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    तमिलनाडु में अल्पसंख्यक वोटों को लेकर राजनीतिक रणनीति का आरोप, विजय पर विधानसभा अध्यक्ष एम. अप्पावु की टिप्पणी

    3 days ago

    तमिलनाडु की राजनीति में नई बहस उस समय तेज हो गई जब विधानसभा अध्यक्ष एम. अप्पावु ने अभिनेता से नेता बने तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के संस्थापक अध्यक्ष विजय की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विजय राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की एक सुविचारित राजनीतिक रणनीति के अनुरूप काम कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य पारंपरिक रूप से द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) का समर्थन करने वाले अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच भ्रम पैदा करना है।

    बुधवार को तिरुनेलवेली में छात्रों को निःशुल्क लैपटॉप वितरित करने के बाद पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में अध्यक्ष अप्पावु ने यह दावा किया। उन्होंने कहा कि भाजपा और TVK के बीच तालमेल राज्य की राजनीति में एक सोची-समझी योजना का हिस्सा है।

    “राजनीतिक भूमिका में अभिनय” का आरोप

    एम. अप्पावु ने कहा कि फिल्मी दुनिया से राजनीति में आने के बाद विजय ने अभिनय छोड़ा जरूर है, लेकिन वे अब एक अलग मंच पर “राजनीतिक भूमिका” निभा रहे हैं। उनके अनुसार, तमिलनाडु में भाजपा और TVK एक सुनियोजित रणनीति के तहत काम कर रहे हैं, ताकि अल्पसंख्यक समुदायों के बीच DMK को लेकर भरोसे को कमजोर किया जा सके।

    उन्होंने यह भी कहा कि यह पूरी प्रक्रिया किसी पूर्व निर्धारित पटकथा की तरह दिखाई देती है, जिसमें हर कदम सोच-समझकर उठाया जा रहा है। अप्पावु का कहना था कि यह प्रयास राज्य की सामाजिक और राजनीतिक संरचना को प्रभावित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

    उत्तर भारत के उदाहरण का उल्लेख

    अप्पावु ने अपने बयान में उत्तर भारत की राजनीति का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भाजपा ने कुछ क्षेत्रों में ऐसे नेताओं को आगे बढ़ाया, जिससे अल्पसंख्यक वोटों का एकतरफा ध्रुवीकरण न हो सके। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी तरह की रणनीति तमिलनाडु में भी अपनाई जा रही है, जहां विजय को एक वैकल्पिक चेहरे के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।

    हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि राज्य के मुस्लिम और ईसाई समुदाय राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर सजग हैं और वे किसी भी प्रकार की रणनीति को आसानी से समझ सकते हैं। उनके अनुसार, अल्पसंख्यक समुदायों का समर्थन केवल प्रतीकात्मक राजनीति से प्रभावित होने वाला नहीं है।

    राज्यपाल और सरकार के बीच संबंधों पर टिप्पणी

    राजनीतिक आरोपों के अलावा, विधानसभा अध्यक्ष ने राज्यपाल आर.एन. रवि और तमिलनाडु सरकार के बीच हालिया घटनाक्रम पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि विधानसभा में राज्यपाल के पारंपरिक अभिभाषण के दौरान सभी संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया।

    अप्पावु के अनुसार, राज्यपाल का अभिभाषण सरकार द्वारा तैयार किए गए पाठ पर आधारित होता है और इसे पढ़ने से पहले उनकी सहमति ली जाती है। उन्होंने कहा कि अभिभाषण के मुद्रण से पहले भी राज्यपाल की मंजूरी प्राप्त की गई थी।

    संवैधानिक मर्यादाओं पर जोर

    विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सदन में अध्यक्ष, मुख्यमंत्री और अन्य सदस्यों ने लोकतांत्रिक परंपराओं और संसदीय मर्यादाओं का पूरी तरह सम्मान किया। उनका कहना था कि राज्यपाल से भी यही अपेक्षा की जाती है कि वे स्थापित परंपराओं के अनुरूप ही सदन को संबोधित करें।

    उन्होंने यह संकेत भी दिया कि किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को व्यक्तिगत विचारों से ऊपर उठकर संस्थागत गरिमा बनाए रखनी चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में टकराव की स्थिति न बने।

    बढ़ती राजनीतिक सरगर्मी

    तमिलनाडु में हाल के महीनों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हुई हैं। नए दलों और चेहरों के उभार के बीच सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच बयानबाजी भी बढ़ी है। विजय की राजनीति में सक्रियता और उनकी पार्टी की गतिविधियों को लेकर अलग-अलग दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में राज्य की राजनीति में गठजोड़, रणनीति और मतदाता आधार को लेकर चर्चा और तेज हो सकती है। विधानसभा अध्यक्ष की टिप्पणी को इसी व्यापक राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है, जहां हर दल अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश कर रहा है।

    फिलहाल, विजय या उनकी पार्टी की ओर से इन आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

     
     
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