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    बदलता राजस्थान, बदलते ख्वाब: 12वीं के नतीजों के बाद युवाओं का नया ट्रेंड

    1 hour ago

    बदलता राजस्थान, बदलते ख्वाब: 

    12वीं के नतीजों के बाद युवाओं का नया ट्रेंड

    डॉ. राम भजन कुमावत 

    जयपुर। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा 12वीं का परिणाम घोषित किए जाने के बाद प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों के घरों में कहीं उत्सव तो कहीं आगे की रणनीति को लेकर मंथन का दौर जारी है। इस वर्ष भी कला, विज्ञान और वाणिज्य तीनों ही संकायों में शानदार उत्तीर्ण प्रतिशत रहा है, जिसमें बेटियों ने एक बार फिर बाजी मारी है। लेकिन इस शानदार प्रदर्शन के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि राजस्थान का युवा अब किस दिशा में आगे बढ़ रहा है?

    पारंपरिक ढर्रे को छोड़ इस बार राजस्थान के विद्यार्थियों के रुझान में एक बड़ा और दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है। छात्र अब केवल डिग्री हासिल करने के बजाय करियर और स्किल को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    प्रोफेशनल और जॉब-ओरिएंटेड कोर्सेज की तरफ झुकाव

     

    कोटा, जयपुर, जोधपुर और सीकर जैसे शिक्षा के बड़े केंद्रों से आ रही रिपोर्ट बताती है कि अब छात्र सिर्फ बीए, बीएससी या बीकॉम जैसी सामान्य डिग्रियों के भरोसे नहीं बैठना चाहते। इस बार विद्यार्थियों का सबसे बड़ा रुझान प्रोफेशनल कोर्सेज की तरफ है।

     

    आईटी और टेक क्षेत्र: 

    कंप्यूटर एप्लीकेशन, डेटा एनालिसिस, और एआई से जुड़े कोर्सेज के लिए कॉलेजों में पूछताछ अचानक बढ़ गई है। विज्ञान वर्ग के छात्र इंजीनियरिंग के अलावा अब सीधे टेक-स्किल्स सीखने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

     

    मैनेजमेंट और कॉर्पोरेट: 

    वाणिज्य और कला वर्ग के छात्रों में बीबीए और होटल मैनेजमेंट जैसे कोर्सेज का क्रेज बढ़ा है, ताकि पढ़ाई पूरी होते ही हाथ में रोजगार हो।

     

     सीयूईटी के जरिए देश के टॉप विश्वविद्यालयों पर नजर

     

    राजस्थान के युवाओं में अब स्थानीय कॉलेजों के अलावा देश के शीर्ष विश्वविद्यालयों (जैसे दिल्ली यूनिवर्सिटी, बीएचयू, जेएनयू) में दाखिला पाने की होड़ मची है। 12वीं की परीक्षा खत्म होते ही छात्र सीयूईटी (कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट) की तैयारी में जुट गए थे। खासकर शेखावाटी क्षेत्र (सीकर, झुंझुनू) और मारवाड़ के ग्रामीण इलाकों के मेधावी छात्र अब देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में जाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाना चाहते हैं।

     

    कॉलेज की पढ़ाई के साथ ही 'सरकारी नौकरी' का लक्ष्य

     

    राजस्थान में सरकारी नौकरी (सिविल सर्विसेज, प्रशासनिक सेवाएं और बैंकिंग) के प्रति दीवानगी जगजाहिर है। इस बार का ट्रेंड दिखाता है कि छात्र स्नातक की पढ़ाई को एक 'सपोर्ट सिस्टम' की तरह देख रहे हैं। कला वर्ग में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन रहने का एक बड़ा कारण यह भी है कि छात्र आरएएस, आईएएस या शिक्षक भर्ती परीक्षाओं को ध्यान में रखकर ही 11वीं-12वीं में ह्यूमेनिटीज चुनते हैं। अब परिणाम आते ही छात्र कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ इन प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग या ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म्स से जुड़कर तैयारी में जुट गए हैं।

     

    बेटियों की उड़ान: आत्मनिर्भर बनने की नई जिद

     

    इस साल के नतीजों में भी छात्राओं का पास प्रतिशत छात्रों से काफी बेहतर रहा है। यह बदलाव केवल मार्कशीट तक सीमित नहीं है। गांवों और कस्बों की लड़कियां अब केवल घर के पास के महिला कॉलेजों से प्राइवेट पढ़ाई करने तक सीमित नहीं हैं; वे नर्सिंग, क्लैट ( लॉ एंट्रेंस), डिजिटल मार्केटिंग और डिफेंस सर्विसेज (जैसे पुलिस और सेना भर्ती) में करियर बनाने के लिए घरों से बाहर निकल रही हैं।

     

    छात्र अब सिर्फ डिग्री धारक नहीं, बल्कि 'करियर ओरिएंटेड' बनना चाहते हैं

     

    राजस्थान में 12वीं के बाद का यह नया परिदृश्य साफ करता है कि आज का छात्र अब सिर्फ डिग्री धारक नहीं, बल्कि 'करियर ओरिएंटेड' और 'स्किलफुल' बनना चाहता है। युवाओं का यह बदला हुआ रुख आने वाले समय में राजस्थान को देश के सबसे बड़े 'ह्यूमन रिसोर्स हब' के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक मजबूत कदम है।

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