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    गुलामों की मंडी बन चुकी है सत्ता : नगर प्रमुख की कुर्सी की लड़ाई में राज ठाकरे का तीखा राजनीतिक विस्फोट

    6 hours ago

    महाराष्ट्र की राजनीति में कभी-कभी कोई एक वाक्य पूरे तंत्र की सच्चाई सामने रख देता है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे का यह बयान महाराष्ट्र की राजनीति अब गुलामों की मंडी बन गई है ऐसा ही एक वाक्य है।
    यह केवल नाराज़गी नहीं, बल्कि उस राजनीतिक सड़ांध की ओर इशारा है, जो हाल के नगर निकाय चुनावों के बाद खुलकर दिखाई दे रही है।यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब राज्य की राजनीति पदों की सौदेबाज़ी, जोड़-तोड़ और समर्थन के खेल में उलझ चुकी है।

    भावनाओं के मंच से सत्ता पर सीधा वार: जन्मशती समारोह बना राजनीति का आईना

    राज ठाकरे यह बयान शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे की जन्मशती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में दे रहे थे।
    मंच स्मृति और सम्मान का था, लेकिन शब्द पूरी तरह राजनीतिक थे।

    उन्होंने साफ कहा कि कल्याण डोंबिवली में जो कुछ हुआ, वह बेहद शर्मनाक है और यह सोचने पर मजबूर करता है कि महाराष्ट्र की राजनीति किस दिशा में बढ़ रही है।

    कभी लचीलापन ज़रूरी होता है: लेकिन सवाल नीयत पर आकर टिकता है

    राज ठाकरे ने यह भी स्वीकार किया कि राजनीति में हर समय कठोर रुख अपनाना संभव नहीं होता और कई बार परिस्थितियों के अनुसार लचीलापन दिखाना पड़ता है।
    लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लचीलापन और आत्मसमर्पण के बीच की रेखा बहुत पतली होती है, और कल्याण–डोंबिवली की राजनीति उस रेखा को पार करती हुई दिखाई दी।

    कल्याण डोंबिवली की जंग: जब कुर्सी ने रिश्तों की परीक्षा ले ली

    कल्याण डोंबिवली नगर पालिका इस समय सत्ता संघर्ष का केंद्र बनी हुई है। बहुमत का आँकड़ा बासठ है और उसे हासिल करने के लिए हर दल पूरी ताक़त लगा रहा है।

    इसी संघर्ष के बीच महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने ऐसा कदम उठाया, जिसने पूरे राजनीतिक समीकरण को उलट-पलट कर रख दिया।
    पार्टी ने वहाँ एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को समर्थन दे दिया।

    यह वही शिवसेना है, जो लंबे समय तक उद्धव ठाकरे की सबसे बड़ी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रही है।

    अप्रत्याशित मोड़: विरोधियों को समर्थन, अपने ही खेमे में बेचैनी

    महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का यह फैसला कई स्तरों पर असहज करने वाला रहा।
    एक ओर ठाकरे परिवार का हालिया मेल-मिलाप, दूसरी ओर सत्ता की मजबूरी इन दोनों के टकराव ने राजनीति को और उलझा दिया।

    पार्टी का कहना है कि यह निर्णय कल्याण की स्थानीय इकाई ने लिया, लेकिन राजनीति में ऐसे “स्थानीय फैसले” अक्सर बड़े संकेतों की परछाईं होते हैं।

    यह स्थानीय निर्णय था: लेकिन घटनाक्रम कुछ और संकेत देता है

    महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता राजू पाटिल को शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे के साथ बातचीत करते देखा गया। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज़ हो गईं।

    सूत्रों के अनुसार, इस घटनाक्रम से उद्धव ठाकरे काफ़ी नाराज़ थे। यहां तक चर्चा होने लगी कि राज ठाकरे शायद शिवसेना (उद्धव गुट) के कार्यक्रम में शामिल न हों।

    अटकलों के बीच मंच पर पहुँचे राज ठाकरे: संतुलित लेकिन सशक्त संदेश

    लेकिन राजनीति में मौजूदगी अपने-आप में एक बयान होती है।
    सारी चर्चाओं के बीच राज ठाकरे मुंबई के शानमुखानंद सभागृह पहुँचे और उस कार्यक्रम में शामिल हुए, जिसे उद्धव ठाकरे की पार्टी ने बाल ठाकरे की जन्मशती की शुरुआत के लिए आयोजित किया था।

    यह उपस्थिति अपने-आप में संदेश थीमतभेद हो सकते हैं, लेकिन विरासत और मराठी अस्मिता की राजनीति उससे ऊपर है।

    बीस वर्षों की दूरी और फिर साथ आने की कोशिश

    राज ठाकरे ने मंच से यह भी कहा कि शिवसेना छोड़कर अपनी अलग राह चुनना आसान नहीं था।
    उन्होंने माना कि बीते बीस वर्षों में उन्होंने भी बहुत कुछ सीखा और उद्धव ठाकरे ने भी।

    दो दशकों की दूरी के बाद ठाकरे परिवार का साथ आना और फिर महानगरपालिका चुनाव साथ लड़ना महाराष्ट्र की राजनीति में भावनात्मक रूप से बड़ा क्षण था।
    हालांकि सत्ता हाथ नहीं लगी, लेकिन मराठी बहुल इलाक़ों में इस गठबंधन को ज़ोरदार समर्थन मिला।

    सत्ता बनाम सिद्धांत: महाराष्ट्र की राजनीति किस मोड़ पर खड़ी है?

    राज ठाकरे का “गुलामों की मंडी” वाला बयान दरअसल एक गहरा सवाल है क्या आज की राजनीति में विचारधारा की कोई जगह बची है, या सब कुछ केवल सत्ता के अंकगणित तक सिमट गया है?
    कल्याण–डोंबिवली की लड़ाई सिर्फ़ नगर प्रमुख की कुर्सी की नहीं है।


    यह उस बदलती राजनीति की तस्वीर है, जहाँ आज का विरोधी कल का सहयोगी बन जाता है और भरोसा सबसे सस्ती चीज़ बनकर रह जाता है।महाराष्ट्र की राजनीति इस समय ऐसे चौराहे पर खड़ी है, जहाँ हर चाल सत्ता तय कर सकती है लेकिन हर चाल जनता के विश्वास को थोड़ा और कमज़ोर भी कर रही है।

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