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    कनाडा–अमेरिका संबंधों में बढ़ा तनाव, डावोस में कार्नी और ट्रंप के बीच तीखी बयानबाज़ी

    11 hours ago

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच कूटनीतिक तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। यह विवाद विश्व आर्थिक मंच (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) की बैठक के दौरान डावोस में दिए गए बयानों और अमेरिका द्वारा प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ पहल को लेकर और गहरा गया है। दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक रूप से हुई बयानबाज़ी ने उत्तर अमेरिकी सहयोगियों के रिश्तों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दिया है।

    ‘बोर्ड ऑफ पीस’ से शुरू हुआ विवाद

    जानकारी के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को एक अंतरराष्ट्रीय पहल ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का निमंत्रण दिया था। इस बोर्ड का उद्देश्य संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों, विशेष रूप से गाजा, के पुनर्निर्माण से जुड़े प्रयासों की निगरानी करना बताया गया। कार्नी ने शुरुआत में इस निमंत्रण को स्वीकार कर लिया था।

    हालांकि, बाद में कनाडा सरकार के सूत्रों के हवाले से यह बात सामने आई कि ओटावा इस बोर्ड में शामिल होने के लिए किसी प्रकार का शुल्क या आर्थिक योगदान देने के पक्ष में नहीं है। इसी मुद्दे पर दोनों देशों के बीच मतभेद उभर आए। इसके कुछ ही समय बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कनाडा को भेजा गया यह निमंत्रण वापस ले लिया।

    ट्रंप की टिप्पणी और कार्नी की प्रतिक्रिया

    निमंत्रण वापस लेने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से यह टिप्पणी की कि “कनाडा अमेरिका की वजह से ही अस्तित्व में है” और कनाडाई नेतृत्व को अपने बयानों में सावधानी बरतने की सलाह दी। इस बयान को कनाडा में तीखी प्रतिक्रिया मिली।

    प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ट्रंप की टिप्पणी का जवाब देते हुए स्पष्ट कहा कि कनाडा और अमेरिका के बीच लंबे समय से मजबूत आर्थिक, सुरक्षा और सांस्कृतिक साझेदारी रही है, लेकिन कनाडा की पहचान और प्रगति उसकी अपनी ताकत से है। उन्होंने कहा कि कनाडा किसी अन्य देश पर निर्भर होकर नहीं, बल्कि अपने मूल्यों और नीतियों के दम पर आगे बढ़ा है।

    डावोस में कार्नी का सख्त संदेश

    डावोस में विश्व आर्थिक मंच के दौरान अपने संबोधन में प्रधानमंत्री कार्नी ने वैश्विक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय प्रणाली को अब “नियम आधारित व्यवस्था” कहकर पेश करना वास्तविकता से दूर है। उनके अनुसार, कई शक्तिशाली देश आर्थिक एकीकरण और व्यापारिक संबंधों का उपयोग दबाव बनाने और अपने हित साधने के लिए कर रहे हैं।

    कार्नी ने यह भी कहा कि टैरिफ और आर्थिक प्रतिबंध अब नीति के साधन बनते जा रहे हैं, जिससे मध्यम और छोटे देशों के लिए चुनौतियां बढ़ रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि मध्यम शक्तियों को मिलकर काम करना होगा, क्योंकि यदि वे निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनेंगी, तो उन पर फैसले थोपे जाएंगे।

    अमेरिका का आधिकारिक रुख

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ से कनाडा का निमंत्रण वापस लेने की घोषणा एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए की। उन्होंने लिखा कि यह बोर्ड अब तक का सबसे प्रतिष्ठित वैश्विक मंच होगा और कनाडा को इसमें शामिल न किए जाने का फैसला अंतिम है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन की ओर से इस फैसले के पीछे विस्तृत कारणों पर कोई औपचारिक बयान नहीं दिया गया।

    अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और संभावित असर

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल एक बोर्ड या बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक राजनीति में बदलते संतुलन को भी दर्शाता है। अमेरिका और कनाडा के बीच लंबे समय से मजबूत सहयोग रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में व्यापार, सुरक्षा और विदेश नीति के मुद्दों पर मतभेद सामने आते रहे हैं।

    डावोस में कार्नी के भाषण को कई अन्य देशों के प्रतिनिधियों ने भी ध्यान से सुना, खासकर उन देशों ने जो खुद को ‘मिडिल पावर’ मानते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान उन देशों की चिंता को आवाज देता है, जो वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अपनी भूमिका बनाए रखना चाहते हैं।

    आगे क्या?

    फिलहाल दोनों देशों की सरकारों ने तनाव कम करने को लेकर कोई ठोस संकेत नहीं दिए हैं। हालांकि कूटनीतिक हलकों में यह उम्मीद जताई जा रही है कि पर्दे के पीछे संवाद जारी रहेगा, क्योंकि अमेरिका और कनाडा के रिश्ते केवल राजनीतिक नहीं बल्कि आर्थिक और सामरिक दृष्टि से भी एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।

    इस घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि वैश्विक मंचों पर दिए गए बयान अब केवल औपचारिक नहीं रह गए हैं, बल्कि वे सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय रिश्तों की दिशा तय कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह बयानबाज़ी अस्थायी तनाव बनकर रह जाती है या दोनों देशों के संबंधों में कोई स्थायी बदलाव लाती है।

     
     
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