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    एआई के युग में अपनी 'ह्यूमन वॉइस' और मौलिक सोच को बनाए रखें सुरक्षित- वंडर ऑफ़ वर्ड्स, जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी

    3 months ago

    -'वोमिट ड्राफ्ट' और 'डेडलाइन' का मंत्र: अर्श वोरा ने सिखाया मेसी किरदारों से कहानी की असलियत बुनने का हुनर- वाओ 

     

    -स्वाइप-अप कल्चर के बीच प्रेम की रूहानी सादगी और '7-सीज़' के सामंजस्य से पर्सनल एक्सीलेंस का मार्ग- वाओ, जेईसीआरसी

     

    -'हर घर ऑथर- हर शहर नालंदा': राइटिंग को पैशन के साथ सामूहिक जिम्मेदारी बनाने पर ज़ोर- जेईसीआरसी 

     

    -ईश्वर के साथ संबंध, एक संवाद है- वंडर ऑफ़ वर्ड्स, जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी

     

    जयपुर,

     

    जब कल्पनाएँ हकीकत का हाथ थामती हैं, तो जन्म होता है एक ऐसी वैचारिक क्रांति का जो कागज़ की सीमाओं को तोड़कर व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाती है। साहित्योत्सव की लकीरों को छूते हुए जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी में 'वंडर ऑफ वर्ड्स (वाओ)' के 13वें एडिशन ने यंग माइंड्स के लिए क्रिएटिव लॉन्चपैड तैयार किया, जहाँ उन्होंने कंटेंट को सिर्फ 'कंज़्यूम' करना ही नहीं, उसे एक ग्लोबल 'इम्पैक्ट' के साथ 'क्रिएट' करना सीखा।

     

    लेखन की बारीकियों पर चर्चा करते हुए, धुरंधर, मिसमैच्ड, आर्टिकल 370 जैसे शोज़ के क्रिएटिव प्रोड्यूसर व राइटर अर्श वोरा ने बताया कि रचनात्मकता के लिए 'डेडलाइन' सबसे बड़ा ईंधन है। उन्होंने उभरते लेखकों को 'वोमिट ड्राफ़्ट' का सुझाव दिया, जिसका अर्थ कंप्लीशन और फ़ुलनेस की चिंता किए बिना विचारों को कागज़ पर उतारना है। कहानी की प्रामाणिकता को एंफ़साइज़ करते हुए उन्होंने बताया कि कैरेक्टर्स और उनके रिश्तों को वास्तविक और 'मेसी' रहने देना चाहिए, क्योंकि जीवन की यही जटिलताएँ कहानी को दर्शकों के लिए भरोसेमंद बनाती हैं। उनके अनुसार, एक सफल प्रोजेक्ट केवल लेखक का नहीं बल्कि पूरी टीम का शेयर्ड विज़न होता है, जिसका उद्देश्य '3ई'- एंटरटेन, एनलाइटन, और एम्पावर होना चाहिए।

     

    'सती सीरीज़' के माध्यम से माइथोलॉजिकल स्टोरीज़ को नई दृष्टि देने वाली लेखिका कोरल दासगुप्ता ने फ़ेमिनिटी लीडरशिप को केवल जेंडर नहीं, बल्कि केअर और सिम्पैथी का गुण बताया, जहाँ वास्तविक शक्ति "अपनी जिम्मेदारी स्वीकारने" और "समय पर साथ खड़े होने" में निहित है। कोरल के अनुसार, ईश्वर कोई दंड देने वाली सत्ता नहीं बल्कि एक निरंतर कोन्वर्ज़ेशन है। वहीं, पैट्रिआर्की को जकड़न बताते हुए, कमियों को स्वीकारने की सलाह दी।

     

    इसी क्रम में, कॉर्पोरेट करियर से बेस्टसेलिंग ऑथर तक का सफ़र तय करने वाली स्वेता समोटा ने राइटिंग को सिर्फ एक पैशन नहीं, बल्कि एक कलैक्टिव रेस्पोंसिबिलिटी बताया, जो 'हर घर ऑथर- हर शहर नालंदा' के विज़न को सच कर सकती है। अपने "लिखेगा इंडिया" मिशन के ज़रिए उन्होंने यूथ को राइटर्स ब्लॉक जैसे ओवरथिंकिंग बैरियर्स तोड़कर 'बिना किसी फ़िल्टर' के लिखने का मंत्र दिया।और आज के डिजिटल दौर में सेल्फ़-पब्लिशिंग को असली आज़ादी बताते हुए, एआई को महज़ एक स्मार्ट टूल की तरह इस्तेमाल करने और अपनी मौलिक ह्युमन वॉइस को बरकरार रखने को कहा।

     

    आज के 'स्वाइप-अप' कल्चर के दौर में पुराने समय के प्रेम की रूहानी सादगी, ठहराव और निडरता को खूबसूरती से रेखांकित करते हुए, 'मुसाफिर कैफ़े' जैसी बेस्ट-सेलर के लेखक दिव्य प्रकाश दुबे ने प्रेम को एक विषय ना मानते हुए, जीवन जीने का आत्मीय सलीका बताया। वहीं, एक्स-आईएएस व बेस्टसेलिंग ऑथर, विवेक आत्रेय ने 7 सीज़ (करेज, कॉल्मनेस, क्रिएटिविटी, कम्पैशन, चीयरफ़ुलनेस, कंटेंटमेंट, कम्यूनिकेशन) के सामंजस्य को पर्सनल एक्सीलेंस का आधार बताते हुए बॉडी, माइंड और सोल को संतुलित करने पर बल दिया। और एनडीटीवी इंडिया के सीनियर एडिटर और लेखक प्रियदर्शन पराग ने अपनी किताब 'जो हिंदुस्तान हम बना रहे हैं' के ज़रिए ट्रेडिशन और मॉर्डनिटी के बीच, बैलेंस पर ज़ोर देते हुए, लेखन को एक्सप्रेशन ही नहीं, बल्कि गहरी समझ और रीयल ऑब्जर्वेशन का आईना बताया।

     

    जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के वाइस चेयरपर्सन अर्पित अग्रवाल ने वाओ के मंच से युवाओं को महज़ 'स्क्रीन कंज़्यूमर' बनने के बजाय विचारों का सृजनकर्ता बनने के लिए प्रेरित किया। डिजिटल युग में 'रील्स' और 'रीडिंग' के बीच संतुलन की अहमियत बताते हुए, 50 लोगों से शुरू हुए इस सफ़र को आज हज़ारों युवाओं का एक सशक्त 'इंटेलेक्चुअल मूवमेंट' बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि लेखन ही वह माध्यम है, जो राजस्थान के युवा रचनाकारों को विश्व पटल तक पहुँचाने की क्षमता रखता है। जो पढ़ता है, सोचता है और लिखता है- वही भविष्य का नैरेटिव गढ़ता है।

     

    एक ग्लोबल कैनवास प्रदान करते हुए, फ़ेस्ट में बुक स्टॉल्स और ऑथर मीट-अप्स के साथ विदेशी भाषाओं की प्रस्तुतियों ने आयोजन को वैश्विक आयाम दिया। व स्टोरी स्लैम कॉम्पीटिशन में उभरते रचनाकारों की मौलिकता को सम्मानित किया गया।

     

    वंडर ऑफ़ वर्डस- जेईसीआरसी ने यह सिद्ध किया कि शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं, बल्कि संवेदनशील और विचारशील नागरिक गढ़ने की प्रक्रिया है। नियमित कोर्सेज़ के साथ लिटरेरी रिचुअल्स का यह संगम राजस्थान की युवा पीढ़ी को न केवल सृजनशील बना रहा, बल्कि उन्हें वैश्विक मंच पर अपनी पहचान स्थापित करने का आत्मविश्वास भी दे रहा है।

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