता चला कि उसकी अमानत (आधा जेवर) सवाई भोज ने अपने बड़े पुत्र मेहन्दू के पास सुरक्षित रखी है, जो वर्तमान में अजमेर के राजा बिसलदेव के राज्य में बटूर के थानेदार हैं।

    बिसलदेव का प्रलोभन और बिजौरी का अडिग स्वाभिमान

    अजमेर पहुँचकर बिजौरी ने ऊँचे आसमान में रस्सी बाँधकर अपने हैरतअंगेज करतब दिखाना शुरू किया। वह सवाई भोज की वीरता के गीत गा रही थी। यह देख राजा बिसलदेव ने उसे हाथियों का जोड़ा और दस गाँवों की जागीर का लालच दिया। बिसलदेव चाहते थे कि बिजौरी सवाई भोज का नाम छोड़कर उनका गुणगान करे।

    लेकिन बिजौरी ने दो टूक शब्दों में कहा—

    > "मैंने पूरी पृथ्वी नाप ली है, पर सवाई भोज जैसा दाता नहीं मिला। मेरे शरीर पर सवा करोड़ के जेवर हैं, यदि तुम इसे ढाई करोड़ कर सको तो ही तुम्हारा नाम लूँगी, अन्यथा मरते दम तक सवाई भोज को नहीं भूलूँगी।"

    तिजोरी की ढाल और पिता की वसीयत

    भैरून्दा के ठाकुर के माध्यम से जब यह बात मेहन्दू तक पहुँची, तो उन्हें अपने पिता के शब्द याद आए। उन्होंने तत्काल तिजोरी की तलाशी ली, जहाँ एक पुरानी ढाल के नीचे रुमाल में बंधी पोटली मिली। उस ढाल पर स्पष्ट लिखा था कि यह जेवर बिजौरी कांजरी की अमानत है। मेहन्दू ने बिना देर किए उस स्थान पर प्रस्थान किया जहाँ बिजौरी करतब दिखा रही थी।

    अमानत की वापसी और प्रतिशोध का संकल्प

    भरे दरबार और जनता के बीच मेहन्दू ने घोषणा की कि वह सवाई भोज का पुत्र है और अपने पिता द्वारा छोड़ी गई अमानत लौटाने आया है। बिजौरी ने जैसे ही वे जेवर पहने, उसका श्रृंगार पूर्ण हुआ और उसने मेहन्दू को आशीर्वाद देते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि वह अपने पिता के बैर (बदले) को पूरा करे। जेवर सौंपकर मेहन्दू वापस अपने थाने बटूर लौट गए, लेकिन इस घटना ने लोकमानस में बगड़ावतों की ईमानदारी और दानशीलता की एक अमिट लकीर खींच दी।

    मुख्य अंश:

     * अमानत: सवा करोड़ के जेवर जो सवाई भोज ने धरोहर के रूप में रखे थे।

     * निर्णय: मेहन्दू ने राजसी सुख के बजाय पिता के वचन को प्राथमिकता दी।

     * स्वाभिमान: बिजौरी ने जागीर के बदले अपने आदर्श को नहीं बेचा।

     

    Click here to Read More
    Previous Article
    जयपुर में 77वें गणतंत्र दिवस का राज्य स्तरीय समारोह आयोजित उत्साह, उमंग और उल्लास से मनाया गया गणतंत्र दिवस
    Next Article
    India, European Union Finalise Long-Awaited Free Trade Agreement

    Related राजस्थान Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment