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    प्रधानमंत्री मोदी के तमिलनाडु दौरे से पहले मुख्यमंत्री स्टालिन ने लंबित मंज़ूरियों और केंद्र से बकाया धन का मुद्दा उठाया

    13 hours ago

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शुक्रवार को तमिलनाडु दौरे और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की रैली में शामिल होने से पहले राज्य की राजनीति गरमा गई है। मुख्यमंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने केंद्र सरकार पर तमिलनाडु से जुड़े कई अहम प्रस्तावों और वित्तीय मामलों को लंबित रखने का आरोप लगाते हुए सार्वजनिक रूप से सवाल खड़े किए हैं।

    प्रधानमंत्री के राज्य आगमन से ठीक पहले सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक संदेश में मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु से संबंधित कई मंज़ूरियां और धनराशि लंबे समय से केंद्र के पास अटकी हुई हैं, जिससे राज्य की विकास योजनाओं पर असर पड़ रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि केंद्र सरकार के वरिष्ठ नेता अक्सर चुनाव के समय ही तमिलनाडु की ओर रुख करते हैं।

    लंबित मामलों को लेकर राज्य सरकार की नाराज़गी

    मुख्यमंत्री स्टालिन ने अपने संदेश में किसी एक परियोजना का नाम नहीं लिया, लेकिन यह स्पष्ट किया कि बुनियादी ढांचे, कल्याणकारी योजनाओं और वित्तीय हिस्सेदारी से जुड़े कई प्रस्ताव अब भी केंद्रीय मंज़ूरी की प्रतीक्षा में हैं। उनका कहना था कि ये मुद्दे केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सीधे तौर पर आम जनता के हितों से जुड़े हुए हैं।

    “तमिलनाडु के लोगों को यह जानने का अधिकार है कि राज्य के विकास से जुड़े प्रस्ताव और धनराशि क्यों अटकी हुई है,” मुख्यमंत्री ने कहा। उन्होंने यह भी दोहराया कि राज्य सरकार संविधान के दायरे में रहते हुए केंद्र के समक्ष अपने अधिकारों और मांगों को लगातार उठाती रहेगी।

    डीएमके नेताओं का कहना है कि राज्य सरकार ने कई बार औपचारिक पत्रों और बैठकों के माध्यम से केंद्र को इन लंबित मामलों की याद दिलाई है, लेकिन अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है। पार्टी का आरोप है कि गैर-एनडीए शासित राज्यों के साथ भेदभाव किया जा रहा है, हालांकि केंद्र सरकार इस आरोप को पहले भी खारिज कर चुकी है।

    प्रधानमंत्री की रैली और एनडीए की रणनीति

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक संदेश में बताया कि वह तमिलनाडु के माधुरंथकम में एनडीए नेताओं के साथ एक जनसभा को संबोधित करेंगे। अपने बयान में प्रधानमंत्री ने डीएमके सरकार पर भ्रष्टाचार और कुप्रशासन के आरोप लगाए और दावा किया कि राज्य की जनता बदलाव चाहती है।

    यह रैली तमिलनाडु में एनडीए की राजनीतिक मौजूदगी को मज़बूत करने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। भाजपा और उसके सहयोगी दलों के वरिष्ठ नेता इस मंच से राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने और अपनी विकास योजनाओं को सामने रखने की कोशिश करेंगे।

    तमिलनाडु की राजनीति और केंद्र-राज्य संबंध

    तमिलनाडु की राजनीति में केंद्र-राज्य संबंध हमेशा से एक अहम मुद्दा रहे हैं। डीएमके और अन्य क्षेत्रीय दल लंबे समय से राज्यों के अधिकार, वित्तीय स्वायत्तता और संघीय ढांचे को लेकर अपनी आवाज़ उठाते रहे हैं।

    डीएमके का तर्क है कि तमिलनाडु देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देता है, इसलिए उसे केंद्र से समय पर धन और परियोजनाओं की मंज़ूरी मिलनी चाहिए। पार्टी यह भी कहती है कि भाषा नीति, शिक्षा और प्रशासनिक अधिकारों जैसे मुद्दों पर भी राज्य की अनदेखी की जाती रही है।

    वहीं केंद्र सरकार का पक्ष यह रहा है कि धन और मंज़ूरियां तय नियमों और प्रक्रियाओं के तहत दी जाती हैं और इसमें किसी भी प्रकार का राजनीतिक भेदभाव नहीं किया जाता। केंद्रीय मंत्रियों का कहना है कि यदि राज्य सरकारें आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करती हैं, तो परियोजनाओं को मंज़ूरी देने में कोई देरी नहीं होती।

    चुनावी माहौल में तेज़ होता राजनीतिक टकराव

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री स्टालिन और प्रधानमंत्री मोदी के बीच यह सार्वजनिक बयानबाज़ी आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र देखी जानी चाहिए। जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आ रहे हैं, राजनीतिक दल अपने-अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

    डीएमके के लिए केंद्र से लंबित मामलों को उठाना राज्य के हितों के रक्षक के रूप में खुद को स्थापित करने का एक तरीका है। वहीं एनडीए तमिलनाडु में विकास और “डबल इंजन सरकार” के नारे के ज़रिए मतदाताओं को आकर्षित करने का प्रयास कर रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह टकराव केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि भारत के संघीय ढांचे से जुड़े बड़े सवालों को भी उजागर करता है। वित्तीय बंटवारे, परियोजनाओं की मंज़ूरी और राज्यों की स्वायत्तता जैसे मुद्दे आने वाले समय में राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रहेंगे।

    आगे की राह

    प्रधानमंत्री के दौरे और एनडीए रैली के बाद तमिलनाडु की राजनीति में और बयानबाज़ी तेज़ होने की संभावना है। यह देखना अहम होगा कि क्या केंद्र सरकार राज्य द्वारा उठाए गए लंबित मामलों पर कोई ठोस कदम उठाती है या नहीं।

     

    फिलहाल, प्रधानमंत्री मोदी का दौरा और मुख्यमंत्री स्टालिन की प्रतिक्रिया यह साफ़ करती है कि तमिलनाडु में राजनीतिक मुकाबला तेज़ हो चुका है। चुनावी माहौल में विकास, केंद्र-राज्य संबंध और वित्तीय अधिकार जैसे मुद्दे आने वाले दिनों में जनता के बीच अहम चर्चा का विषय बने रहेंगे।

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