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    केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री  ने बाल विवाह मुक्त भारत के संकल्प को साकार करने के लिए गुरुवार को दिल्ली से 100 दिनों के विशेष अभियान का  किया शुभारम्भ

    5 months ago

    जयपुर। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने विज्ञान भवन, नई दिल्ली से गुरुवार को बाल विवाह मुक्त भारत के संकल्प को साकार करने के लिए राष्ट्रव्यापी जनजागरूकता हेतु  “100 दिनों के विशेष अभियान” का शुभारंभ किया।


    प्रातः 10:30 बजे से प्रारम्भ इस कार्यक्रम का लाईव प्रसारण किया गया।
    बाल अधिकारिता निदेशालय, निदेशालय समेकित बाल विकास सेवाएं, निदेशालय महिला अधिकारिता के सभी विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी ऑनलाइन कार्यक्रम में सहभागिता की।साथ ही निदेशालय महिला अधिकारिता के अन्तर्गत समस्त जिलों में कार्यरत नामांकित बाल विवाह निषेध अधिकारी (सीएमपीओ), विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों, मानदेय कार्मिको, महिला सुरक्षा एवं सलाह केन्द्र, वन स्टॉप सेन्टर, पन्नाधाय सुरक्षा एवं सम्मान केन्द्र के सलाहकारों  द्वारा भी आयोजित कार्यक्रम में वेबकास्ट लिंक के माध्यम से ज्वॉईन किया गया एवं समारोह का प्रचार-प्रसार भी किया गया। इस दौरान बाल विवाह मुक्त भारत के लिए शपथ भी ली गई।

    बाल अधिकारिता आयुक्त आशीष मोदी  ने बताया कि राजस्थान में भी बाल विवाह मुक्ति का संकल्प लिया गया।

    उन्होंने बताया कि राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर के सभी अधिकारी, जैसे कि डीपीओ, सीएमपीओ, सीडीपीओ, सुपरवाइजर, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, हेल्पर, और ओएससी, एचईडब्ल्यू, शक्ति सदन, सखी निवास, सीसीआई, सीडब्ल्यूसी और जेजेपी आदि के अधिकारी, कर्मचारी, प्रतिनिधि  स्वास्थ्यकर्मी , विधिक समुदाय, शैक्षणिक संस्थान, समुदाय के नेतागण, सेवा प्रदाता और सिविल सोसायट के लोग ऑनलाइन मोबाइल फोन, कार्यालय के डेस्कटॉप, लैपटॉप या टैबलेट के माध्यम से इस कार्यक्रम में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में पीएचसी, एएनएम और आशा कार्यकर्ता जुड़ी। 

    बाल अधिकारिता आयुक्त ने बताया कि प्रदेश में भारत सरकार के निर्देश अनुसार ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य, पंचायती राज, कृषि, कौशल विकास, शिक्षा, संस्कृति, युवा और खेल आदि जैसे विभागों के अधिकारी , कर्मचारी क्षेत्रीय कार्यकर्ता और स्वयंसेवकों, जैसे कि महिला स्वयं सहायता समूह, My Bharat स्वयंसेवक और शिक्षकों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम को कॉमन सर्विस सेंटर, पंचायत और स्थानीय निकायों में प्रसारित किया गया ।

    बाल विवाह मुक्त भारत मिशन-

    उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष राष्ट्रीय स्तर पर प्रारंभ किए गए बाल विवाह मुक्त भारत मिशन में शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा तथा सामुदायिक जनभागीदारी जैसे बहु-क्षेत्रीय हस्तक्षेपों पर विशेष बल दिया गया है। इसी क्रम में, बाल अधिकारिता विभाग द्वारा अप्रैल 2025 में बाल विवाह मुक्त राजस्थान अभियान प्रारंभ किया गया। यह राज्य-स्तरीय अभियान बाल विवाह के उन्मूलन हेतु केंद्रित रणनीतियों एवं लक्ष्य-निर्धारित पहलों के माध्यम से इस मिशन को आगे बढ़ाते हुए विकसित भारत @ 2047 के व्यापक दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

    इस मिशन का केंद्र बिंदु सशक्त स्थानीय नेतृत्व के माध्यम से सामुदायिक सहभागिता को मजबूत बनाना है। यह अभियान एक जन आंदोलन के रूप में संचालित किया जा रहा है, जिसमें उप मुख्यमंत्री, जिला कलेक्टर, विधायक, पंचायती राज प्रतिनिधि, सिविल सोसायटी संस्थाएँ तथा समुदाय-स्तरीय प्रभावी व्यक्तियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है।

    पिछले वर्षों में राजस्थान ने बाल विवाह की रोकथाम के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 एवं राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार राज्य में बाल विवाह की प्रसार दर 35.4% से घटकर 25.4% हो गई है। यह गिरावट समुदायों, सिविल सोसायटी संगठनों तथा विभिन्न सरकारी विभागों के साझा प्रयासों का परिणाम है, जो बाल अधिकारों एवं बाल कल्याण को सुनिश्चित करने हेतु समन्वित रूप से कार्यरत हैं।

    बाल अधिकारिता विभाग की जमीनी स्तर पर सहभागिता को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका-

    बाल अधिकारिता विभाग ने जमीनी स्तर पर सहभागिता को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं, विद्यालयों तथा पंचायती राज संस्थाओं को क्षमता-वर्धन प्रशिक्षण, सामग्रियों एवं संचार संसाधनों से समर्थित किया गया है, जिससे जागरूकता बढ़ाने और समुदाय को सक्रिय रूप से अभियान से जोड़ने में सहायता मिली है। इन प्रयासों के माध्यम से 2.5 लाख से अधिक सामुदायिक सदस्यों तथा 3 लाख से अधिक विद्यार्थियों से सार्थक संवाद स्थापित किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप बाल विवाह मुक्त राजस्थान के लक्ष्य की दिशा में कार्यरत युवा अग्र-दूतों एवं सामुदायिक समर्थकों का एक उभरता हुआ नेटवर्क तैयार हुआ है।


    राजस्थान का दृष्टिकोण एक समन्वित एवं बहु-विभागीय ढांचे पर आधारित है, जिसका उद्देश्य क्रियान्वयन को और सुदृढ़ करते हुए ऐसे भविष्य का निर्माण करना है जहाँ प्रत्येक बच्चा सुरक्षित, सक्षम हो और बाल विवाह के जोखिम से पूर्णतः मुक्त रह सके।

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