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    चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल; MCX पर मार्च वायदा 7% तक बढ़ा, सिल्वर ETFs में तेजी

    9 hours ago

    बुधवार को भारतीय शेयर और कमोडिटी बाजारों में चांदी ने रिकॉर्ड रैली दर्ज की, जिससे सिल्वर आधारित एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिली। Multi Commodity Exchange (MCX) पर चांदी के वायदा अनुबंधों ने 7% से अधिक की इंट्राडे बढ़त दर्ज की, जो निवेशकों और बाजार विश्लेषकों दोनों के लिए आश्चर्यजनक रहा।

    MCX पर मार्च वायदा के लिए चांदी की कीमत 7.52% की वृद्धि के साथ ₹3,83,100 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। इसी तरह मई वायदा ₹3,95,753 प्रति किलोग्राम और जुलाई वायदा ₹4,14,446 प्रति किलोग्राम के नए उच्च स्तर पर पहुंचा। यह आंकड़े चांदी के बाजार में पिछले रिकॉर्ड को पार करने का संकेत देते हैं और निवेशकों के बीच मजबूत खरीदारी की प्रवृत्ति को दर्शाते हैं।

    सिल्वर ETFs में तेजी
    सिल्वर ETFs ने भी चांदी की तेजी के अनुरूप शानदार प्रदर्शन किया। Mirae Asset Silver ETF, Axis Silver ETF, Motilal Oswal Silver ETF, Zerodha Silver ETF, Aditya Birla Silver ETF और Nippon India Silver ETF ने सत्र के दौरान 6% से अधिक की बढ़त दर्ज की।

    वहीं, 360 ONE Silver ETF, Groww Silver ETF, SBI Silver ETF, HDFC Silver ETF, DSP Silver ETF समेत कई अन्य ETFs ने 5% से अधिक की तेजी दिखाई। यह दर्शाता है कि निवेशकों का रुझान केवल कमोडिटी बाजार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ETFs में भी मजबूत निवेश प्रवाह देखा गया।

    विशेषज्ञों का विश्लेषण
    IndusInd Securities के वरिष्ठ विश्लेषक, जिगर त्रिवेदी ने बताया कि सिल्वर ETFs की कीमतें निकट भविष्य में अस्थिर रह सकती हैं और यदि लेवरेज या सेंटिमेंट-ड्रिवन प्रवाह में तेजी आती है तो स्पॉट चांदी की तुलना में ETFs अधिक उतार-चढ़ाव दिखा सकते हैं।

    त्रिवेदी ने यह भी कहा कि चांदी की आपूर्ति संरचनात्मक रूप से सीमित है क्योंकि यह मुख्य रूप से अन्य धातुओं का उप-उत्पाद है और इसे तेजी से बढ़ाया नहीं जा सकता। इसके अलावा, सोलर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों, इलेक्ट्रॉनिक्स और उभरती तकनीकी मांग के कारण औद्योगिक खपत बढ़ी है, जो कीमतों का समर्थन करती है।

    उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि मैक्रोइकॉनॉमिक अनिश्चितता और कम या नकारात्मक वास्तविक ब्याज दरों के बीच सुरक्षित निवेश की मांग भी सिल्वर की कीमतों को बनाए रखने में सहायक है।

    ETFs और निवेश प्रवाह
    सिल्वर ETFs निवेशकों को भौतिक चांदी के बजाय स्टॉक एक्सचेंज पर निवेश करने का विकल्प प्रदान करते हैं। ये फंड सुरक्षित वॉल्ट में रखी गई भौतिक चांदी के जरिए समर्थित होते हैं और स्टॉक्स की तरह कारोबार किए जाते हैं।

    2025 में सिल्वर ETFs में ₹234.7 अरब का निवेश प्रवाह दर्ज किया गया, जो पिछले साल ₹85.69 अरब के मुकाबले लगभग तीन गुना अधिक है। यह प्रवाह दर्शाता है कि निवेशक अब चांदी को केवल औद्योगिक उपयोग के लिए नहीं बल्कि निवेश उपकरण के रूप में भी देख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चांदी की कीमतों में यह रैली जारी रहती है तो आने वाले महीनों में निवेश आधारित आयात में और वृद्धि हो सकती है।

    सिल्वर बनाम गोल्ड
    हाल के महीनों में चांदी की कीमतों ने सोने की तुलना में अधिक तेजी दिखाई है। जबकि पहले चांदी की मांग मुख्य रूप से औद्योगिक खपत से प्रेरित थी, अब निवेशक और सुरक्षित-हैवन प्रवाह इसके मुख्य चालक बन गए हैं। यह बदलाव विशेष रूप से ETFs में निवेश की प्रवृत्ति से स्पष्ट होता है।

    बाजार पर व्यापक प्रभाव
    चांदी की इस रैली का असर कमोडिटी बाजारों और निवेशकों के समग्र विश्वास पर भी पड़ा है। MCX पर उच्च मूल्य स्तर ने निवेशकों में तेजी की भावना बढ़ाई और ETFs में आकर्षक रिटर्न की संभावना ने उन्हें उत्साहित किया।

    विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि मौजूदा समय में चांदी की मांग में वैश्विक स्तर पर भी वृद्धि देखी जा रही है। तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्र, विशेषकर इलेक्ट्रिक वाहन और सोलर पैनल उत्पादन में चांदी की खपत बढ़ी है। इस वजह से मौजूदा रैली का आधार सिर्फ निवेश प्रवाह नहीं बल्कि वास्तविक उद्योग की मांग भी है।

    निवेशकों के लिए सुझाव
    विश्लेषकों ने निवेशकों को चेताया है कि चांदी और ETFs में अस्थिरता बनी रह सकती है। निवेशक उच्च उतार-चढ़ाव और भावी जोखिम को समझकर ही निवेश करें। इसके लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना और भावनाओं के आधार पर जल्दबाजी में खरीद-बिक्री से बचना महत्वपूर्ण है।

    इसके अलावा, निवेशकों को विशेषज्ञ सलाह के आधार पर ही ETFs में निवेश करने और पोर्टफोलियो का संतुलन बनाए रखने की सलाह दी जाती है।

    सरकार और नीति निर्माताओं की भूमिका
    हालांकि चांदी की कीमतों में रैली मुख्य रूप से बाजार की ताकत और वैश्विक मांग से प्रभावित है, लेकिन नीतिगत स्थिरता और आयात-निर्यात नियमों का भी इसमें योगदान है। यदि आयात शुल्क या व्यापार नीतियाँ अचानक बदलती हैं तो कीमतों में अस्थिरता बढ़ सकती है।

    निष्कर्ष
    बुधवार की तेजी से यह स्पष्ट हुआ कि चांदी और सिल्वर ETFs निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बने हुए हैं। MCX पर वायदा अनुबंधों के रिकॉर्ड स्तर और ETFs में मजबूत निवेश प्रवाह ने निवेशकों के विश्वास को मजबूत किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में सिल्वर का दीर्घकालिक दृष्टिकोण सकारात्मक है, लेकिन निवेशकों को अस्थिरता और बाजार जोखिम का ध्यान रखना आवश्यक है।

     

    यह रैली यह भी दर्शाती है कि चांदी अब केवल औद्योगिक उपयोग की धातु नहीं रही बल्कि निवेशकों के पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा बन चुकी है।

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