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    इंट्राडे कारोबार में डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर 91.99 पर पहुंचा

    13 hours ago

    शुक्रवार को विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इंट्राडे कारोबार के दौरान अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। दिन के कारोबार में रुपया 41 पैसे टूटकर 91.99 प्रति डॉलर तक फिसल गया। लगातार विदेशी पूंजी निकासी, वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता और कमजोर निवेश धारणा के चलते घरेलू मुद्रा पर दबाव बना हुआ है।

    विदेशी मुद्रा बाजार से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की ओर से बाजार में हस्तक्षेप से अत्यधिक उतार-चढ़ाव को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा रहा है, लेकिन इससे रुपये की समग्र कमजोर प्रवृत्ति में फिलहाल कोई ठोस बदलाव नहीं आ पाया है। बाजार सहभागियों के अनुसार, जब तक वैश्विक परिस्थितियों में स्थिरता नहीं आती और प्रमुख व्यापारिक मुद्दों पर स्पष्टता नहीं बनती, तब तक रुपये की स्थिति संवेदनशील बनी रह सकती है।

    दिन की शुरुआत मजबूत, फिर तेज गिरावट

    इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 91.45 के स्तर पर खुला था। शुरुआती कारोबार में इसमें थोड़ी मजबूती देखने को मिली और यह 91.41 तक पहुंच गया। हालांकि, यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं सकी और कुछ ही समय में बिकवाली का दबाव बढ़ गया। इसके बाद रुपया तेजी से कमजोर होता चला गया और 91.99 के स्तर पर पहुंचकर नया रिकॉर्ड निचला स्तर बना लिया।

    गौरतलब है कि एक दिन पहले गुरुवार को रुपया अपने सर्वकालिक निचले स्तर से कुछ संभलता दिखा था और कारोबार के अंत में 7 पैसे की मजबूती के साथ 91.58 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। हालांकि, यह राहत अल्पकालिक साबित हुई।

    विदेशी पूंजी निकासी और वैश्विक कारक जिम्मेदार

    विश्लेषकों के अनुसार, रुपये की कमजोरी के पीछे कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारण हैं। वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव, प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ता रुझान उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव डाल रहा है।

    इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की ओर से भारतीय शेयर बाजार से लगातार पूंजी निकाली जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 2,500 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की। इससे न केवल शेयर बाजार में गिरावट आई, बल्कि रुपये पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ा।

    डॉलर मजबूत, कच्चा तेल महंगा

    वैश्विक बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती भी रुपये की कमजोरी का एक अहम कारण मानी जा रही है। डॉलर सूचकांक, जो छह प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति को दर्शाता है, शुक्रवार को हल्की बढ़त के साथ 98 के स्तर से ऊपर बना रहा। मजबूत डॉलर का असर आमतौर पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर नकारात्मक पड़ता है।

    वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई। ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 64 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार करता नजर आया। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए महंगा कच्चा तेल व्यापार घाटे को बढ़ा सकता है, जिसका सीधा असर रुपये पर पड़ता है।

    शेयर बाजार में भी दबाव

    घरेलू शेयर बाजार में भी शुक्रवार को कमजोरी देखने को मिली। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक संकेतों के असर से बाजार में बिकवाली का माहौल बना रहा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक विदेशी निवेशकों का भरोसा पूरी तरह वापस नहीं आता, तब तक शेयर बाजार और मुद्रा बाजार दोनों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

    आगे क्या रह सकता है रुख

    विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों का कहना है कि रुपये की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। अमेरिका और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की मौद्रिक नीति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े फैसले और भू-राजनीतिक हालात आने वाले दिनों में अहम भूमिका निभाएंगे।

    इसके साथ ही, देश के भीतर आर्थिक संकेतक, चालू खाता घाटा, महंगाई की स्थिति और केंद्रीय बैंक की नीतिगत रणनीति भी रुपये की चाल को प्रभावित करेंगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि वैश्विक माहौल में स्थिरता आती है और विदेशी निवेश का प्रवाह दोबारा शुरू होता है, तो रुपये को कुछ राहत मिल सकती है। फिलहाल, अल्पावधि में मुद्रा बाजार में अस्थिरता बने रहने की संभावना जताई जा रही है।

    कुल मिलाकर, शुक्रवार का कारोबार रुपये के लिए चुनौतीपूर्ण रहा और यह संकेत देता है कि घरेलू मुद्रा को निकट भविष्य में कई बाहरी और आंतरिक दबावों का सामना करना पड़ सकता है।

     
     
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