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    निम्स यूनिवर्सिटी राजस्थान को मिली "SOCACON 2026" अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस की मेजबानी कल डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा होंगे कार्यक्रम के मुख्य अतिथि

    1 week ago

    जयपुर। निम्स यूनिवर्सिटी राजस्थान के तत्वावधान में तीन दिवसीय SOCACON 2026 (14वीं अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस ऑफ क्लीनिकल एनाटोमिस्ट्स) का शुभारंभ प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप से हुई। इस वर्कशॉप का विषय सर्जिकल ट्रेनिंग इन एनाटॉमी कंटेम्पररी मॉडल्स एंड इनोवेशन रहा, जिसमें आधुनिक सर्जिकल प्रशिक्षण पद्धतियों और नवीन तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की गई।

     

    कांफ्रेंस के आयोजन समिति अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. कुमार सतीश रवि ने बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में करीब 1 हजार प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। साथ ही 15 से अधिक देशों के विशेषज्ञ इसमें शामिल हुए हैं। जिनमें जर्मनी, यूएसए, मलेशिया, साउथ कोरिया, स्कॉटलैंड, फ्रांस, ब्रिटेन सहित अन्य देशों के एक्सपर्ट प्रतिभागियों को आधुनिक सर्जिकल तकनीकों, नवीन शोध और प्रशिक्षण पद्धतियों की जानकारी प्रदान कर रहे हैं।

     

    बर्नार्ड हर्ट डीन इंस्टिट्यूट ऑफ क्लिनिकल यूनिवर्सिटी टूबिंगन (जर्मनी) व यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो के प्रोफेसर डॉ.पॉल रिया 

    ने कहा सर्जिकल ट्रेनिंग के विभिन्न आयामों पर अपने विचार साझा किए। सत्रों के दौरान सॉफ्ट एम्बाल्म्ड बॉडीज, फ्रेश फ्रोजन बॉडीज के उपयोग तथा उनके लाभ और सीमाओं पर विशेषज्ञों द्वारा महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। साथ ही एनाटॉमिकल प्रिजर्वेशन की नई तकनीकों और डिजिटल टूल्स के माध्यम से सर्जिकल प्रशिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने पर भी चर्चा हुई और सर्जिकल प्रशिक्षण को और अधिक उन्नत बनाने एवं भारतीय मेडिकल शिक्षा प्रणाली को निम्स यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी देश विदेश तक पहुंचने में अहम भूमिका निभाएंगे। 

     

     *वैज्ञानिक लेखन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर हुआ मंथन*

     

    प्रोफेसर जेसन ऑर्गन (यू.एस.ए) व प्रोफेसर योनई (साउथ कोरिया)

    ने साइंटिफिक राइटिंग,साहित्य समीक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते महत्व पर विस्तृत चर्चा की।

    फ्रांस व स्कॉटलैंड के विशेषज्ञों ने कहा शोध कार्य केवल आर्थिक संसाधनों पर निर्भर नहीं करता, बल्कि चुनौतियों का सामना करने की क्षमता और निरंतर अध्ययन से ही गुणवत्तापूर्ण रिसर्च संभव है। उन्होंने साहित्य समीक्षा को शोध का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि यह शोधकर्ताओं को नवीनतम जानकारी से अपडेट रखती है, विशेष रूप से पीएचडी करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह अत्यंत आवश्यक है।

     

    सम्मेलन में सिस्टमेटिक रिव्यू और मेटा-एनालिसिस की उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला गया। विशेषज्ञों ने कहा कि टीमवर्क के माध्यम से बेहतर और मजबूत शोध तैयार किया जा सकता है, जिससे प्रतिष्ठित जर्नल्स में प्रकाशन की संभावना बढ़ती है और संस्थान को भी पहचान मिलती है।

     

    क्लिनिकल क्षेत्र में नवीनतम जानकारी की आवश्यकता पर जोर देते हुए बताया गया कि नई दवाओं और उपचार पद्धतियों, जैसे एंटीबायोटिक्स और एंटी-डायबिटिक दवाओं की जानकारी मरीजों के बेहतर उपचार में सहायक होती है।

     

    3 और 4 अप्रैल को पैनल डिस्कशन, साइंटिफिक पेपर प्रेजेंटेशन,नेशनल क्विज तथा एनाटॉमी विषय पर बॉडी पेंटिंग प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाएगा। जिसमें छात्र-छात्राएं अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। उत्कर्ष प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा।

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