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    शेयर बाजार में शुरुआती गिरावट, 2-दिवसीय तेजी के बाद निवेशक सतर्क

    3 days ago

    भारत के शेयर बाजारों ने गुरुवार, 29 जनवरी 2026 को शुरुआती कारोबार में गिरावट दर्ज की, जो पिछले दो दिनों की तेज़ बढ़त के बाद आई। निवेशक आगामी संघीय बजट 2026-27 के प्रदर्शन से पहले सतर्क दिखाई दिए। इस बीच, BSE सेंसेक्स और NSE निफ्टी दोनों में शुरुआती कारोबार में गिरावट रही।

    शुरुआती कारोबार का विवरण

    30 शेयरों वाला BSE सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 343.67 अंक गिरकर 82,001.01 पर आ गया। वहीं, 50 शेयरों वाला NSE निफ्टी 94.2 अंक की गिरावट के साथ 25,248.55 पर खुला।

    सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में मारुति सुजुकी इंडिया की हिस्सेदारी लगभग 3% गिर गई। इसके पीछे मुख्य कारण दिसंबर तिमाही के नतीजे थे, जो निवेशकों को उत्साहित नहीं कर सके। मारुति ने FY26 की दिसंबर तिमाही में ₹3,879 करोड़ का समेकित शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 4% अधिक था। हालांकि, नए लेबर कोड्स के तहत 594 करोड़ रुपये की एक-बार की प्रावधान राशि ने निवेशकों को निराश किया।

    इसके अलावा, एशियन पेंट्स, टाइटन, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), हिंदुस्तान यूनिलीवर और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी कंपनियों के शेयर भी शुरुआती कारोबार में पीछे रहे।

    वहीं, लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने अपने अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के समेकित राजस्व में 10% की बढ़ोतरी दर्ज की, जो ₹71,450 करोड़ रहा, पिछले वर्ष के ₹64,668 करोड़ के मुकाबले। इसके चलते L&T के शेयर 3% से अधिक बढ़ गए।

    अन्य लाभार्थी कंपनियों में टाटा स्टील, NTPC, पावर ग्रिड और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया शामिल हैं।

    बजट के पहले निवेशकों की सतर्कता

    विशेषज्ञों का कहना है कि बजट जैसे बड़े आर्थिक कार्यक्रम के पहले निवेशक अधिक सतर्क हो जाते हैं। Mehta Equities Ltd के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (अनुसंधान), प्रशांत टपसे ने कहा:

    “रविवार को पेश होने वाले संघीय बजट को देखते हुए बाजार में अस्थिरता की संभावना है, लेकिन गिरावट सीमित प्रतीत होती है। सभी की नजरें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर हैं, जो निवेशकों को प्रोत्साहक संकेत दे सकती हैं।”

    इस समय निवेशक विशेष रूप से मूल्य संवेदनशील क्षेत्रों और बड़े इंडेक्स शेयरों पर ध्यान दे रहे हैं।

    विदेशी और घरेलू निवेशकों की भूमिका

    बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बुधवार को कुछ दिनों की बिक्री के बाद खरीदारी शुरू की। उन्होंने शेयरों में ₹480.26 करोड़ का निवेश किया। इसी तरह, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी ₹3,360.59 करोड़ के शेयर खरीदे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बजट से पहले इस तरह की खरीदारी और बिक्री बाजार में अस्थिरता पैदा कर सकती है, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से यह निवेशकों के लिए अवसर भी पेश करती है।

    एशियाई और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति

    एशियाई बाजारों में मिश्रित रुख देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का Kospi और हांगकांग का Hang Seng उच्च स्तर पर कारोबार कर रहा था, जबकि जापान का Nikkei 225 और शंघाई का SSE Composite कम स्तर पर रहे।

    अमेरिकी बाजार बुधवार को स्थिर रहे। वहीं, वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड में 1.08% की तेजी दर्ज की गई, और यह $69.14 प्रति बैरल पर पहुंचा। तेल की कीमतों में यह तेजी भारतीय बाजारों में ऊर्जा शेयरों पर असर डाल सकती है।

    सेक्टरल प्रदर्शन

    इस समय निवेशकों की निगाहें विशेष रूप से आईटी, ऑटोमोबाइल, FMCG और वित्तीय क्षेत्र पर हैं।

    • मारुति सुजुकी की गिरावट ने ऑटोमोबाइल सेक्टर पर दबाव डाला।

    • एशियन पेंट्स और हिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयरों में गिरावट से FMCG सेक्टर प्रभावित हुआ।

    • L&T और पावर ग्रिड में तेजी से निर्माण और इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में मजबूती आई।

    • बैंकिंग क्षेत्र में SBI और अन्य प्रमुख बैंक शेयरों की स्थिरता निवेशकों के भरोसे को दर्शाती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बजट के बाद कई सेक्टर में तेजी आने की संभावना है, खासकर यदि सरकार द्वारा प्रो-ग्रोथ (विकासोन्मुख) नीतियाँ घोषित की जाती हैं।

    बजट की भूमिका

    आगामी संघीय बजट निवेशकों और बाजार के लिए निर्णायक होगा।

    • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से अपेक्षित है कि वे कर सुधार, अवसंरचना निवेश, और वित्तीय समर्थन के संकेत दें।

    • बजट में संभावित घोषणाएँ जैसे उद्योगों के लिए टैक्स लाभ, सरकारी परियोजनाओं में निवेश, और नई वित्तीय योजनाएँ निवेशकों को प्रेरित कर सकती हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बजट से पहले बाजार में हल्की गिरावट सामान्य है, क्योंकि निवेशक संभावित घोषणाओं और उनके असर को परख रहे हैं।

    समग्र विश्लेषण

    शेयर बाजार की यह अस्थिरता दर्शाती है कि निवेशक आगामी बजट को लेकर सतर्क हैं। निवेशकों का रुख यह दिखाता है कि वे केवल संभावित लाभ के लिए नहीं बल्कि बाजार में स्थिरता और नीति के संकेतों के लिए भी निवेश निर्णय ले रहे हैं।

    इस समय बाजार की चाल कई कारकों से प्रभावित है:

    1. दिसंबर तिमाही के नतीजे – विशेषकर मारुति और अन्य बड़ी कंपनियों के।

    2. वैश्विक तेल और कमोडिटी बाजार – ब्रेंट क्रूड और अंतरराष्ट्रीय कीमतों का असर।

    3. विदेशी और घरेलू निवेशकों की खरीद-बिक्री – FIIs और DIIs की भूमिका।

    4. आगामी संघीय बजट – विकासोन्मुख नीतियों के संकेत।

    निष्कर्ष

    संक्षेप में, गुरुवार की शुरुआती गिरावट केवल अल्पकालिक अस्थिरता का संकेत है। निवेशक सतर्क हैं, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से बाजार में संभावनाएँ अभी भी मजबूत हैं। बजट के परिणाम और कंपनियों के तिमाही प्रदर्शन भविष्य में बाजार की दिशा तय करेंगे।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशक लंबी अवधि के लिए संतुलित पोर्टफोलियो, विविधीकृत निवेश और सतर्क रणनीति अपनाएँ।

     

    निष्कर्ष रूप में, बाजार में हल्की गिरावट और अस्थिरता निवेशकों के लिए अवसर और चेतावनी दोनों पेश करती है। आने वाले बजट के बाद यह तय होगा कि बाजार की दिशा कितनी स्थिर और विकासोन्मुख होगी।

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