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    प्राकृतिक गैस आवंटन को लेकर केंद्र सरकार का बड़ा कदम, आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कुछ क्षेत्रों को दी प्राथमिकता; लोकसभा में स्पीकर पद पर प्रस्ताव को लेकर तीखी बहस

    2 months ago

    Yugcharan News / 10 March 2026

    नई दिल्ली: देश में ऊर्जा आपूर्ति और संसदीय कार्यवाही से जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के बीच केंद्र सरकार ने प्राकृतिक गैस के वितरण को लेकर एक अहम निर्णय लिया है। सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने और आवश्यक क्षेत्रों की जरूरतों को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से Essential Commodities Act, 1955 के प्रावधानों का सहारा लेते हुए गैस आवंटन के लिए नई व्यवस्था लागू करने की घोषणा की है।

    इस निर्णय के साथ ही संसद में भी राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। लोकसभा में स्पीकर के पद से हटाने के प्रस्ताव को लेकर चर्चा शुरू होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।

    गैस आपूर्ति को लेकर केंद्र की नई प्राथमिकता व्यवस्था

    केंद्र सरकार के Ministry of Petroleum and Natural Gas ने 9 मार्च को जारी एक राजपत्र अधिसूचना में बताया कि प्राकृतिक गैस के वितरण को प्राथमिकता के आधार पर व्यवस्थित किया जाएगा।

    सरकार के अनुसार घरेलू ऊर्जा जरूरतों और सार्वजनिक उपयोग से जुड़े क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी। इनमें पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG), वाहनों के लिए संपीड़ित प्राकृतिक गैस (CNG), एलपीजी उत्पादन और उर्वरक उद्योग जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

    इसके अलावा चाय उद्योग, विनिर्माण इकाइयों और कुछ अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं को भी चरणबद्ध प्राथमिकता सूची में शामिल किया गया है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम उस समय उठाया गया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और कई क्षेत्रों में गैस उपलब्धता को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है।

    वैश्विक घटनाक्रम का प्रभाव

    हाल के अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के कारण ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता देखने को मिल रही है। रिपोर्टों के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर उसके प्रभाव ने कई देशों में ऊर्जा संसाधनों की उपलब्धता पर दबाव डाला है।

    भारत भी ऊर्जा आयात पर काफी हद तक निर्भर है, इसलिए वैश्विक बाजारों में किसी भी तरह का उतार-चढ़ाव देश की घरेलू आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

    इसी संदर्भ में सरकार ने आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए गैस आवंटन की व्यवस्था को अधिक संगठित करने का निर्णय लिया है ताकि घरेलू उपभोक्ताओं और महत्वपूर्ण उद्योगों की जरूरतें पूरी की जा सकें।

    एलपीजी और गैस आपूर्ति पर चिंता

    देश के कुछ हिस्सों में व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति को लेकर भी चिंता सामने आई है। विशेष रूप से होटल और रेस्तरां उद्योग से जुड़े संगठनों ने आपूर्ति में बाधा आने की आशंका जताई है।

    दक्षिण भारत के कई शहरों में छोटे होटल और भोजनालयों ने कहा है कि यदि गैस आपूर्ति में व्यवधान जारी रहा तो उनके संचालन पर असर पड़ सकता है। हालांकि सरकारी सूत्रों का कहना है कि स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा संसाधनों के प्रबंधन के लिए इस तरह की प्राथमिकता व्यवस्था अस्थायी रूप से प्रभावी साबित हो सकती है, खासकर तब जब वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बनी हुई हो।

    लोकसभा में स्पीकर पद को लेकर प्रस्ताव

    ऊर्जा नीति से जुड़े इस घटनाक्रम के साथ ही संसद में भी राजनीतिक माहौल गर्म रहा। मंगलवार को Lok Sabha में स्पीकर Om Birla को पद से हटाने से संबंधित प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हुई।

    यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Jawed द्वारा पेश किया गया था। प्रस्ताव पर चर्चा शुरू होते ही संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।

    विपक्षी सांसदों ने कार्यवाही के दौरान कुछ प्रक्रियात्मक मुद्दों को उठाया। उनका कहना था कि स्पीकर द्वारा नियुक्त अध्यक्षों के पैनल में से किसी सदस्य का कार्यवाही की अध्यक्षता करना उचित नहीं है, जब स्पीकर के पद से हटाने का प्रस्ताव चर्चा के लिए रखा गया हो।

    उपाध्यक्ष पद को लेकर भी उठा सवाल

    चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal और सांसद Gaurav Gogoi ने लोकसभा के उपाध्यक्ष पद के लंबे समय से खाली रहने का मुद्दा भी उठाया।

    विपक्ष का तर्क था कि संसदीय परंपराओं के अनुसार उपाध्यक्ष का पद भरा होना चाहिए, ताकि इस तरह की परिस्थितियों में कार्यवाही को निष्पक्ष तरीके से संचालित किया जा सके।

    इसी दौरान एआईएमआईएम के सांसद Asaduddin Owaisi ने भी इस विषय को उठाते हुए संसदीय प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं पर सवाल उठाए।

    संसद में राजनीतिक माहौल

    संसद के भीतर इस मुद्दे को लेकर बहस के दौरान कई बार तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि सभी प्रक्रियाएं संसदीय नियमों के अनुसार ही संचालित की जा रही हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार स्पीकर पद से जुड़े प्रस्ताव पर चर्चा का संसद की कार्यवाही और राजनीतिक माहौल पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

    ऊर्जा नीति और संसदीय घटनाक्रम पर नजर

    एक ओर जहां सरकार ऊर्जा संसाधनों के प्रबंधन को लेकर नीतिगत कदम उठा रही है, वहीं संसद में राजनीतिक बहस भी तेज होती दिखाई दे रही है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि ऊर्जा सुरक्षा और संसदीय प्रक्रियाओं से जुड़े ये दोनों घटनाक्रम आने वाले समय में राष्ट्रीय नीति और राजनीतिक विमर्श को प्रभावित कर सकते हैं।

    फिलहाल केंद्र सरकार द्वारा प्राकृतिक गैस आवंटन को लेकर लागू की गई नई प्राथमिकता व्यवस्था और संसद में चल रही बहस दोनों ही विषय राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।

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