Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    शिक्षक एवं विद्यार्थी हितों पर चोट बर्दाश्त नहीं, शैक्षणिक कलेंडर में शीघ्र संशोधन हो,अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) ने सरकार से की मांग

    1 week ago

    जयपुर। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान विद्यालय शिक्षा के प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा ने बताया कि निदेशालय बीकानेर द्वारा शिविरा पंचांग 2026-27 जारी किया गया है जो कि शिक्षको एवं छात्र हितों के प्रतिकूल है। इस संबंध में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) द्वारा श्रीमान शिक्षा सचिव व निदेशक महोदय को अवगत करवाते हुए संगठन की मांगो की ध्यान में रखते हुए शिविरा पंचांग जारी करने की सहमति प्रदान की थी। किन्तु खेद के साथ लिखना पड़ रहा है कि जिन तीन बिंदुओं पर सहमति बनी थी उन तीनों बिंदुओं को नजरअंदाज किया गया है।

     

    संगठन की शिक्षा अधिकारियों से हुई वार्ता के दौरान शिक्षा अधिकारियों द्वारा ग्रीष्मावकाश 17 मई से 20 जून किये जाने को कहा गया जिस पर संगठन द्वारा राजस्थान सेवा नियमो में विगत कई वर्षों से दिए जा रहे ग्रीष्मावकाश की कटौती किये जाने पर आंदोलन के मार्ग अपनाये जाने व ऐसे निर्णय का विरोध करने को कहा गया था जिसके बाद ग्रीष्मावकाश में किसी प्रकार कटौति नहीं करने का आश्वासन दिया गया। किंतु प्रासंगिक शिविरा पंचांग में ग्रीष्मावकाशों में कटौती कर 17 मई से 30 जून के बजाय 17 मई से 20 जून तक ग्रीष्मावकाश रखे जाने के आदेश जारी किए है। इस संबंध में संगठन का आग्रह है कि शिक्षा अधिकारी वार्ता में सहमति बनाने के बाद भी मनमाने आदेश जारी करते है तो इससे सरकार की छवि धूमिल होती है।

     

    प्रदेशाध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा ने कहा कि राजस्थान सेवा नियमो में शिक्षा विभाग, न्यायालय एवं अन्य कुछ विभाग विश्राम कालीन विभाग के रूप में जाने जाते है जिनमे कर्मचारियों को ग्रीष्मावकाश में वेतन दिया जाता है एवं अवकाश दिए जाने कारण 30 के बजाय केवल 15 पी. एल. ही देय होती है। ऐसे में यदि ग्रीष्मावकाश कम किये जाते है तो पी. एल. 15 के बजाय 30 पी.एल. अन्य विभाग के कार्मिको की तरह दी जानी चाहिए। वही गर्मियों के कारण उक्त अवकाश अवधि में बालक विद्यालय भी नही आते है। ऐसे में जल्द विद्यालय खोलने के आदेश से छात्रों को कोई लाभ नही होगा, तथा माह से ही गर्मी का प्रचंड प्रकोप प्रारम्भ हो जाने के कारण संगठन ने वार्ता में विद्यालयों का प्रातःकालीन समय (7.30 से 1.00 बजे तक) 01 अप्रैल से किये जाने के बजाय 01 मार्च से किये जाने की मांग पर आश्वासन दिया था किंतु उसमे भी किसी प्रकार का बदलाव नही किया गया। निवेदन है कि स्थानीय मेलो, त्यौहारों तथा स्थानीय परिस्थितियों के कारण प्रधानाध्यापक / प्रधानाचार्य द्वारा वर्ष में 2 अधिकृत अवकाश घोषित किये जाते हैं जिसमे कटौती कर मात्र 1 कर दिया गया है इस प्रकार 1 अवकाश में कटौती की गई।

     

    संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा, प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा, प्रदेश सभा अध्यक्ष संपत सिंह , प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष रवि आचार्य, प्रदेश मंत्री अमरजीत सिंह, प्रदेश अतिरिक्त महामंत्री बसंत जिंदल,प्रदेश महिला उपाध्यक्ष सुषमा बिश्नोई, प्रदेश महिला मंत्री गीता जैलिया, प्रदेश कोषाध्यक्ष कैलाश कच्छावा सहित संपूर्ण प्रदेश कार्यकारिणी ने एक स्वर से कहा कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मनमानी के कारण संगठन की उचित मांगो पर सहमति के बाद भी दरकिनार किया गया है जिससे संगठन के शिक्षको में भारी आक्रोश व्याप्त है। संगठन का आग्रह है कि उक्त तीनों बिंदुओं पर वार्ता के दौरान बनी सहमति व आश्वासन के अनुसार ग्रीष्मावकाश 17 मई से 30 जून यथावत रखने अन्यथा पी.एल. देने के आदेश पारित करवाए, प्रातःकालीन विद्यालय समय 01 अप्रैल के बजाय 1 मार्च से प्रारंभ किया जावे। तथा प्रधानाध्यापक द्वारा घोषित अवकाश पूर्व की भांति 2 अवकाश यथावत रखे जाने के आदेश पारित करवाने का कष्ट करावें। शिक्षक व छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए ऐसे आदेशो में संशोधन शीघ्र होना चाहिए। अन्यथा विवश होकर आगामी समय मे संगठन को आंदोलन के मार्ग की ओर अग्रसर होने पड़ेगा जिसकी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की रहेगी।

     

    Click here to Read More
    Previous Article
    यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एवं डांगायच ग्रुप के बीच एमओयू हस्ताक्षर, विद्यार्थियों के लिए रोजगारोन्मुखी अवसर बढ़ेंगे
    Next Article
    प्लास्टिक कचरा संग्रहण अभियान का आयोजन, छात्राओं ने बढ़ चढ़ कर लिया भाग

    Related राजस्थान Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment