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    परीक्षा के समय बच्चों को किन बातों पर ध्यान देना चाहिए: एक अध्यापक की नज़र से

    1 day ago

    मिस निशी धंजल, प्रिंसिपल, धाराव हाई स्कूल, अजमेर रोड़ 

    परीक्षा का समय बच्चों के लिए सबसे संवेदनशील दौर होता है। इस समय उनमें पढ़ाई का दबाव, अच्छे अंक लाने की चिंता और असफलता का डर एक साथ काम करता है। एक शिक्षिका के रूप में मैं अक्सर देखती हूँ कि कई बच्चे अच्छी तैयारी के बावजूद घबराहट के कारण अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाते। इसलिए ज़रूरी है कि परीक्षा को बोझ नहीं, बल्कि अपनी सीख को परखने के अवसर के रूप में देखा जाए।

     

    *योजनाबद्ध पढ़ाई और नियमित अभ्यास की भूमिका-* 

     

    अच्छी परीक्षा तैयारी की शुरुआत समय पर और सही योजना बनाने से होती है। बच्चों को चाहिए कि वे पूरे सिलेबस को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटकर रोज़ाना पढ़ाई करें, ताकि आख़िरी समय में जल्दबाज़ी और तनाव से बचा जा सके। पढ़ाई का एक निश्चित समय तय करना और उसी का नियमित पालन करना अनुशासन विकसित करता है, वहीं अपने लिए अनुकूल समय, चाहे सुबह हो या शाम चुनने से पढ़ाई अधिक प्रभावी बनती है। इसके साथ ही नियमित रिवीजन और अभ्यास बेहद ज़रूरी है, क्योंकि किसी भी विषय को लंबे समय तक याद रखने के लिए उसे बार-बार दोहराना आवश्यक होता है। पुराने प्रश्नपत्रों और मॉडल पेपर का अभ्यास करने से परीक्षा के पैटर्न की समझ बढ़ती है, आत्मविश्वास मजबूत होता है और बच्चों को यह स्पष्ट हो जाता है कि किन विषयों या अध्यायों पर उन्हें अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।

     

     

    *तनाव प्रबंधन, परीक्षा दिन की रणनीति-* 

     

    परीक्षा के दौरान तनाव से पूरी तरह बचना भले ही संभव न हो, लेकिन सही आदतों से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। बच्चों को अपनी तुलना दूसरों से करने से बचना चाहिए, क्योंकि यह अनावश्यक दबाव बढ़ाता है। हल्का व्यायाम, योग, ध्यान और गहरी साँस लेने जैसे अभ्यास मन को शांत रखते हैं और एकाग्रता बढ़ाते हैं। इसके साथ ही नींद और खान-पान का विशेष ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है, क्योंकि देर रात तक जागकर पढ़ने से दिमाग़ थक जाता है और याद करने की क्षमता कम हो जाती है। रोज़ाना 7 से 8 घंटे की पूरी नींद और संतुलित आहार, जिसमें फल, हरी सब्ज़ियाँ, दूध और पर्याप्त पानी शामिल हों, मानसिक ऊर्जा बनाए रखते हैं, जबकि जंक फूड और अधिक चाय-कॉफी से बचना चाहिए। परीक्षा के दिन संयम और आत्मविश्वास सबसे बड़े सहायक होते हैं, इसलिए प्रश्नपत्र को ध्यान से पढ़कर पहले वही प्रश्न हल करने चाहिए जो अच्छे से आते हों। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है, समय का सही उपयोग होता है और किसी कठिन प्रश्न पर अटकने की स्थिति में शांत रहकर आगे बढ़ना समझदारी साबित होती है।

     

    *शिक्षक का संदेश-* 

     

    अंत में, एक शिक्षिका के रूप में मैं बच्चों से यही कहना चाहूँगी कि परीक्षा जीवन का सिर्फ़ एक हिस्सा है, पूरी ज़िंदगी नहीं। अच्छे अंक लाना ज़रूरी है, लेकिन अंक ही आपकी काबिलियत का पूरा पैमाना नहीं होते। सच्चे मन से की गई मेहनत कभी बेकार नहीं जाती, उसका फल किसी न किसी रूप में ज़रूर मिलता है। पढ़ाई के दौरान अगर कोई बात समझ न आए या मन में डर हो, तो माता-पिता और शिक्षकों से खुलकर बात करें, इससे मन हल्का होता है और सही दिशा भी मिलती है। खुद पर भरोसा रखें, सकारात्मक सोच बनाए रखें और घबराने के बजाय शांत मन से पढ़ाई करें। जब सही तैयारी, नियमित अभ्यास और संतुलित दिनचर्या अपनाई जाती है, तो परीक्षा बोझ नहीं लगती, बल्कि आगे बढ़ने का एक अच्छा मौका बन जाती है।

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