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    नवोदय विद्यालय योजना पर तमिलनाडु सरकार की आपत्ति: सुप्रीम कोर्ट में केंद्र से मौजूदा मॉडल स्कूलों को सहयोग देने की मांग

    2 months ago

    Yugcharan News / 12 March 2026

    नई दिल्ली: नवोदय विद्यालय योजना को लेकर केंद्र और तमिलनाडु सरकार के बीच शिक्षा नीति से जुड़ा विवाद एक बार फिर सामने आया है। तमिलनाडु सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में दायर अपने हलफनामे में कहा है कि राज्य में Jawahar Navodaya Vidyalaya Scheme को लागू करना राज्य की वर्तमान भाषा नीति और शिक्षा ढांचे के साथ मूल रूप से असंगत है।

    राज्य सरकार ने अदालत से कहा है कि केंद्र सरकार यदि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना चाहती है तो नए नवोदय विद्यालय खोलने के बजाय तमिलनाडु में पहले से चल रहे मॉडल स्कूलों के संचालन और विकास में सहयोग करे। सरकार का कहना है कि इन स्कूलों के माध्यम से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के मेधावी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा पहले से ही उपलब्ध कराई जा रही है।

    यह मामला फिलहाल देश की सर्वोच्च अदालत Supreme Court of India में विचाराधीन है, जहां तमिलनाडु सरकार ने विस्तृत हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष रखा है।

    राज्य की भाषा नीति से टकराव का दावा

    तमिलनाडु सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि नवोदय विद्यालय योजना में लागू तीन-भाषा फार्मूला राज्य की दो-भाषा नीति के साथ मेल नहीं खाता। राज्य में लंबे समय से तमिल और अंग्रेज़ी को ही प्रमुख शिक्षण भाषाओं के रूप में अपनाया गया है।

    सरकार ने कहा कि यदि नवोदय विद्यालय योजना को लागू किया जाता है तो इससे राज्य के कानून Tamil Nadu Tamil Learning Act, 2006 के प्रावधानों से विचलन करना पड़ेगा। इस कानून के तहत राज्य के स्कूलों में तमिल भाषा के अध्ययन को अनिवार्य बनाया गया है।

    राज्य सरकार का तर्क है कि नवोदय विद्यालय योजना में तीन भाषाओं के अध्ययन की अनिवार्यता है, जो राज्य की मौजूदा नीति से मेल नहीं खाती और इससे शिक्षा प्रणाली में अनावश्यक जटिलता पैदा हो सकती है।

    सुप्रीम कोर्ट में राज्य का पक्ष

    तमिलनाडु सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता P. Wilson और अधिवक्ता Sabarish Subramanium ने अदालत में राज्य का पक्ष रखा।

    हलफनामे में कहा गया है कि नवोदय विद्यालय योजना के जिन उद्देश्यों का उल्लेख किया जाता है—जैसे ग्रामीण क्षेत्रों के मेधावी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराना—वे तमिलनाडु की शिक्षा प्रणाली में पहले से ही प्रभावी रूप से लागू हैं।

    राज्य सरकार का कहना है कि तमिलनाडु में चल रहे मॉडल स्कूल और अन्य आवासीय विद्यालय इसी उद्देश्य को पूरा कर रहे हैं। इसलिए नए नवोदय विद्यालय स्थापित करने के बजाय केंद्र सरकार को मौजूदा संस्थानों को मजबूत बनाने में सहयोग करना चाहिए।

    नवोदय विद्यालय योजना क्या है

    नवोदय विद्यालय योजना भारत सरकार की एक प्रमुख शिक्षा पहल है, जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली छात्रों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा प्रदान की जाती है।

    इन विद्यालयों का संचालन Navodaya Vidyalaya Samiti द्वारा किया जाता है, जो शिक्षा मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था है।

    देश के अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नवोदय विद्यालय संचालित हैं। इन स्कूलों में कक्षा 6 से लेकर 12 तक के छात्रों को आवासीय सुविधा के साथ शिक्षा दी जाती है।

    सरकार का उद्देश्य ग्रामीण पृष्ठभूमि के मेधावी छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा उपलब्ध कराना है ताकि वे राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।

    तमिलनाडु में अलग शिक्षा मॉडल

    तमिलनाडु लंबे समय से अपनी विशिष्ट भाषा और शिक्षा नीति के लिए जाना जाता है। राज्य में दो-भाषा फार्मूला लागू है, जिसमें तमिल और अंग्रेज़ी को प्राथमिकता दी जाती है।

    राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी राज्य में तीन-भाषा फार्मूले को लेकर अक्सर बहस होती रही है। कई क्षेत्रीय दलों और संगठनों का मानना है कि तीन-भाषा नीति से तमिल भाषा और संस्कृति पर प्रभाव पड़ सकता है।

    इसी पृष्ठभूमि में राज्य सरकार ने अदालत में यह स्पष्ट किया है कि नवोदय विद्यालय योजना को मौजूदा स्वरूप में लागू करना राज्य की शिक्षा नीति के अनुरूप नहीं है।

    केंद्र और राज्य के बीच नीति विवाद

    शिक्षा नीति से जुड़े मामलों में केंद्र और राज्यों के बीच समय-समय पर मतभेद सामने आते रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसे संघीय ढांचे वाले देश में शिक्षा प्रणाली का बड़ा हिस्सा राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आता है, जबकि केंद्र राष्ट्रीय स्तर पर नीतियां और योजनाएं बनाता है।

    ऐसे में कई बार दोनों के बीच नीति समन्वय को लेकर विवाद भी सामने आते हैं। नवोदय विद्यालय योजना को लेकर तमिलनाडु सरकार की आपत्ति भी इसी प्रकार के एक नीति मतभेद के रूप में देखी जा रही है।

    आगे क्या

    अब इस मामले में अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिया जाएगा। अदालत यह तय करेगी कि नवोदय विद्यालय योजना को तमिलनाडु में लागू करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारों और नीतियों के बीच किस प्रकार संतुलन स्थापित किया जा सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले का फैसला भविष्य में केंद्र और राज्यों के बीच शिक्षा नीति से जुड़े अधिकारों और जिम्मेदारियों को लेकर महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है।

    फिलहाल दोनों पक्षों की दलीलें अदालत के समक्ष हैं और आने वाले समय में इस मुद्दे पर न्यायिक निर्णय देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी बहस को नई दिशा दे सकता है।

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